Petrol Diesel Price Hike : करीब दो साल तक स्थिर रहने के बाद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। 15 मई 2026 से लागू नई दरों के अनुसार देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग ₹3 प्रति लीटर तक बढ़ा दिए गए हैं। इसके साथ ही प्रमुख शहरों में CNG की कीमतों में भी ₹2 प्रति किलो तक का इजाफा हुआ है।
Written by Kajal Panchal • Published on : 15 May 2026
IBN24 News Network : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अब पेट्रोल ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर बिक रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर परिवहन, खाद्य पदार्थों, खेती और रोजमर्रा के घरेलू खर्चों पर भी पड़ने की संभावना है।
देशभर के प्रमुख शहरों में बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
नई कीमतें 15 मई 2026 से लागू हो गई हैं। लगभग सभी बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।
15 मई 2026 के बाद प्रमुख शहरों में पेट्रोल की नई कीमतें

15 मई 2026 के बाद प्रमुख शहरों में डीजल की नई कीमतें

CNG भी हुई महंगी
पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ CNG की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब CNG ₹79.09 प्रति किलो की दर से मिलेगी। इस बढ़ोतरी का असर ऑटो चालकों, कैब ड्राइवरों और रोजाना CNG वाहनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों पर भी पड़ेगा।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों बढ़ीं ?
इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज वृद्धि है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से पहले क्रूड ऑयल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन ईरान-अमेरिका संघर्ष और वैश्विक सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं के कारण अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है।
कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल के कारण भारतीय तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया था।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से घाटे में चल रही थीं क्योंकि घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखी गई थीं।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार इन कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ तक का नुकसान हो रहा था।
इसी घाटे को कम करने और बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिए सरकार और तेल कंपनियों ने ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया।
2024 से स्थिर थीं ईंधन कीमतें
देश में मार्च 2024 से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई थी। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती की थी।
हालांकि भारत में ईंधन की कीमतें तकनीकी रूप से विनियमित नहीं हैं और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर रोजाना दाम बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता और महंगाई की चिंता के कारण लंबे समय तक कीमतों में बदलाव नहीं किया गया।
सरकार ने पहले एक्साइज ड्यूटी घटाई थी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती तेल कीमतों के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने पहले स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-₹10 प्रति लीटर की कटौती की थी।
इसके तहत पेट्रोल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी गई थी, जबकि डीजल पर यह ₹10 से घटाकर शून्य कर दी गई थी।
कटौती के बाद:

- पेट्रोल पर कुल केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी ₹21.90 से घटकर ₹11.90 प्रति लीटर रह गई थी।
- डीजल पर कुल केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी ₹17.80 से घटकर ₹7.80 प्रति लीटर हो गई थी।
इन कर कटौतियों की वजह से पिछले दो वर्षों तक ईंधन की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी रहीं।
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर ?
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन और माल ढुलाई पर पड़ता है, जिससे लगभग हर जरूरी वस्तु महंगी हो सकती है।
परिवहन और मालभाड़ा बढ़ेगा
सब्जियां, फल, अनाज और रोजमर्रा की जरूरत का सामान दूसरे राज्यों से ट्रकों और मालवाहक वाहनों के जरिए पहुंचाया जाता है, जिनमें अधिकतर डीजल का इस्तेमाल होता है।
डीजल महंगा होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और इसका असर सामानों की कीमतों पर दिखाई देगा।
रसोई का बजट बढ़ सकता है

परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियां, फल, दाल, दूध, खाद्य तेल और किराने का सामान महंगा हो सकता है।
इससे आम परिवारों के मासिक खर्च पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा और महंगाई में तेजी आ सकती है।
खेती की लागत बढ़ेगी
किसान ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और सिंचाई पंप जैसे डीजल आधारित उपकरणों पर निर्भर रहते हैं।
डीजल महंगा होने से खेती की लागत बढ़ेगी, जिसका असर गेहूं, चावल, दाल और अन्य खाद्यान्नों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
बस, ऑटो और टैक्सी किराए बढ़ सकते हैं
ईंधन महंगा होने के बाद बसों, ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और स्कूल वाहनों के किराए में भी बढ़ोतरी की संभावना है।
कई राज्यों में परिवहन विभाग और निजी ऑपरेटर आने वाले दिनों में किराया बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं।
पड़ोसी देशों में पहले ही बढ़ चुके थे दाम
सरकार लगातार यह कहती रही थी कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया।
हालांकि पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले ही 15% से 20% तक बढ़ चुकी थीं।
भारत ने लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने के बाद अब यह फैसला लिया है।
एक्सपर्ट्स बोले- आगे और बढ़ सकते हैं दाम
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि ₹3 प्रति लीटर की यह बढ़ोतरी अभी भी पर्याप्त नहीं है।
विश्लेषकों के अनुसार तेल कंपनियों को पूरी तरह घाटे से बाहर आने और ‘ब्रेक-ईवन’ की स्थिति तक पहुंचने के लिए:
- पेट्रोल की कीमतों में करीब ₹28 प्रति लीटर,
- और डीजल की कीमतों में लगभग ₹32 प्रति लीटर तक अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल पेट्रोल की कीमतें बाजार स्तर से लगभग 29.5% और डीजल की कीमतें करीब 36.5% नीचे हैं।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में और भी बढ़ोतरी हो सकती है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने की थी ईंधन बचाने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तेलंगाना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नागरिकों से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का सीमित और सावधानीपूर्वक उपयोग करने की अपील की थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आयातित पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार किया जाना चाहिए ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके और वैश्विक संकटों का असर कम किया जा सके।
प्रधानमंत्री की इस अपील का असर कई राज्यों में दिखाई देने लगा है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हाल ही में एक शपथ ग्रहण समारोह में बाइक से पहुंचे, जबकि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी ईंधन बचत को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं।
बढ़ती ईंधन कीमतों से बढ़ सकती है महंगाई
पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में हुई यह ताजा बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डाल सकती है।
परिवहन, कृषि, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की सेवाओं की लागत बढ़ने से आने वाले महीनों में महंगाई और तेज हो सकती है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो भविष्य में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।
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