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रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती 2025: 2569 पदों पर आवेदन शुरू

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती 2025: 2569 पदों पर आवेदन शुरू

सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर सामने आया है। भारतीय रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने वर्ष 2025 के लिए 2569 रिक्त पदों पर भर्ती की आधिकारिक अधिसूचना (CEN 05/2025) जारी कर दी है। यह भर्ती विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के लिए है जो इंजीनियरिंग या संबंधित तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े हैं और देश की सबसे बड़ी परिवहन प्रणाली, भारतीय रेलवे, में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती 2025: 2569 पदों पर आवेदन शुरू महत्वपूर्ण पदों का विवरण

इस भर्ती अभियान के तहत, रेलवे ने कई तकनीकी और महत्वपूर्ण पदों को भरने की घोषणा की है। ये पद रेलवे के परिचालन और रखरखाव में अहम भूमिका निभाते हैं।

पद का नामसंक्षिप्त नामभूमिका का महत्व
जूनियर इंजीनियरJEरेलवे के विभिन्न विभागों में तकनीकी कार्यों का पर्यवेक्षण और निष्पादन।
डिपो मटीरियल सुपरिंटेंडेंटDMSडिपो में सामग्री (Material) के प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला को सुनिश्चित करना।
केमिकल एंड मेटलर्जिकल असिस्टेंटCMAरासायनिक और धातुकर्म संबंधी परीक्षणों और गुणवत्ता नियंत्रण में सहायता करना।

आवेदन की समय-सीमा और प्रक्रिया

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती 2025: 2569 पदों पर आवेदन शुरू, इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना आवेदन सुनिश्चित करें। आवेदन की प्रक्रिया 31 अक्टूबर, 2025 से शुरू हो चुकी है।

इवेंटतिथि
ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ31 अक्टूबर 2025
आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि30 नवंबर 2025 (रात 11:59 बजे तक)
शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि2 दिसंबर 2025
आवेदन में संशोधन (Correction) विंडो3 दिसंबर से 12 दिसंबर 2025 तक

उम्मीदवारों को आवेदन करने और भर्ती से जुड़े नवीनतम अपडेट्स जानने के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर नियमित रूप से जांच करते रहना चाहिए।

पात्रता मानदंड: आयु सीमा और वेतनमान

आयु सीमा: सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 33 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों के लिए सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट का प्रावधान लागू होगा।

वेतनमान और भत्ते: जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर चयनित उम्मीदवारों को लेवल 6 के तहत वेतन दिया जाएगा। इसका प्रारंभिक मूल वेतन 35,400 रुपये होगा, जिसके अतिरिक्त उन्हें अन्य सरकारी भत्ते भी प्रदान किए जाएंगे।

चयन प्रक्रिया: चार चरणों में मूल्यांकन

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती 2025: 2569 पदों पर आवेदन शुरू, रेलवे में इन तकनीकी पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवारों के ज्ञान और कौशल का मूल्यांकन एक चार-चरणीय चयन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

चरणपरीक्षा का नामउद्देश्य
प्रथम चरणकंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT-1)यह एक स्क्रीनिंग परीक्षा है, जिसका उद्देश्य योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करना है।
द्वितीय चरणकंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT-2)यह मुख्य परीक्षा है, जिसके अंकों के आधार पर अंतिम मेरिट सूची तैयार की जाएगी।
तृतीय चरणदस्तावेज़ सत्यापन (DV)सफल उम्मीदवारों के सभी शैक्षणिक और व्यक्तिगत दस्तावेज़ों की गहन जांच की जाएगी।
चतुर्थ चरणचिकित्सा परीक्षण (ME)उम्मीदवारों की शारीरिक फिटनेस और स्वास्थ्य मानकों का मूल्यांकन किया जाएगा।

आवेदन शुल्क और वापसी का प्रावधान

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती 2025: 2569 पदों पर आवेदन शुरूआवेदन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उम्मीदवारों को निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा। रेलवे भर्ती बोर्ड ने शुल्क वापसी (Refund) का एक विशेष प्रावधान भी रखा है, जो CBT-1 में उम्मीदवार की उपस्थिति पर निर्भर करता है।

वर्गआवेदन शुल्कशुल्क वापसी (CBT-1 में उपस्थित होने पर)
सामान्य/OBC/EWS₹500/-₹400/- वापस किए जाएंगे।
SC/ST/महिला/PwBD/अल्पसंख्यक/EBC₹250/-पूरी राशि (₹250/-) वापस की जाएगी।

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती 2025: 2569 पदों
के लिए
शैक्षणिक योग्यता

रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा जारी 2569 रिक्तियों के लिए, प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यताएं निर्धारित की गई हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन (CEN 05/2025) का अध्ययन करें। यह भर्ती मुख्य रूप से तकनीकी पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों पर केंद्रित है।

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The imapct of La nina on the Coldest winter 2025: इस बार पड़ेगी बर्फीली ठंडी — ला नीना ने दी दस्तक, जानें इस सर्दी में भारत में मौसम का हाल क्या होगा?

इस बार पड़ेगी बर्फीली ठंडी — ला नीना ने दी दस्तक, जानें इस सर्दी में भारत में मौसम का हाल क्या होगा? इस साल भारत में सर्दियों की ठिठुरन-जड़ी दस्तक कुछ पहले-से महसूस की जा सकती है। खासकर जब मौसम वैज्ञानिकों और एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि La Niña परिस्थिति फिर सक्रिय हो सकती है और इसके चलते पूरे देश में—विशेषकर उत्तरी मैदानों में—सामान्य से ठंडी और लंबी सर्दी देखने को मिल सकती है।

La Niña क्या है?

La Niña उस प्राकृतिक जलवायु चक्र का हिस्सा है जिसे El Niño–Southern Oscillation (ENSO) कहते हैं। आम तौर पर जब प्रशांत महासागर के मध्य-पूर्वी हिस्से में समुद्र-तल का तापमान सामान्य से नीचे चला जाता है, तो La Niña उत्पन्न होती है।

इस बार पड़ेगी बर्फीली ठंडी — ला नीना ने दी दस्तक, जानें इस सर्दी में भारत में मौसम का हाल क्या होगा? भारत में इसके प्रभाव अच्छे-खासे होते रहे हैं:

  • यह आमतौर पर मानसून को बेहतर बनाती है।
  • लेकिन शीतकाल में उत्तरी भारत में भारी ठंडी, अधिक हिमपात और ठंडे हवाओं के अवसर बढ़ सकते हैं।

इस सर्दी में भारत-वर्ष की क्या तस्वीर बन रही है?

हालिया मौसम-अनुमानों तथा विशेषज्ञों की राय से कुछ प्रमुख बिंदु सामने आए हैं:

  • भारत में La Niña के सक्रिय होने की संभावना काफी बढ़ चुकी है। उदाहरण के लिए, अमेरिका के मौसम पूर्वानुमान केंद्र ने कहा है कि अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान La Niña बनने की संभावना लगभग 71 % है।
  • उत्तरी भारत- विशेष रूप से Delhi, गुड़गाँव, नोएडा, फरीदाबाद, गाज़ियाबाद जैसे क्षेत्र- इसके प्रभाव में आ सकते हैं। वहाँ इस सर्दी में अब तक की तुलना में काफी नीचे तापमान, अधिक कोल्ड वेव्स तथा हिमपात की संभावना जताई जा रही है।
  • La Niña के दौरान, जबकि मानसून बेहतर रहा हो सकता है, सर्दी में उत्तरी हवाओं का प्रवेश आसान हो जाता है, जिससे न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट हो सकती है।
  • इसके साथ-साथ, अधिक घने कोहरे, हिमालयी क्षेत्रों में अधिक हिमपात और मैदानों में भी ठंड की लहरें बढ़ने की संभावना है।

क्यों होगी इस बार सर्दी असाधारण ठंडी?

La Niña के समय वायुमंडलीय परिसंचरण (जैसे जेट स्ट्रीम) भारत-उत्तरी अक्षांशों में ठंडी हवाओं को धकेलने का काम करते हैं।

पश्चिमी विक्षोभों (Western Disturbance) की सक्रियता ठंड के लिए एक अतिरिक्त कारक हो सकती है, खासकर उत्तर-पश्चिम व उत्तरी भारत में।

चूंकि पिछले कुछ सर्दियों में तापमान सामान्य से ऊपर रहा था, इसलिए इस बार ‘ठंड का अलग अनुभव’ होने की संभावना ज्यादा है।

किस तरह के क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं?

उत्तरी मैदान: न्यूनतम तापमान में गिरावट, कोल्ड वेव्स, कोहरे में वृद्धि।

हिमालयी क्षेत्र: हिमपात में वृद्धि, सड़क-यातायात में बाधा, बर्फबारी के चलते ग्रामीण एवं पर्वतीय इलाकों में परेशानी।

मध्य व दक्षिण भारत: सर्दी सामान्य से थोड़ी ठंडी रहने की संभावना है, लेकिन असर उतना तीव्र नहीं होगा जितना उत्तर में।

संभावित चुनौतियाँ और तैयारी कौन-कौन कर सकते हैं?

स्वास्थ्य संबंधी जोखिम: ठंड के बढ़ने से बुजुर्ग, श्वसन रोगी, बच्चों पर असर बढ़ सकता है। विशेष रूप से उत्तरी शहरों में वायु प्रदूषण कोहरे के चलते और बढ़ सकता है।

कृषि क्षेत्र: रबी फसलों (जैसे गेहूं, सरसों) पर कोल्ड वेव्स का असर पड़ सकता है—यदि बहुत ठंड लंबे समय तक स्थिर रही।

यातायात-संचालन: हिमालयी-मार्गों में हिमपात तथा मैदानों में कोहरे से रूट बंद-यातायात में देरी हो सकती है।

ऊर्जा-उपयोग: हीटर, गर्म करने वाले उपकरणों की मांग बढ़ सकती है। तैयारियों में बढ़ोतरी करनी होगी।

सामुदायिक सतर्कता: समाज के कमजोर वर्ग (बुजुर्ग, बच्चें, भूखे-प्यासे) खास ध्यान के पात्र होंगे।

सुझाव: इस सर्दी के लिए तैयार कैसे रहें?

अधिक ठंडी आने की संभावना को ध्यान में रखते हुए गर्म-कपड़े, घरेलू हीटिंग साधन, गैर-बजायमेंटेड हीटर/कंबल आदि तैयार रखें।

घर-परिवार में बुजुर्ग व बच्चों की देखभाल करें—ठंड से बचने के लिए सही घर-तापमान सुनिश्चित करें।

विशेषकर उत्तरी हिस्सों में कोहरे व वायु-प्रदूषण के लिए सतर्क रहें; सुबह-सुबह निकलने में सावधानी बरतें।

खेती-बाड़ी वाले इलाकों में किसान साथी फसल सुरक्षा-तैयारियाँ заранее देखें, खासकर यदि ठंडी-हवाओं और हिमपात का खतरा हो।

सरकारी और स्थानीय संगठनों द्वारा जारी “कोल्ड वेव एलर्ट” आदि की ताज़ा सूचनाओं को देखें और निर्देशित करें।

इस बार पड़ेगी बर्फीली ठंडी — ला नीना ने दी दस्तक, जानें इस सर्दी में भारत में मौसम का हाल निष्कर्ष

इस सर्दी में भारत के लिए एक अलग-सा अनुभव सामने आ सकता है — जहाँ एक ओर La Niña जैसी जलवायु परिस्थिति ठंड के तेवर बढ़ा सकती है, वहीं दूसरी ओर यह हमें याद दिलाती है कि तैयारियों में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।

विशेष रूप से उत्तरी भारत-उत्तरी मैदानों में रहने वाले लोग इस बार ठंड की “गहरी चुभन” का अनुभव कर सकते हैं — इसलिए बेहतर होगा कि हम पूर्व तैयारी करें, ताकि इस सर्दी का सामना सुरक्षित, स्वस्थ व आरामदायक तरीके से कर सकें।

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Goddess Lakshmi to always reside in your home: घर में सदा चाहते हैं लक्ष्मी जी का वास, तो अपनाएं ये वास्तु टिप्स

घर में सदा चाहते हैं लक्ष्मी जी का वास, तो अपनाएं ये वास्तु टिप्स

हर इंसान चाहता है कि उसके घर में मां लक्ष्मी का वास सदा बना रहे। सुख-समृद्धि, धन, और शांति से भरा हुआ घर न केवल जीवन को आसान बनाता है बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार करता है। भारतीय संस्कृति में वास्तुशास्त्र को बहुत महत्व दिया गया है, क्योंकि यह सिर्फ इमारत बनाने का विज्ञान नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और समृद्ध बनाने की कला भी है। अगर आप भी अपने घर में स्थायी रूप से लक्ष्मी जी का वास चाहते हैं, तो नीचे दिए गए वास्तु टिप्स को जरूर अपनाएं।

1. मुख्य द्वार का वास्तु — लक्ष्मी प्रवेश का मार्ग

घर में सदा चाहते हैं लक्ष्मी जी का वास, तो अपनाएं ये वास्तु टिप्स : घर का मुख्य द्वार वास्तुशास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे “लक्ष्मी द्वार” भी कहा गया है। इसलिए इसका साफ-सुथरा और सुंदर होना बहुत जरूरी है।

  • मुख्य दरवाजे पर तोरण, स्वस्तिक या ‘शुभ-लाभ’ के चिन्ह लगाएं।
  • दरवाजा खुलने में कोई आवाज़ न आए, क्योंकि दरवाजे की चरमराहट नकारात्मक ऊर्जा का संकेत होती है।
  • दरवाजे के सामने कूड़ा, जूते या गंदगी कभी न रखें।
  • दरवाजे पर पीले या लाल रंग का प्रयोग करें, यह सकारात्मकता को बढ़ाता है।
  • जब मुख्य द्वार सुंदर, साफ और सुगंधित होता है, तो मां लक्ष्मी का आगमन स्वयं होता है।

2. घर में रोशनी और वायु का संतुलन

वास्तु के अनुसार, जहां रोशनी और ताजी हवा का संचार ठीक से होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा स्वतः बढ़ती है।

  • हर सुबह खिड़कियां और दरवाजे खोलें ताकि सूर्य की किरणें घर में प्रवेश करें।
  • सूरज की पहली किरण को घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में लाने की कोशिश करें।
  • शाम के समय घर के हर कोने में दीपक जलाएं, खासकर तुलसी या पूजन स्थल के पास।
  • दिनभर में अगरबत्ती या कपूर जलाकर घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करें।

3. पूजा स्थल का वास्तु

पूजा घर घर की आत्मा होता है। यही वह स्थान है जहां से घर में दिव्यता और शांति का प्रसार होता है।

  • पूजा घर हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में बनाएं।
  • भगवान की मूर्तियां दीवार से कम से कम 1 इंच की दूरी पर रखें।
  • एक ही भगवान की कई मूर्तियां रखने से बचें।
  • पूजा के स्थान पर कभी गंदगी, टूटे-फूटे फोटो या बासी फूल न रखें।
  • रोजाना दीपक जलाएं और घंटे की आवाज से सकारात्मक ऊर्जा फैलाएं।
  • मां लक्ष्मी वहीं आती हैं, जहां भक्ति और स्वच्छता दोनों का संगम होता है।

4. रसोईघर का वास्तु

रसोईघर को अन्नपूर्णा का स्थान माना गया है। यहां का वास्तु सही न हो तो घर में आर्थिक असंतुलन आ सकता है।

  • रसोईघर दक्षिण-पूर्व दिशा में होना शुभ माना गया है।
  • गैस चूल्हा पूर्व दिशा की ओर रखें ताकि खाना बनाते समय मुख पूर्व की ओर रहे।
  • रसोई में अनाज और मसाले को हमेशा बंद डिब्बों में रखें।
  • रसोई में गंदगी, जूठन या बर्तन रातभर न छोड़ें।
  • फ्रिज और पानी का स्थान उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखें।
  • स्वच्छ और सुव्यवस्थित रसोई धनवृद्धि और समृद्धि का प्रतीक है।

5. धन स्थान या तिजोरी का वास्तु

जहां आप पैसा रखते हैं, वहां का वास्तु भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

  • तिजोरी या कैश बॉक्स हमेशा दक्षिण दिशा की दीवार से सटा हुआ हो और मुंह उत्तर दिशा की ओर हो।
  • तिजोरी के ऊपर गणेश-लक्ष्मी जी की तस्वीर लगाएं।
  • शुक्रवार या पूर्णिमा के दिन तिजोरी में इत्र या चांदी का सिक्का रखें।
  • तिजोरी के पास झाड़ू, जूते या बेकार वस्तुएं न रखें।
  • यह छोटा-सा ध्यान मां लक्ष्मी के स्थायी वास को सुनिश्चित करता है।

6. घर की स्वच्छता और ऊर्जा संतुलन

मां लक्ष्मी स्वच्छ, सुंदर और सुगंधित घर में रहना पसंद करती हैं।

  • हर सुबह घर में झाड़ू लगाने के बाद गंगाजल या कपूर से शुद्धिकरण करें।
  • घर के टूटी हुई वस्तुएं, पुराने जूते, बेकार इलेक्ट्रॉनिक्स तुरंत हटा दें।
  • दरवाजों और खिड़कियों पर पीले या हल्के गुलाबी पर्दे लगाएं।
  • घर में तुलसी का पौधा लगाएं और हर शाम दीपक जलाएं।
  • उत्तर दिशा में छोटे जल स्रोत या फाउंटेन रखना भी शुभ माना जाता है।

7. शयनकक्ष का वास्तु

आरामदायक नींद और प्रेमपूर्ण संबंध भी धन और समृद्धि को प्रभावित करते हैं।

  • बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना शुभ होता है।
  • पलंग पर गद्दा जोड़ा हुआ हो, अलग-अलग गद्दे न रखें।
  • बेड के सामने दर्पण न लगाएं; इससे रिश्तों में तनाव आता है।
  • कमरे में हल्के गुलाबी या क्रीम रंग का प्रयोग करें।
  • दांपत्य सुख बढ़ाने के लिए ताजे फूल या खुशबूदार मोमबत्ती रखें।

8. सकारात्मक सोच और आस्था

वास्तुशास्त्र के साथ-साथ सबसे ज़रूरी है आपकी सोच। अगर घर में प्रेम, आस्था और सकारात्मकता का माहौल रहेगा, तो नकारात्मक शक्तियां पास नहीं आएंगी।

  • हर दिन मां लक्ष्मी की आरती करें।
  • अपने काम के प्रति ईमानदार रहें और दूसरों की मदद करें।
  • शुक्रवार के दिन कुमारी कन्याओं को भोजन कराएं या खीर का भोग लगाएं।
  • घर में हमेशा मधुर वाणी और मुस्कान बनाए रखें।

घर में सदा चाहते हैं लक्ष्मी जी का वास, तो अपनाएं ये वास्तु टिप्स निष्कर्ष

वास्तु केवल दिशाओं और दीवारों का नहीं, बल्कि ऊर्जा और भावनाओं का भी विज्ञान है। जब घर में स्वच्छता, सकारात्मक सोच और नियमों का पालन होता है, तो लक्ष्मी जी का वास स्थायी रूप से बना रहता है।

इन छोटे-छोटे वास्तु टिप्स को अपनाकर आप न केवल अपने घर को सुख-समृद्धि से भर सकते हैं, बल्कि अपने जीवन में भी नई ऊर्जा और खुशियों का स्वागत कर सकते हैं।

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डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए कैसा होना चाहिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर?

Table of Contents

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए कैसा होना चाहिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर?आज के समय में डायबिटीज यानी मधुमेह एक आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। यह केवल शुगर के स्तर को बढ़ाने की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर के मेटाबॉलिज़्म को प्रभावित करती है। इस बीमारी में सबसे ज़रूरी चीज़ होती है संतुलित आहार (Balanced Diet)। अगर सही समय पर सही खाना खाया जाए, तो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखा जा सकता है और इंसुलिन पर निर्भरता भी कम हो सकती है। आइए जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों का ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर कैसा होना चाहिए।

1. 🕖 सुबह का नाश्ता (Breakfast): दिन की शुरुआत में ऊर्जा और संतुलन

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए कैसा होना चाहिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर? डायबिटीज के मरीजों के लिए सुबह का नाश्ता बिल्कुल भी नहीं छोड़ना चाहिए। खाली पेट रहने से ब्लड शुगर लेवल अचानक गिर या बढ़ सकता है। इसलिए सुबह का भोजन पौष्टिक, फाइबर से भरपूर और प्रोटीन युक्त होना चाहिए।

क्या खाएं:

  • ओट्स या दलिया: इनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाती है।
  • ब्राउन ब्रेड या मल्टीग्रेन टोस्ट के साथ अंडा या पनीर: यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत है जो लंबे समय तक पेट भरा रखता है।
  • मूंग दाल चीला या बेसन का चीला: हल्का, हेल्दी और शुगर फ्रेंडली विकल्प।
  • एक कटोरी अंकुरित अनाज (Sprouts): इसमें फाइबर और प्रोटीन दोनों भरपूर होते हैं।
  • ग्रीन टी या ब्लैक कॉफी (बिना चीनी): इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर को एनर्जी देते हैं।

क्या न खाएं:

  • मीठा कॉर्नफ्लेक्स, जूस, ब्रेड-बटर या बाजार के नाश्ते (जैसे समोसा, कचौरी, परांठा आदि)।
  • चाय में चीनी, दूध और ज्यादा बिस्कुट।

टिप:

नाश्ते में कम से कम 300–400 कैलोरी होनी चाहिए और उसमें 50% कार्बोहाइड्रेट, 30% प्रोटीन और 20% हेल्दी फैट का संतुलन रखना चाहिए।

2. 🍛 दोपहर का खाना (Lunch): भरपूर लेकिन नियंत्रित

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए कैसा होना चाहिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर? लंच डायबिटीज पेशेंट के लिए दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन होता है। इसमें पोषण के साथ-साथ कैलोरी नियंत्रण भी जरूरी है ताकि ब्लड शुगर न बढ़े।

क्या खाएं:

  • 1 या 2 रोटियां (मल्टीग्रेन आटा से बनी): मैदा से बनी चीज़ों से परहेज़ करें।
  • एक कटोरी ब्राउन राइस या मिलेट (जैसे बाजरा, ज्वार, रागी): सफेद चावल की जगह।
  • हरी सब्ज़ियां: जैसे लौकी, तोरई, परवल, टिंडा, मेथी या पालक। इनमें फाइबर और मिनरल्स भरपूर होते हैं।
  • एक कटोरी दाल या राजमा-चना: प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत।
  • सलाद: खीरा, टमाटर, मूली, गाजर और हरी पत्तेदार सब्ज़ियां शामिल करें।
  • दही (बिना चीनी): प्रीबायोटिक गुण ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करते हैं।

क्या न खाएं:

  • सफेद चावल, आलू की सब्ज़ी, तली हुई चीजें, पापड़, अचार या मीठा दही।
  • कोल्ड ड्रिंक या जूस के साथ खाना।

टिप:

लंच को दोपहर 1 से 2 बजे के बीच लेना सबसे सही समय है। खाना खाने के बाद 10–15 मिनट टहलने की आदत डालें, इससे ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहता है।

3. 🌙 रात का खाना (Dinner): हल्का और जल्दी खाया हुआ

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए कैसा होना चाहिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर? डायबिटीज कंट्रोल के लिए रात का खाना बहुत हल्का और जल्दी (शाम 7 से 8 बजे के बीच) खाना चाहिए। देर रात खाना खाने से ब्लड शुगर बढ़ने और मोटापा बढ़ने का खतरा होता है।

क्या खाएं:

  • सूप या सब्ज़ियों से भरा दलिया: हल्का लेकिन पौष्टिक।
  • एक या दो रोटियां और एक कटोरी सब्ज़ी: तेल-मसाले से बचें।
  • ग्रिल्ड पनीर या टोफू: प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत।
  • मिश्रित सब्ज़ियों का सलाद या सूप: फाइबर से भरपूर और डाइजेशन में मददगार।
  • एक गिलास गुनगुना दूध (बिना चीनी): सोने से पहले लिया जा सकता है।

क्या न खाएं:

  • चावल, तली हुई चीजें, मिठाई या बेकरी प्रोडक्ट्स।
  • भारी या ज्यादा मसालेदार भोजन।

टिप:

डिनर और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतर रखें। इससे पाचन बेहतर होता है और रात में ब्लड शुगर स्थिर रहता है।

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए कैसा होना चाहिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर? कुछ जरूरी बातें जो हमेशा ध्यान रखें:

  • दिन में तीनों समय छोटे-छोटे हिस्सों में भोजन करें। एक बार में बहुत ज्यादा खाना ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है।
  • पानी खूब पिएं — कम से कम 2.5 से 3 लीटर रोजाना।
  • मीठे फलों से बचें: जैसे आम, अंगूर, केला। इसके बजाय सेब, अमरूद, पपीता या जामुन लें।
  • नियमित एक्सरसाइज करें: हर दिन 30 मिनट वॉक या योग ज़रूर करें।
  • फूड टाइमिंग का पालन करें: ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर हर दिन लगभग एक ही समय पर लें।
  • शुगर फ्री चीजों का अति सेवन न करें। इनमें कृत्रिम मिठास होती है जो लम्बे समय में नुकसान पहुंचा सकती है।

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए कैसा होना चाहिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर? निष्कर्ष

डायबिटीज को कंट्रोल करना दवा से ज्यादा डाइट और जीवनशैली (Lifestyle) पर निर्भर करता है। अगर आप हर दिन तय समय पर संतुलित भोजन लेते हैं, तो ब्लड शुगर अपने आप नियंत्रित रहेगा। सुबह का नाश्ता पौष्टिक रखें, दोपहर का खाना भरपूर और संतुलित लें, जबकि रात का खाना हल्का और जल्दी खा लें। सही खानपान, नियमित व्यायाम और तनाव नियंत्रण से आप डायबिटीज को लंबे समय तक काबू में रख सकते हैं।

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Top 5 High Salary Course: जिसे करके आप लाखो रुपये की सैलरी ले सकते हैं

Top 5 High Salary Course: जिसे करके आप लाखो रुपये की सैलरी ले सकते हैं

Top 5 Course High Salary : Job पाने के लिए डिग्री बेहद ज्यादा जरूरी होती है। बहुत से लोगों को चिंता रहती है कि अगर उनके पास नौकरी नहीं है तो उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिल पाएगी । अब चिंता छोड़ दिजिए अगर आपके पास डिग्री नहीं है तो बहुत से ऑनलाइन Course हैं जो आपको अच्छी खासी नौकरी दिला सकते हैं और इसके साथ ही आप लाखों रुपये कमा सकते हैं। आपको बता दें कि साल 2026 तक कई ऐसे ऑनलाइन सर्टिफिकेशन मौजूद होंगे जो टेक्नोलॉजी और बिजनेस के फील्ड में इंडस्ट्री द्वारा मान्यता प्राप्त होंगे और डिग्री की जगह ले सकेंगे। साथ ही इनके दम पर आप लाखों की सैलरी पा सकते हैं। चलिए जानते हैं कि कौन-कौन से हैं वे ऑनलाइन कोर्सेज ?

Top 5 Course High Salary

Top 5 High Salary Course: जिसे करके आप लाखो रुपये की सैलरी ले सकते हैं

कौन-कौन से हैं वे Online Course?

Designing Course:

वेब डिजाइनिंग के बहुत से कोर्सेज ऐसे होंगे जो आपको अच्छा खास महिने में कमाने में मदद करेगें।  वेब डिजाइनिंग के साथ-साथ आप ग्राफिक्स डिजाइनिंग के कोर्सेज भी कर सकते हैं। आपको इससे काफी ज्यादा मुनाफा होगा। कहा जाता है कि आने वाला समय डिजाइनर्स के लिए गोल्डन टाइम है। बहुत से ऐसी कंपनी है जिनमें आप फ्रीलांसेर काम करके अच्छी खासी एरनिंग कर सकती है। वेब डिजाइनिंग सीखने के बाद आप अपनी खुद की वेबसाइट या डिजाइन एजेंसी भी शुरू कर सकते हैं। इस क्षेत्र में रचनात्मकता और तकनीकी कौशल जितना बेहतर होगा, आपकी कमाई और अवसर उतने ही अधिक बढ़ेंगे।

Top 5 High Salary Course Content Writing:

Top 5 Course High Salary : आज के समय में बहुत से लोगों को लेख पढ़ना अच्छा तो लगता है लेकिन आने वाली पीढ़ी में लिखने की आदत लगातार खत्म सी होती जा रही है। अगर आपको लगता है कि आप अच्छा लिख सकते हैं तो कंटेट राइटिंग का कोर्स आपके लिए बेस्ट होगा। आप को बता दें, कि बहुत से कंटेंट राइटर ऐसे हैं जो सिर्फ अपने लिखने की कला के कारण लाखों रुपये तो कमा ही रहें हैं उसके साथ-साथ करोड़ों दिलों पर भी राज करते हैं। केंटेंट राइटिंग का कोर्स आपको पैसे कमाने का जरिया तो देगा ही देगा साथ ही लोगों के साथ खास जुड़ाव भी आपको महसूस होगा। कंटेंट राइटिंग सिर्फ एक प्रोफेशन नहीं बल्कि अपनी सोच और रचनात्मकता को शब्दों में ढालने की एक खूबसूरत कला है। अगर आप लिखने के शौकीन हैं, तो यह क्षेत्र आपको पहचान, स्वतंत्रता और एक सुनहरा करियर दोनों प्रदान कर सकता है।

Data Professional:

डेटा प्रोफेशनल कोर्स आज के डिजिटल युग में सबसे ज़्यादा डिमांड वाले कोर्सों में से एक है। इस कोर्स में डेटा एनालिसिस, मशीन लर्निंग, डेटा विज़ुअलाइज़ेशन और SQL जैसे टूल्स की ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे विद्यार्थी बिज़नेस और टेक्नोलॉजी के फैसलों में अहम भूमिका निभा सकें। कोर्स पूरा करने के बाद आप डेटा एनालिस्ट, डेटा साइंटिस्ट या बिज़नेस एनालिस्ट बन सकते हैं। भारत में डेटा प्रोफेशनल की औसत सैलरी ₹6 लाख से ₹25 लाख प्रति वर्ष तक होती है, जो अनुभव और स्किल्स के आधार पर बढ़ती जाती है। इस कोर्स की खासियत यह है कि इसे टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल दोनों बैकग्राउंड के छात्र आसानी से कर सकते हैं।
भविष्य में डेटा आधारित निर्णय लेने की मांग बढ़ने के साथ, इस क्षेत्र में करियर की संभावनाएं और भी मज़बूत होने वाली हैं।

Top 5 Course High Salary

AWS Certified Solutions Architect:

AWS प्रमाणित समाधान वास्तुकार (AWS Certified Solutions Architect) कोर्स आपको क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञ बनाता है। इस कोर्स के जरिए आप सीखते हैं कि कैसे AWS प्लेटफ़ॉर्म पर सुरक्षित, स्केलेबल और किफायती क्लाउड समाधान डिज़ाइन किए जाते हैं। यह कोर्स उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो क्लाउड आर्किटेक्चर या आईटी में करियर बनाना चाहते हैं। भारत में AWS सॉल्यूशंस आर्किटेक्ट का औसत वेतन ₹8 लाख से ₹18 लाख प्रति वर्ष तक होता है, जबकि अनुभवी पेशेवर ₹25 लाख या उससे अधिक भी कमा सकते हैं। यह कोर्स तकनीकी करियर के लिए सुनहरा अवसर है। यह सर्टिफिकेशन न केवल आपके तकनीकी कौशल को बढ़ाता है बल्कि आपको वैश्विक स्तर पर नौकरी के अधिक अवसर भी प्रदान करता है। तेजी से बढ़ती क्लाउड इंडस्ट्री में यह कोर्स आपकी प्रोफेशनल ग्रोथ को नई ऊंचाइयों तक ले जाता है।

Digital Marketing Course:

डिजिटल मार्केटिंग आज के समय की सबसे तेजी से बढ़ती हुई करियर फील्ड है। इस कोर्स में आप SEO, सोशल मीडिया मार्केटिंग, ईमेल मार्केटिंग, कंटेंट क्रिएशन, और ऑनलाइन एडवरटाइजिंग जैसी स्किल्स सीखते हैं। कोर्स पूरा करने के बाद आपको डिजिटल मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव, SEO एक्सपर्ट, सोशल मीडिया मैनेजर जैसे पदों पर नौकरी मिल सकती है। शुरुआती वेतन ₹20,000 से ₹40,000 प्रति माह तक होता है, जबकि अनुभव बढ़ने पर ₹1 लाख प्रति माह या उससे अधिक भी कमाया जा सकता है। यह कोर्स हर उस व्यक्ति के लिए उपयोगी है जो ऑनलाइन करियर बनाना चाहता है। इस क्षेत्र में फ्रीलांसिंग और वर्क फ्रॉम होम के अवसर भी बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल्स की मांग और अधिक बढ़ने की संभावना है, जिससे यह करियर विकल्प और भी सुनहरा बन जाता है।

Top 5 High Salary Course: जिसे करके आप लाखो रुपये की सैलरी ले सकते हैं

ऐसे बहुत से ऑनलाइन कोर्सेज हैं जिन्हें आप जॉब के साथ-साथ कर सकते हैं। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि अगर वें जॉब करने लग जाएं तो वें आगे की स्टड़ी साथ-साथ नहीं कर पाएंगे। इस लेख में बहुत से खास कोर्सेज आपको मिलेंगे जिन्हें करने से ना केवल आपको फायदा होगा बल्कि आने वाले समय में इन कोर्सेज की भारी डिमांड होने वाली है। डिजिटल युग में ये खास कोर्सेज आपके लिए मददगार साबित होंगे।

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Aadhaar card update new rules in 2025

Aadhaar card update new rules – UIDAI ने आधार नियमों में किया बदलाव

Aadhaar card update new rules: Unique Identification Authority of India (UIDAI) द्वारा चलाए जा रहे Aadhaar कार्यक्रम में हाल-फिलहाल महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य आधार प्रणाली को और अधिक भरोसेमंद, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है। इस लेख में हम जानेंगे कि इन नए नियमों में क्या-क्या बदलाव आए हैं और उनका आम नागरिक पर क्या असर होगा।

Aadhaar card update new rules

1. क्या हैं नए बदलाव?

नीचे नए नियमों के मुख्य बिंदु दिए गए हैं:

(1) आधार अपडेट शुल्क में बदलाव

Aadhaar card update new rules : UIDAI ने आधार अपडेट शुल्क में संशोधन किया है, जो 1 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी होगा। नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर या ईमेल पता अपडेट करने पर अब ₹75 लगेंगे, जो पहले ₹50 थे। बायोमेट्रिक अपडेट, जैसे फिंगरप्रिंट, आईरिस या फोटो, अब ₹125 लगेंगे, जो पहले ₹100 थे।

(2) बच्चों का आधार अपडेट एक बार मुफ़्त

बच्चों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट एक बार मुफ़्त होंगे। इसमें 5-7 और 15-17 साल के बच्चों के लिए अपडेट शामिल हैं। 7-15 साल के बच्चों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट 30 सितंबर, 2026 तक मुफ़्त रहेंगे। दस्तावेज़ अपडेट के लिए अब केंद्र पर ₹75 का शुल्क लगेगा, लेकिन ऑनलाइन 14 जून, 2026 तक यह मुफ़्त रहेगा। इसके अलावा, आधार कार्ड रीप्रिंट का शुल्क ₹40 तय किया गया है। UIDAI ने आधार नियमों में किया बदलाव

(3) पैन-आधार लिंकिंग अब अनिवार्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने अपने पैन को आधार से लिंक नहीं किया है, उनका पैन अब सक्रिय नहीं रहेगा। ऐसे व्यक्ति म्यूचुअल फंड, डीमैट खाते या टैक्स-सेविंग योजनाओं में निवेश नहीं कर पाएँगे। हाल के दिनों में, कई निवेशकों के लेन-देन इसलिए रुके हैं क्योंकि उनका पैन और आधार लिंक नहीं है। इसलिए, समय रहते अपने पैन और आधार को लिंक करना बेहद ज़रूरी है।

(4) आधार ई-केवाईसी अब आसान

UIDAI और NPCI ने आधार ई-केवाईसी सेतु और ऑफलाइन केवाईसी सुविधाएँ शुरू की हैं। बैंक और एनबीएफसी अब ग्राहकों की पहचान उनके पूरे आधार नंबर देखे बिना ही कर सकेंगे। इससे डेटा सुरक्षा और गोपनीयता बढ़ेगी, साथ ही खाता खोलने की प्रक्रिया में भी तेज़ी आएगी।

(5) आधार सत्यापन के लिए नए नियम

UIDAI ने नए नियम जारी किए हैं, जिसके तहत वित्तीय संस्थान केवल सक्रिय और विशिष्ट आधार संख्या पर ही KYC कर पाएँगे। अगर किसी व्यक्ति का आधार डुप्लिकेट या निष्क्रिय पाया जाता है, तो बैंक खाता खोलने या निवेश करने पर रोक लग सकती है। इसलिए, उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर UIDAI की वेबसाइट या एमआधार ऐप पर जाकर अपने आधार की स्थिति की जाँच करते रहें।

2. अब आपके लिए क्या मतलब है?

आधार कार्ड नियम- UIDAI ने आधार नियमों में किया यह बदलाव आम नागरिकों, विशेष-कर जिनके पास आधार है या जिन्हें नए नामांकन-अपडेट की आवश्यकता है, के लिए कई मायने रखते हैं:

आसान और तेज प्रक्रिया

– अब आप ऑनलाइन (मोबाइल/वेब) माध्यम से नाम, पता, जन्म तिथि और मोबाइल नंबर बदल सकते हैं — पहले हर बदलाव हेतु केंद्र जाना पड़ता था।

– UIDAI ने आधार नियमों में किया बदलाव केंद्र-जाना कम होगा, समय-बचत होगी।

अधिक सुरक्षा और भरोसेमंद पहचान

– दस्तावेजों की सूची स्पष्ट होने से फर्जी नामांकन-अपडेट की संभावना कम होगी।

– एक व्यक्ति के द्वितीय या तृतीय आधार नंबर बनना अब और कठिन होगा।

– ऑटोमेटिक डेटाबेस लिंकिंग के माध्यम से त्रुटियाँ और धोखाधड़ी कम हो सकती हैं।

तय-शुदा सीमाएँ — तैयार रहें

– यदि आपने पहले से जन्म-तिथि या लिंग में बदलाव किया है, तो अब उस विकल्प का पुनः उपयोग नहीं कर सकेंगे। इसलिए, पहले बदलाव में सावधानी बरतें। आधार कार्ड नियम- UIDAI ने आधार नियमों में किया बदलाव

– नाम में बदलाव की संख्या सीमित है — बार-बार नाम बदलना संभव नहीं रहेगा।

– ऑनलाइन अपडेट के लिए मोबाइल नंबर लिंक होना आवश्यक है।

बच्चों और नए नामांकन के संबंध में

– 5 वर्ष से कम के बच्चों के लिए नए नियम बनाए गए हैं — उदाहरण के लिए यदि बच्चा बाल-आधार (Baal Aadhaar) के अंतर्गत आता है, तो नए दस्तावेज चाहिए होंगे।

– नामांकन के समय दस्तावेजों की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है।

लागत-प्रभाव

– ऐसे अपडेट्स जो अब ऑनलाइन संभव हैं, उनमें अतिरिक्त खर्च कम हो सकता है (यानी केंद्र-जाना नहीं होने से समय व पैसे बचेंगे)।

– हालांकि, कुछ विशेष केंद्र-आधारित अपडेट्स में शुल्क हो सकते हैं — इसलिए अपडेट करते समय शुल्कों की जानकारी अवश्य लें।

3. आपको क्या करना चाहिए?

Aadhaar card update new rules – UIDAI ने आधार नियमों में किया बदलावों के मद्देनज़र आप निम्न कार्य अवश्य कर लें:

  • सुनिश्चित करें कि आपके मोबाइल नंबर एवं ई-मेल आपने अपने आधार में लिंक कर रखे हैं — क्योंकि ऑनलाइन अपडेट हेतु यह बेहद आवश्यक है।
  • यदि आपने कभी जन्म-तिथि, नाम या लिंग में बदलाव किया है तो आगे की संभावनाओं को समझ लें।
  • यदि पता बदल गया है, तो जल्द से जल्द ऑनलाइन माध्यम से अपडेट कर लें — भविष्य में पता बदलने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी।
  • बच्चों (खासतौर पर 5 वर्ष से कम उम्र) का नामांकन-अपडेट कराने पर नए दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है — इस पर पहले से तैयारी करें।
  • ऑनलाइन अपडेट करते समय दस्तावेज स्कैन/अपलोड करते समय गुणवत्ता और सत्यता का ध्यान रखें — क्योंकि नए नियमों में दस्तावेजों की पुष्टि सख्त हुई है।
  • यदि आपको अब तक मोबाइल नंबर लिंक नहीं है, तो इसे जल्दी से जोड़ लें — क्योंकि भविष्य में ऑनलाइन प्रक्रिया आसान होगी और केंद्र-जाने की जरूरत कम होगी।

निष्कर्ष

UIDAI द्वारा किए गए ये बदलाव पहचान-प्रणाली को अधिक भरोसेमंद, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। आधार कार्ड धारकों के लिए यह खबर शुभ है क्योंकि अब अपडेट प्रक्रिया आसान होने वाली है और सुरक्षा-मानक भी सख्त हुए हैं। हालांकि, इन्हें ध्यान में रखते हुए नागरिकों को अपनी जानकारी को अपडेट रखना महत्वपूर्ण होगा।

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फेविकोल का जोड़ है टूटेगा नहीं’ कहने वाले पीयूष पांडे का जीवन का जोड़ आखिर टूट गया

फेविकोल का जोड़ है टूटेगा नहीं’ कहने वाले पीयूष पांडे का जीवन का जोड़ आखिर टूट गया

अबकी बार मोदी सरकार’ ये नारा आपने जरूर सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि ये नारा किसने दिया था। ये लाइनें लिखी है एड गुरु पद्मश्री पीयूष पांडे ने जो अब इस दुनिया को अलविदा कह गए। पीयूष पांडे के निधन से देश में शोक की लहर है। हर किसी की जुबां पर उनके काम हैं। उनकी क्रिएटीविटी उनके काम में बखूबी दिखती थी। जो कोई भी उनके लिखे नारे को पढ़ता था एक ना एक बार जरूर सोचता था कि आखिर कोई कैसे इतना अच्छा लिख सकता है, कैसे कोई इतने अच्छे से सोच सकता है कि मुझे ये लिखना है। कैसे इतने अच्छे से शब्दों का चयन करके उन्हें लाइन में पिरोकर पूरा मैसेज दे सकता है।

विज्ञापन की दुनिया में अगर किसी ने आम बोलचाल की भाषा को ब्रांड की पहचान बना दिया, तो वो थे पीयूष पांडेय। उनकी कलम से निकले स्लोगन सिर्फ प्रोडक्ट नहीं बेचते थे, बल्कि लोगों के दिलों में उतर जाते थे। शुक्रवार सुबह 70 की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

कौन-कौन सी टैगलाइन है जो काफी मशहूर भी है?

फेविकोल का जोड़ है टूटेगा नहीं’ कहने वाले पीयूष पांडे का जीवन का जोड़ आखिर टूट गया बहुत से मशहूर विज्ञापनों की टैगलाइन इन्होंने लिखी थी। जो काफी ज्यादा लोकप्रिय हुई। बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक की जुबां पर उनके लिखे स्लोगन हमेशा रहें। पीयूष पांडे ने कई लोकप्रिय विज्ञापनों का स्‍लोगन लिखा था। ‘अबकी बार मोदी सरकार’ नारा भी उन्‍होंने ही लिखा था, जो आगे चलकर बेहद पॉपुलर हुआ था. इसके अलावा ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ गाना भी उन्‍होंने लिखा था। पीयूष पांडे ने फेविकॉल मशहूर स्‍लोगन भी लिखा था – ये फेविकॉल का जोड़ है, टूटेगा नहीं. हालांकि, पीयूष पांडे के सांसों की डोर टूट गई।

रिपोर्ट की मानें तो वे गंभीर संक्रमण से जूझ रहे थे. उनका अंतिम संस्‍कार उनकी कर्मभूमि मुंबई में ही किया जाएगा।

नहीं रहे शब्दों के जादूगर:

एशियन पेंट्स का मशहूर स्लोगन “हर खुशी में रंग लाएं” हो या कैडबरी का “कुछ खास है”, ये लाइनें सिर्फ विज्ञापन नहीं थीं, ये भावनाएं थीं, जो पीयूष पांडेय की सोच से निकलीं। उन्होंने फेविकोल, हच जैसी कंपनियों के लिए भी ऐसे कैंपेन बनाए जो आज भी याद किए जाते हैं।

पीयूष पांडे का जन्म 1955 में जयपुर में हुआ था. पीयूष पांडे के भाई प्रसून पांडे जाने माने डायरेक्टर और बहन इला अरुण सिंगर और एक्ट्रेस हैं. पीयूष पांडे के पिता एक बैंक में नौकरी करते थे. पीयूष पांडे ने विज्ञापन की कलात्‍मक दुनिया में कदम रखने से पहले कई साल तक क्रिकेट भी खेला था. राजस्थान में पैदा हुए पीयूष सात बहनें और दो भाई थे. उनका स्कूल एजुकेशन जयपुर से हुआ था. इसके बाद उन्‍होंने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से इतिहास में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया. पीयूष पांडे ने राजस्थान राज्य-टीम के लिए रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया था. इसके बाद उन्‍होंने काफी उम्र में ही विज्ञापन जगत में कदम रख दिया था।

पीयूष पांडे 27 साल की उम्र में विज्ञापन जगत से जुड़ गए थे. उन्होंने शुरुआत अपने भाई प्रसून पांडे के साथ की थी. दोनों ने रोजमर्रा के उत्पादों के लिए रेडियो जिंगल्स की आवाज दी थी. साल 1982 में विज्ञापन कंपनी ओगिल्वी से की. 1994 में उन्हें ओगिल्वी के बोर्ड में नॉमिनेट किया गया. पीयूष पांडे को उनके काम के लिए साल 2016 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया था।

PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि:

फेविकोल का जोड़ है टूटेगा नहीं’ कहने वाले पीयूष पांडे को पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम ने X पर लिखा, ‘पीयूष पांडे क्रिएटिविटी के लिए जाने जाते थे। एडवर्टाइजिंग की दुनिया में उन्होंने शानदार योगदान दिया। मैं उनके साथ हुई बातचीत को सालों तक संजोकर रखूंगा। उनके दुनिया से जाने से बहुत दुखी हूं। उनके परिजन के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।’

फेविकोल का जोड़ है टूटेगा नहीं’ कहने वाले पीयूष पांडे का जीवन का जोड़ आखिर टूट गया

पीयूष पांडे के सहयोगी उन्हें एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने सादगी, मानवता और क्रिएटिविटी में संतुलन बनाए रखा। उनका आदर्श था- “सिर्फ मार्केट को नहीं, दिल से बोलो।” उनके योगदान ने भारतीय विज्ञापन जगत को नई पहचान दी और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का सोर्स बना। आज पीयूष पांडे नहीं रहे, लेकिन उनके बनाए विज्ञापन, स्लोगन और जिंगल्स भारतीय संस्कृति का हिस्सा बनकर हमेशा जीवित रहेंगे। उन्होंने यह दिखाया कि अगर कहानी में दिल और भावना हो, तो वह किसी भी ब्रांड को घर-घर में पहुंचा सकती है। भारत की विज्ञापन दुनिया का यह जादूगर हमेशा याद रखा जाएगा।

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what is Gold Rate Today

what is Gold Rate Today

what is Gold Rate Today : दिवाली से पहले रॉकेट की रफ्तार पर सोना-चांदी सवार था। त्यौहार का समय था ऐसे में बहुत से लोग सोना-चांदी की खरीदारी करते हैं, लेकिन सोना-चांदी के दाम आसमान को नहीं बल्कि अंतरिक्ष को छू रहे थे। अब वही सोना-चादीं औंधे मुंह गिरा है। अगर आप भी खरीदारी करना चाहते हैं तो उससे पहले जरुर जान लें क्या है आज के सोना-चांदी के दाम?

क्या है सोना-चांदी के दाम ?

दिवाली के आस-पास सोने-चांदी के दाम रिकॉर्ड तोड़ रहा था, लेकिन अब दाम में गिरावट भी आई है उसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली है। 23 अक्टूबर यानी की आज के दिन चांदी  1 हजार 301 रुपये सस्ती हुई है। वहीं सोने के दामों में भी गिरावट देखने को मिली है। भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 1 लाख 23 हजार रुपये प्रति ग्राम है, जबकि चांदी का भाव 1301 प्रति 1 किलो रुपये गिरा है। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक कल यानी कि 22 अक्टूबर की शाम को 916 शुद्धता 22 कैरेट गोल्ड का दाम 113499 रुपये प्रति ग्राम था।

आज यानी की 23 अक्टूबर को 22 कैरेट सोने के दाम 1,13,800 और 24 कैरेट का भाव 1,23,030 इसके साथ ही चांदी के रेट में भी गिरावट दर्ज की गई है।

what is Gold Rate Today

सोने-चांदी के दाम सीधे अंतरिक्ष से धरती पर आने का क्या है कारण?

भारत में सीजनल बाइंग का खत्म होना : दीवाली जैसे त्योहार पर भारत देश में सोने-चांदी की खरीदारी काफी ज्यादा होती है। कुछ लोग अपने रिश्तेदार को गिफ्ट के तौर पर देते हैं। कई लोग इंवेस्टमेंट के तौर पर खरीदते हैं तो वहीं पर कुछ लोग शगुन के तौर पर भी सोना-चांदी खरीदते हैं। त्यौहारों के बाद ये सिलसिला थम सा गया है। कहीं ना कहीं ये भी एक कारण माना जाता है।

अमेरिका-चीन ट्रेड टेंशन में ढील: सोना-चांदी को सेफ हेवन माना जाता है, यानी कि खरीदा हुआ सोना मुश्किल वक्त में मनुष्य का साथ देता है। लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के शी जिनपिंग के बीच अगले हफ्ते मीटिंग होने वाली है। इससे ट्रेड वॉर की चिंता कम हुई है।

प्रॉफिट-टेकिंग और ओवरबॉट सिग्नलः रैली के बाद निवेशक प्रॉफिट बुक कर रहे हैं। टेक्निकल इंडिकेटर्स जैसे रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) दिखा रहे थे कि कीमतें ओवरबॉट जोन में पहुंच चुकी थीं। इसलिए ट्रेंड फॉलोअर्स और डीलर्स ने बिकवाली शुरू कर दी है।

what is Gold Rate Today : इस साल सोना ₹47,745 और चांदी ₹66,484 महंगी हुई

इस साल अब तक सोने की कीमत 47,745 रुपए बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो अब 1,23,907 रुपए हो गया है।

चांदी का भाव भी इस दौरान 66,484 रुपए बढ़ गया है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो अब 1,52,501 रुपए प्रति किलो हो गई है।

सोना खरीदते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान :

सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें : हमेशा ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक में हो सकता है, जैसे- AZ4523 । हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।

कीमत क्रॉस चेक जरूर करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज जैसे इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट से क्रॉस चेक जरूर कर लें। इसके साथ ही सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है, वो भी चेक करके ही सोना खरीदने के लिए जाएं।

कितने कैरेट में कितना सोना होता है शुद्ध ?

अक्सर आपने सुना होगा सोना अलग-अलग कैरेट का होता है, जैसा कि हमने आपको लेख के माध्यम से भी बताया कि कैरेट के साथ ही सोने की कीमत पर भी असर पड़ता है, वो भी हम आपको बतातें है कि कैरेट के हिसाब से कैसे अंतर पड़ता है। 24 कैरेट अगर सोना है तो वह 99.9% शुद्ध होता है, इसे सबसे ज्यादा शुद्ध सोना माना जाता है। इसके साथ ही 23 कैरेट सोना 95.8% शुद्ध होता है और 22 कैरेट 91.6% और 21 कैरेट 87.5 % और 18 कैरेट 75.0 % शुद्ध माना जाता है।

what is Gold Rate Today

भारत में सोने में निवेश करना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। यही कारण है कि दूसरे देशों की तुलना में हमारे देश में सोना ज्यादा खरीदा जाता है। वल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार भारतीय घरों और मंदिरों में 24, 000 से 25,000 टन सोना मौजूद है। इसकी कीमत 1 ट्रिलियन डॉलर है यानी की करीब 88 लाख करोड़ रुपए।

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बजट फिर डगमगा गया? अब टेंशन नहीं, अपनाएं ये खास सेविंग्स टिप्स

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बजट फिर डगमगा गया? अब टेंशन नहीं, अपनाएं ये खास सेविंग्स टिप्स:

इस बार भी बजट से ज्यादा पैसे खर्च हो गए….” क्या महीने के अंत तक आप भी ऐसे शब्द अक्सर प्रयोग करते हैं? क्या आप भी परेशान हैं अपने बढ़ते खर्चों से? आज के दौर में हर कोई चाहता है कि वो अपनी जरूरतों के साथ-साथ अपने शौक भी पूरे कर सकें, लेकिन बहुत से लोगों की महीने के लास्ट तक पैसों से संबंधित परेशानियां शुरू हो जाती है, चाहे महीने में कितने भी पैसे क्यों ना कमाते हों। ऐसे में अगर आप भी पैसे की बचत करना चाहते हैं तो ये लेख आपकी मदद कर सकता है। इस लेख के जरिए हम आपको बताएंगे कि किस तरह से आप अपने पैसे को बचा सकते हैं।

कैसे आप अपना पैसों की बचत कर सकते हैं?

बचत के लिए व्यक्ति को अपने खर्चों पर नियंत्रण रखना पड़ता है। इसके लिए उन्हें पहले पता होना चाहिए कि खर्चा हो कहां रहा है। इसके साथ ही एक बजट तैयार करना चाहिए जिसमें हर महीने की शुरुआत में ही पैसों को बांट दिया जाए कि किस क्षेत्र में कहां कितने पैसे लगेंगे। आइए आपको अब कुछ सुझाव बताते हैं जिनके जरिए आप आसानी से बचत करना शुरू कर देंगे ।

बजट फिर डगमगा गया? अब टेंशन नहीं, एक लिस्ट तैयार करें:

सबसे पहले एक लिस्ट तैयार कर लें कि कहां-कहां आपको खर्च करना है। साथ ही ये भी तय कर लें कि किस काम के लिए आपको कितने पैसे खर्च करने हैं। इससे आपको काफी ज्यादा फायदा मिलेगा। आप एक रूपरेखा तैयार कर लेंगे जिससे आपको साथ में ये भी सहूलियत मिलेगी की कहीं आप ज्यादा पैसा ना खर्च कर दें। हमेशा ध्यान रखें कि लिस्ट के बाद जो बजट बनाएंगे उसमें पैसों को उस हिसाब से लिखें जितना आपको लगता है कि इतने पैसे खर्च हो सकते हैं।

फालतू खर्च को कहें अलविदा :

ना तो लिस्ट में फालतू के खर्चों को जोड़ें और इसके साथ ना ही फालतू की चीजों के लिए पैसे खर्च करें। ध्यान रहें कि हर काम के लिए खर्च होने वाले पैसे ही पहले से ही अलग कर के रख दें। जब तक आप पैसों को अलग करके नहीं रखोगे तब तक आप सही ध्यान नहीं दे पाओगे की पैसे खर्च कहां हुए।

अनचाहे इंस्टालमेंट से बचें:

आजकल एक चलन हो गया कि EMI  पर लोग उन सामान को भी खरीद लेते हैं जिसके लिए उनका बजट साफ तौर पर ना कहता हैं। मान लिजिए अगर आपको एक फोन की जरूरत होती है, तो कैश में तो चाहे आप फोन को 20,000 का खरीदें लेकिन एक बार जब आपके दिमाग में EMI पर सामान लेने की बात आती है तो फीचर को देखते हुए आप महंगे फोन को खरीदना पसंद करते हैं। यानी कि जहां आपका काम 20,000 से चल रहा था वहां पर बढ़ते-बढ़ते 30 से 40 हजार तक पहुंच जाता है। इसलिए अगर आप फालतू के खर्च से बचना चाहते हैं तो आप साथ ही साथ एकस्ट्रा इंस्टालमेंट से भी जरूर बचें क्योंकि ज्यादातर समय में ये भी आपका बजट बिगाड़ देती है।

सही जगह पर निवेश करें:

बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर वें पैसा बचाना चाहते हैं तो उसे निवेश कर देते हैं। कई बार वें  इसमें भी गलती कर देते हैं। निवेश करने के चक्कर में कई बार जल्दबाजी होते हुए वें पैसे को ऐसी जगह पर निवेश कर देते हैं जो फ्रॉड़ कर जाते हैं। ऐसे में ना तो पैसा निवेश ही होता ना ही व्यक्ति के किसी काम का रहता है। इसलिए जब भी किसी कंपनी या व्यक्ति को आप अपने खून-पसीने की कमाई थमाएं तो उससे पहले ध्यान रखें और सही से जांच-परख लें कि कि जहां वे पैसा निवेश कर रहें वो सही हाथों में भी जा रहा है या नहीं।

क्यों पैसे बचाना है जरुरी?

बहुत से लोग सोचते हैं कि पैसे आखिर बचाने क्यों है, जब हम हर महीने कमा रहे हैं तो उन्हें खर्च क्यों ना करें। इस सवाल के जवाब में हम यहीं कहना चाहेंगे कि जरा सोचिए अगर आपके माता-पिता भी यही सोच लेते तो क्या आप अच्छी शिक्षा, अच्छा जीवन जी पाते। पैसे बचाना इसलिए जरुरी है ताकि आपको अगर कभी जरुरत पड़ती है तो कभी आपको किसी ने मांगने ना पड़े आपके पास इतने पैसे होने चाहिए कि आप आसानी से पैसे संबंधित दुविधा से जल्द से जल्द बगैर सोचे-समझे बाहर निकल सको। इसी वजह से पैसे बचाने बेहद जरुरी है।

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Bhai Dooj: क्या आप जानते हैं भाई दूज पर तिलक का सही समय?

क्या आप जानते हैं भाई दूज पर तिलक का सही समय?:

क्या आप जानते हैं भाई दूज पर तिलक का सही समय? : भाई बहन के रिश्ते को बेहद खास माना जाता है। भाई-बहन के बीच जितनी टांग-खिचाई होती है, उससे कई ज्यादा बढ़कर दोनों के बीच प्यार होता है। कभी बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा कवच बांधकर रक्षा करने का वचन लेती है तो कभी भाई के माथे पर तिलक लगाकर अपना आशीर्वाद और दुआएं देती है। इसी तरह हर साल दिवाली के पावन माहौल को स्नेह‑भरे उत्सव को समेटते हुए आता है Bhai Dooj  जो भाई‑बहन के प्रेम, सुरक्षा और आशीर्वाद का प्रतीक पर्व है। इस साल भाई दूज का पावन त्यौहार 23 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।

क्या आप जानते हैं भाई दूज पर तिलक का सही समय?

भाई दूज मनाने का शुभ मुहूर्त:

पंचांग के अनुसार, Bhai Dooj का शुभ मुहूर्त 23 अक्टूबर 2025 को दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक है। भाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा, क्योंकि कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर 2025 को रात 8:16 बजे शुरू होकर 23 अक्टूबर को रात 10:46 बजे समाप्त होगी।

भाई को तिलक करने तथा बहन द्वारा पवित्र आशीर्वाद देने का सबसे शुभ मुहूर्त इस दिन दोपहर 1 :13 से 3 :28 बजे तक माना गया है।

शुभ मुहूर्त का महत्व

शुभ मुहूर्त का अर्थ सिर्फ सही समय नहीं, बल्कि उस समय में लगे कर्मों में विशेष शुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और संबंध‑भाव की पवित्रता को दर्शाता है। भाई‑बहन (Bhai Dooj) का यह मिलन, तिलक‑आरती और मंगलकामना का क्षण, जब उपयुक्त समय पर हो, तो माना जाता है कि वह औपचारिकता से परे एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है। इस वर्ष जो समय तय हुआ है — 1:13 से 3:28 बजे — वह ठीक उस अवधि में है जब दिन के प्रकाश के साथ मिलती है छायाएँ समाप्त होती हैं और संबंधों की झलक अधिक स्पष्ट होती है।

बहन जब उस समय (Bhai Dooj) अपने भाई को रोली‑अक्षत से तिलक करती है, आशीर्वाद देती है, मिठाई खिलाती है और भाई उसे उपहार देता है — यह पूरी प्रक्रिया एक तरह से जीवन‑साथ और खुशियों का प्रतीक बन जाती है। इसी कारण से शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना परंपरा में खास महत्त्व रखता है।

क्या आप जानते हैं भाई दूज पर तिलक का सही समय?

पौराणिक कथा के अनुसार क्यों मनाया जाता है भाई-दूज (Bhai Dooj) का पर्व ?

भाई दूज (Bhai Dooj) की कहानी यमराज और यमुना के पौराणिक कथा पर आधारित है। यह कथा बताती है कि यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर आकर भोजन करने का निमंत्रण दिया था। यमराज व्यस्त रहने के कारण बार-बार उन्हें टालते रहे। अंततः, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को, यमुना के प्रेम और आग्रह से प्रसन्न होकर यमराज उनके घर पहुंचे। यमुना ने भाई का बड़े स्नेह और आदर से स्वागत किया। उन्होंने यमराज को स्वादिष्ट भोजन कराया और माथे पर तिलक लगाया। यमुना के प्रेम से खुश होकर यमराज ने उनसे वरदान मांगने को कहा। यमुना ने वरदान मांगा कि वे हर साल इस दिन उनके घर आकर भोजन करें और यह भी कि जो बहनें इस दिन अपने भाई को टीका करें, उन्हें यम का भय न हो। यमराज ने “तथास्तु” कहा और तभी से भाई दूज मनाने की परंपरा शुरू हुई, जिसके अनुसार भाई-बहन इस दिन एक-दूसरे से मिलते हैं, बहनें भाइयों को तिलक लगाती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं।

परंपरा व विधि

भाई‑दूज (Bhai Dooj) सिर्फ भाई‑बहन के बीच महज एक रस्म नहीं, ये रिश्तों के महत्व का त्यौहर है जो परिवार-बंधन और सहयोग की भावना को दर्शाता है। शब्दों में बातें तो बड़ी सरल सी लगती है जैसे भाई वचन देते हैं कि मैं तेरा साथ दूंगा और वहीं बहन जो कामना करती है कि भाई, तू हमेशा सुखी रहो, ये बात है तो बेहद सरल किंतु बेहद गहरी है। उसी तरह, आज‑कल के व्यस्त जीवन में यह क्षण हमें सचेत करता है कि भले ही दूर हो जाएँ, दिल और भावना में रिश्ता जिंदा रह सकता है। यही त्योहार हमें याद दिलाता है कि जीवन के पथ पर साथ‑सहारा, उत्साह और निस्वार्थ प्रेम सबसे बड़ी पूंजी है।

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