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Aadhaar card update new rules in 2025

Aadhaar card update new rules – UIDAI ने आधार नियमों में किया बदलाव

Aadhaar card update new rules: Unique Identification Authority of India (UIDAI) द्वारा चलाए जा रहे Aadhaar कार्यक्रम में हाल-फिलहाल महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य आधार प्रणाली को और अधिक भरोसेमंद, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है। इस लेख में हम जानेंगे कि इन नए नियमों में क्या-क्या बदलाव आए हैं और उनका आम नागरिक पर क्या असर होगा।

Aadhaar card update new rules

1. क्या हैं नए बदलाव?

नीचे नए नियमों के मुख्य बिंदु दिए गए हैं:

(1) आधार अपडेट शुल्क में बदलाव

Aadhaar card update new rules : UIDAI ने आधार अपडेट शुल्क में संशोधन किया है, जो 1 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी होगा। नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर या ईमेल पता अपडेट करने पर अब ₹75 लगेंगे, जो पहले ₹50 थे। बायोमेट्रिक अपडेट, जैसे फिंगरप्रिंट, आईरिस या फोटो, अब ₹125 लगेंगे, जो पहले ₹100 थे।

(2) बच्चों का आधार अपडेट एक बार मुफ़्त

बच्चों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट एक बार मुफ़्त होंगे। इसमें 5-7 और 15-17 साल के बच्चों के लिए अपडेट शामिल हैं। 7-15 साल के बच्चों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट 30 सितंबर, 2026 तक मुफ़्त रहेंगे। दस्तावेज़ अपडेट के लिए अब केंद्र पर ₹75 का शुल्क लगेगा, लेकिन ऑनलाइन 14 जून, 2026 तक यह मुफ़्त रहेगा। इसके अलावा, आधार कार्ड रीप्रिंट का शुल्क ₹40 तय किया गया है। UIDAI ने आधार नियमों में किया बदलाव

(3) पैन-आधार लिंकिंग अब अनिवार्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने अपने पैन को आधार से लिंक नहीं किया है, उनका पैन अब सक्रिय नहीं रहेगा। ऐसे व्यक्ति म्यूचुअल फंड, डीमैट खाते या टैक्स-सेविंग योजनाओं में निवेश नहीं कर पाएँगे। हाल के दिनों में, कई निवेशकों के लेन-देन इसलिए रुके हैं क्योंकि उनका पैन और आधार लिंक नहीं है। इसलिए, समय रहते अपने पैन और आधार को लिंक करना बेहद ज़रूरी है।

(4) आधार ई-केवाईसी अब आसान

UIDAI और NPCI ने आधार ई-केवाईसी सेतु और ऑफलाइन केवाईसी सुविधाएँ शुरू की हैं। बैंक और एनबीएफसी अब ग्राहकों की पहचान उनके पूरे आधार नंबर देखे बिना ही कर सकेंगे। इससे डेटा सुरक्षा और गोपनीयता बढ़ेगी, साथ ही खाता खोलने की प्रक्रिया में भी तेज़ी आएगी।

(5) आधार सत्यापन के लिए नए नियम

UIDAI ने नए नियम जारी किए हैं, जिसके तहत वित्तीय संस्थान केवल सक्रिय और विशिष्ट आधार संख्या पर ही KYC कर पाएँगे। अगर किसी व्यक्ति का आधार डुप्लिकेट या निष्क्रिय पाया जाता है, तो बैंक खाता खोलने या निवेश करने पर रोक लग सकती है। इसलिए, उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर UIDAI की वेबसाइट या एमआधार ऐप पर जाकर अपने आधार की स्थिति की जाँच करते रहें।

2. अब आपके लिए क्या मतलब है?

आधार कार्ड नियम- UIDAI ने आधार नियमों में किया यह बदलाव आम नागरिकों, विशेष-कर जिनके पास आधार है या जिन्हें नए नामांकन-अपडेट की आवश्यकता है, के लिए कई मायने रखते हैं:

आसान और तेज प्रक्रिया

– अब आप ऑनलाइन (मोबाइल/वेब) माध्यम से नाम, पता, जन्म तिथि और मोबाइल नंबर बदल सकते हैं — पहले हर बदलाव हेतु केंद्र जाना पड़ता था।

– UIDAI ने आधार नियमों में किया बदलाव केंद्र-जाना कम होगा, समय-बचत होगी।

अधिक सुरक्षा और भरोसेमंद पहचान

– दस्तावेजों की सूची स्पष्ट होने से फर्जी नामांकन-अपडेट की संभावना कम होगी।

– एक व्यक्ति के द्वितीय या तृतीय आधार नंबर बनना अब और कठिन होगा।

– ऑटोमेटिक डेटाबेस लिंकिंग के माध्यम से त्रुटियाँ और धोखाधड़ी कम हो सकती हैं।

तय-शुदा सीमाएँ — तैयार रहें

– यदि आपने पहले से जन्म-तिथि या लिंग में बदलाव किया है, तो अब उस विकल्प का पुनः उपयोग नहीं कर सकेंगे। इसलिए, पहले बदलाव में सावधानी बरतें। आधार कार्ड नियम- UIDAI ने आधार नियमों में किया बदलाव

– नाम में बदलाव की संख्या सीमित है — बार-बार नाम बदलना संभव नहीं रहेगा।

– ऑनलाइन अपडेट के लिए मोबाइल नंबर लिंक होना आवश्यक है।

बच्चों और नए नामांकन के संबंध में

– 5 वर्ष से कम के बच्चों के लिए नए नियम बनाए गए हैं — उदाहरण के लिए यदि बच्चा बाल-आधार (Baal Aadhaar) के अंतर्गत आता है, तो नए दस्तावेज चाहिए होंगे।

– नामांकन के समय दस्तावेजों की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है।

लागत-प्रभाव

– ऐसे अपडेट्स जो अब ऑनलाइन संभव हैं, उनमें अतिरिक्त खर्च कम हो सकता है (यानी केंद्र-जाना नहीं होने से समय व पैसे बचेंगे)।

– हालांकि, कुछ विशेष केंद्र-आधारित अपडेट्स में शुल्क हो सकते हैं — इसलिए अपडेट करते समय शुल्कों की जानकारी अवश्य लें।

3. आपको क्या करना चाहिए?

Aadhaar card update new rules – UIDAI ने आधार नियमों में किया बदलावों के मद्देनज़र आप निम्न कार्य अवश्य कर लें:

  • सुनिश्चित करें कि आपके मोबाइल नंबर एवं ई-मेल आपने अपने आधार में लिंक कर रखे हैं — क्योंकि ऑनलाइन अपडेट हेतु यह बेहद आवश्यक है।
  • यदि आपने कभी जन्म-तिथि, नाम या लिंग में बदलाव किया है तो आगे की संभावनाओं को समझ लें।
  • यदि पता बदल गया है, तो जल्द से जल्द ऑनलाइन माध्यम से अपडेट कर लें — भविष्य में पता बदलने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी।
  • बच्चों (खासतौर पर 5 वर्ष से कम उम्र) का नामांकन-अपडेट कराने पर नए दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है — इस पर पहले से तैयारी करें।
  • ऑनलाइन अपडेट करते समय दस्तावेज स्कैन/अपलोड करते समय गुणवत्ता और सत्यता का ध्यान रखें — क्योंकि नए नियमों में दस्तावेजों की पुष्टि सख्त हुई है।
  • यदि आपको अब तक मोबाइल नंबर लिंक नहीं है, तो इसे जल्दी से जोड़ लें — क्योंकि भविष्य में ऑनलाइन प्रक्रिया आसान होगी और केंद्र-जाने की जरूरत कम होगी।

निष्कर्ष

UIDAI द्वारा किए गए ये बदलाव पहचान-प्रणाली को अधिक भरोसेमंद, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। आधार कार्ड धारकों के लिए यह खबर शुभ है क्योंकि अब अपडेट प्रक्रिया आसान होने वाली है और सुरक्षा-मानक भी सख्त हुए हैं। हालांकि, इन्हें ध्यान में रखते हुए नागरिकों को अपनी जानकारी को अपडेट रखना महत्वपूर्ण होगा।

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फेविकोल का जोड़ है टूटेगा नहीं’ कहने वाले पीयूष पांडे का जीवन का जोड़ आखिर टूट गया

फेविकोल का जोड़ है टूटेगा नहीं’ कहने वाले पीयूष पांडे का जीवन का जोड़ आखिर टूट गया

अबकी बार मोदी सरकार’ ये नारा आपने जरूर सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि ये नारा किसने दिया था। ये लाइनें लिखी है एड गुरु पद्मश्री पीयूष पांडे ने जो अब इस दुनिया को अलविदा कह गए। पीयूष पांडे के निधन से देश में शोक की लहर है। हर किसी की जुबां पर उनके काम हैं। उनकी क्रिएटीविटी उनके काम में बखूबी दिखती थी। जो कोई भी उनके लिखे नारे को पढ़ता था एक ना एक बार जरूर सोचता था कि आखिर कोई कैसे इतना अच्छा लिख सकता है, कैसे कोई इतने अच्छे से सोच सकता है कि मुझे ये लिखना है। कैसे इतने अच्छे से शब्दों का चयन करके उन्हें लाइन में पिरोकर पूरा मैसेज दे सकता है।

विज्ञापन की दुनिया में अगर किसी ने आम बोलचाल की भाषा को ब्रांड की पहचान बना दिया, तो वो थे पीयूष पांडेय। उनकी कलम से निकले स्लोगन सिर्फ प्रोडक्ट नहीं बेचते थे, बल्कि लोगों के दिलों में उतर जाते थे। शुक्रवार सुबह 70 की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

कौन-कौन सी टैगलाइन है जो काफी मशहूर भी है?

फेविकोल का जोड़ है टूटेगा नहीं’ कहने वाले पीयूष पांडे का जीवन का जोड़ आखिर टूट गया बहुत से मशहूर विज्ञापनों की टैगलाइन इन्होंने लिखी थी। जो काफी ज्यादा लोकप्रिय हुई। बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक की जुबां पर उनके लिखे स्लोगन हमेशा रहें। पीयूष पांडे ने कई लोकप्रिय विज्ञापनों का स्‍लोगन लिखा था। ‘अबकी बार मोदी सरकार’ नारा भी उन्‍होंने ही लिखा था, जो आगे चलकर बेहद पॉपुलर हुआ था. इसके अलावा ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ गाना भी उन्‍होंने लिखा था। पीयूष पांडे ने फेविकॉल मशहूर स्‍लोगन भी लिखा था – ये फेविकॉल का जोड़ है, टूटेगा नहीं. हालांकि, पीयूष पांडे के सांसों की डोर टूट गई।

रिपोर्ट की मानें तो वे गंभीर संक्रमण से जूझ रहे थे. उनका अंतिम संस्‍कार उनकी कर्मभूमि मुंबई में ही किया जाएगा।

नहीं रहे शब्दों के जादूगर:

एशियन पेंट्स का मशहूर स्लोगन “हर खुशी में रंग लाएं” हो या कैडबरी का “कुछ खास है”, ये लाइनें सिर्फ विज्ञापन नहीं थीं, ये भावनाएं थीं, जो पीयूष पांडेय की सोच से निकलीं। उन्होंने फेविकोल, हच जैसी कंपनियों के लिए भी ऐसे कैंपेन बनाए जो आज भी याद किए जाते हैं।

पीयूष पांडे का जन्म 1955 में जयपुर में हुआ था. पीयूष पांडे के भाई प्रसून पांडे जाने माने डायरेक्टर और बहन इला अरुण सिंगर और एक्ट्रेस हैं. पीयूष पांडे के पिता एक बैंक में नौकरी करते थे. पीयूष पांडे ने विज्ञापन की कलात्‍मक दुनिया में कदम रखने से पहले कई साल तक क्रिकेट भी खेला था. राजस्थान में पैदा हुए पीयूष सात बहनें और दो भाई थे. उनका स्कूल एजुकेशन जयपुर से हुआ था. इसके बाद उन्‍होंने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से इतिहास में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया. पीयूष पांडे ने राजस्थान राज्य-टीम के लिए रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया था. इसके बाद उन्‍होंने काफी उम्र में ही विज्ञापन जगत में कदम रख दिया था।

पीयूष पांडे 27 साल की उम्र में विज्ञापन जगत से जुड़ गए थे. उन्होंने शुरुआत अपने भाई प्रसून पांडे के साथ की थी. दोनों ने रोजमर्रा के उत्पादों के लिए रेडियो जिंगल्स की आवाज दी थी. साल 1982 में विज्ञापन कंपनी ओगिल्वी से की. 1994 में उन्हें ओगिल्वी के बोर्ड में नॉमिनेट किया गया. पीयूष पांडे को उनके काम के लिए साल 2016 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया था।

PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि:

फेविकोल का जोड़ है टूटेगा नहीं’ कहने वाले पीयूष पांडे को पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम ने X पर लिखा, ‘पीयूष पांडे क्रिएटिविटी के लिए जाने जाते थे। एडवर्टाइजिंग की दुनिया में उन्होंने शानदार योगदान दिया। मैं उनके साथ हुई बातचीत को सालों तक संजोकर रखूंगा। उनके दुनिया से जाने से बहुत दुखी हूं। उनके परिजन के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।’

फेविकोल का जोड़ है टूटेगा नहीं’ कहने वाले पीयूष पांडे का जीवन का जोड़ आखिर टूट गया

पीयूष पांडे के सहयोगी उन्हें एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने सादगी, मानवता और क्रिएटिविटी में संतुलन बनाए रखा। उनका आदर्श था- “सिर्फ मार्केट को नहीं, दिल से बोलो।” उनके योगदान ने भारतीय विज्ञापन जगत को नई पहचान दी और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का सोर्स बना। आज पीयूष पांडे नहीं रहे, लेकिन उनके बनाए विज्ञापन, स्लोगन और जिंगल्स भारतीय संस्कृति का हिस्सा बनकर हमेशा जीवित रहेंगे। उन्होंने यह दिखाया कि अगर कहानी में दिल और भावना हो, तो वह किसी भी ब्रांड को घर-घर में पहुंचा सकती है। भारत की विज्ञापन दुनिया का यह जादूगर हमेशा याद रखा जाएगा।

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what is Gold Rate Today

what is Gold Rate Today

what is Gold Rate Today : दिवाली से पहले रॉकेट की रफ्तार पर सोना-चांदी सवार था। त्यौहार का समय था ऐसे में बहुत से लोग सोना-चांदी की खरीदारी करते हैं, लेकिन सोना-चांदी के दाम आसमान को नहीं बल्कि अंतरिक्ष को छू रहे थे। अब वही सोना-चादीं औंधे मुंह गिरा है। अगर आप भी खरीदारी करना चाहते हैं तो उससे पहले जरुर जान लें क्या है आज के सोना-चांदी के दाम?

क्या है सोना-चांदी के दाम ?

दिवाली के आस-पास सोने-चांदी के दाम रिकॉर्ड तोड़ रहा था, लेकिन अब दाम में गिरावट भी आई है उसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली है। 23 अक्टूबर यानी की आज के दिन चांदी  1 हजार 301 रुपये सस्ती हुई है। वहीं सोने के दामों में भी गिरावट देखने को मिली है। भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 1 लाख 23 हजार रुपये प्रति ग्राम है, जबकि चांदी का भाव 1301 प्रति 1 किलो रुपये गिरा है। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक कल यानी कि 22 अक्टूबर की शाम को 916 शुद्धता 22 कैरेट गोल्ड का दाम 113499 रुपये प्रति ग्राम था।

आज यानी की 23 अक्टूबर को 22 कैरेट सोने के दाम 1,13,800 और 24 कैरेट का भाव 1,23,030 इसके साथ ही चांदी के रेट में भी गिरावट दर्ज की गई है।

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सोने-चांदी के दाम सीधे अंतरिक्ष से धरती पर आने का क्या है कारण?

भारत में सीजनल बाइंग का खत्म होना : दीवाली जैसे त्योहार पर भारत देश में सोने-चांदी की खरीदारी काफी ज्यादा होती है। कुछ लोग अपने रिश्तेदार को गिफ्ट के तौर पर देते हैं। कई लोग इंवेस्टमेंट के तौर पर खरीदते हैं तो वहीं पर कुछ लोग शगुन के तौर पर भी सोना-चांदी खरीदते हैं। त्यौहारों के बाद ये सिलसिला थम सा गया है। कहीं ना कहीं ये भी एक कारण माना जाता है।

अमेरिका-चीन ट्रेड टेंशन में ढील: सोना-चांदी को सेफ हेवन माना जाता है, यानी कि खरीदा हुआ सोना मुश्किल वक्त में मनुष्य का साथ देता है। लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के शी जिनपिंग के बीच अगले हफ्ते मीटिंग होने वाली है। इससे ट्रेड वॉर की चिंता कम हुई है।

प्रॉफिट-टेकिंग और ओवरबॉट सिग्नलः रैली के बाद निवेशक प्रॉफिट बुक कर रहे हैं। टेक्निकल इंडिकेटर्स जैसे रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) दिखा रहे थे कि कीमतें ओवरबॉट जोन में पहुंच चुकी थीं। इसलिए ट्रेंड फॉलोअर्स और डीलर्स ने बिकवाली शुरू कर दी है।

what is Gold Rate Today : इस साल सोना ₹47,745 और चांदी ₹66,484 महंगी हुई

इस साल अब तक सोने की कीमत 47,745 रुपए बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो अब 1,23,907 रुपए हो गया है।

चांदी का भाव भी इस दौरान 66,484 रुपए बढ़ गया है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो अब 1,52,501 रुपए प्रति किलो हो गई है।

सोना खरीदते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान :

सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें : हमेशा ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक में हो सकता है, जैसे- AZ4523 । हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।

कीमत क्रॉस चेक जरूर करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज जैसे इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट से क्रॉस चेक जरूर कर लें। इसके साथ ही सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है, वो भी चेक करके ही सोना खरीदने के लिए जाएं।

कितने कैरेट में कितना सोना होता है शुद्ध ?

अक्सर आपने सुना होगा सोना अलग-अलग कैरेट का होता है, जैसा कि हमने आपको लेख के माध्यम से भी बताया कि कैरेट के साथ ही सोने की कीमत पर भी असर पड़ता है, वो भी हम आपको बतातें है कि कैरेट के हिसाब से कैसे अंतर पड़ता है। 24 कैरेट अगर सोना है तो वह 99.9% शुद्ध होता है, इसे सबसे ज्यादा शुद्ध सोना माना जाता है। इसके साथ ही 23 कैरेट सोना 95.8% शुद्ध होता है और 22 कैरेट 91.6% और 21 कैरेट 87.5 % और 18 कैरेट 75.0 % शुद्ध माना जाता है।

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भारत में सोने में निवेश करना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। यही कारण है कि दूसरे देशों की तुलना में हमारे देश में सोना ज्यादा खरीदा जाता है। वल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार भारतीय घरों और मंदिरों में 24, 000 से 25,000 टन सोना मौजूद है। इसकी कीमत 1 ट्रिलियन डॉलर है यानी की करीब 88 लाख करोड़ रुपए।

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बजट फिर डगमगा गया? अब टेंशन नहीं, अपनाएं ये खास सेविंग्स टिप्स

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बजट फिर डगमगा गया? अब टेंशन नहीं, अपनाएं ये खास सेविंग्स टिप्स:

इस बार भी बजट से ज्यादा पैसे खर्च हो गए….” क्या महीने के अंत तक आप भी ऐसे शब्द अक्सर प्रयोग करते हैं? क्या आप भी परेशान हैं अपने बढ़ते खर्चों से? आज के दौर में हर कोई चाहता है कि वो अपनी जरूरतों के साथ-साथ अपने शौक भी पूरे कर सकें, लेकिन बहुत से लोगों की महीने के लास्ट तक पैसों से संबंधित परेशानियां शुरू हो जाती है, चाहे महीने में कितने भी पैसे क्यों ना कमाते हों। ऐसे में अगर आप भी पैसे की बचत करना चाहते हैं तो ये लेख आपकी मदद कर सकता है। इस लेख के जरिए हम आपको बताएंगे कि किस तरह से आप अपने पैसे को बचा सकते हैं।

कैसे आप अपना पैसों की बचत कर सकते हैं?

बचत के लिए व्यक्ति को अपने खर्चों पर नियंत्रण रखना पड़ता है। इसके लिए उन्हें पहले पता होना चाहिए कि खर्चा हो कहां रहा है। इसके साथ ही एक बजट तैयार करना चाहिए जिसमें हर महीने की शुरुआत में ही पैसों को बांट दिया जाए कि किस क्षेत्र में कहां कितने पैसे लगेंगे। आइए आपको अब कुछ सुझाव बताते हैं जिनके जरिए आप आसानी से बचत करना शुरू कर देंगे ।

बजट फिर डगमगा गया? अब टेंशन नहीं, एक लिस्ट तैयार करें:

सबसे पहले एक लिस्ट तैयार कर लें कि कहां-कहां आपको खर्च करना है। साथ ही ये भी तय कर लें कि किस काम के लिए आपको कितने पैसे खर्च करने हैं। इससे आपको काफी ज्यादा फायदा मिलेगा। आप एक रूपरेखा तैयार कर लेंगे जिससे आपको साथ में ये भी सहूलियत मिलेगी की कहीं आप ज्यादा पैसा ना खर्च कर दें। हमेशा ध्यान रखें कि लिस्ट के बाद जो बजट बनाएंगे उसमें पैसों को उस हिसाब से लिखें जितना आपको लगता है कि इतने पैसे खर्च हो सकते हैं।

फालतू खर्च को कहें अलविदा :

ना तो लिस्ट में फालतू के खर्चों को जोड़ें और इसके साथ ना ही फालतू की चीजों के लिए पैसे खर्च करें। ध्यान रहें कि हर काम के लिए खर्च होने वाले पैसे ही पहले से ही अलग कर के रख दें। जब तक आप पैसों को अलग करके नहीं रखोगे तब तक आप सही ध्यान नहीं दे पाओगे की पैसे खर्च कहां हुए।

अनचाहे इंस्टालमेंट से बचें:

आजकल एक चलन हो गया कि EMI  पर लोग उन सामान को भी खरीद लेते हैं जिसके लिए उनका बजट साफ तौर पर ना कहता हैं। मान लिजिए अगर आपको एक फोन की जरूरत होती है, तो कैश में तो चाहे आप फोन को 20,000 का खरीदें लेकिन एक बार जब आपके दिमाग में EMI पर सामान लेने की बात आती है तो फीचर को देखते हुए आप महंगे फोन को खरीदना पसंद करते हैं। यानी कि जहां आपका काम 20,000 से चल रहा था वहां पर बढ़ते-बढ़ते 30 से 40 हजार तक पहुंच जाता है। इसलिए अगर आप फालतू के खर्च से बचना चाहते हैं तो आप साथ ही साथ एकस्ट्रा इंस्टालमेंट से भी जरूर बचें क्योंकि ज्यादातर समय में ये भी आपका बजट बिगाड़ देती है।

सही जगह पर निवेश करें:

बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर वें पैसा बचाना चाहते हैं तो उसे निवेश कर देते हैं। कई बार वें  इसमें भी गलती कर देते हैं। निवेश करने के चक्कर में कई बार जल्दबाजी होते हुए वें पैसे को ऐसी जगह पर निवेश कर देते हैं जो फ्रॉड़ कर जाते हैं। ऐसे में ना तो पैसा निवेश ही होता ना ही व्यक्ति के किसी काम का रहता है। इसलिए जब भी किसी कंपनी या व्यक्ति को आप अपने खून-पसीने की कमाई थमाएं तो उससे पहले ध्यान रखें और सही से जांच-परख लें कि कि जहां वे पैसा निवेश कर रहें वो सही हाथों में भी जा रहा है या नहीं।

क्यों पैसे बचाना है जरुरी?

बहुत से लोग सोचते हैं कि पैसे आखिर बचाने क्यों है, जब हम हर महीने कमा रहे हैं तो उन्हें खर्च क्यों ना करें। इस सवाल के जवाब में हम यहीं कहना चाहेंगे कि जरा सोचिए अगर आपके माता-पिता भी यही सोच लेते तो क्या आप अच्छी शिक्षा, अच्छा जीवन जी पाते। पैसे बचाना इसलिए जरुरी है ताकि आपको अगर कभी जरुरत पड़ती है तो कभी आपको किसी ने मांगने ना पड़े आपके पास इतने पैसे होने चाहिए कि आप आसानी से पैसे संबंधित दुविधा से जल्द से जल्द बगैर सोचे-समझे बाहर निकल सको। इसी वजह से पैसे बचाने बेहद जरुरी है।

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Bhai Dooj: क्या आप जानते हैं भाई दूज पर तिलक का सही समय?

क्या आप जानते हैं भाई दूज पर तिलक का सही समय?:

क्या आप जानते हैं भाई दूज पर तिलक का सही समय? : भाई बहन के रिश्ते को बेहद खास माना जाता है। भाई-बहन के बीच जितनी टांग-खिचाई होती है, उससे कई ज्यादा बढ़कर दोनों के बीच प्यार होता है। कभी बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा कवच बांधकर रक्षा करने का वचन लेती है तो कभी भाई के माथे पर तिलक लगाकर अपना आशीर्वाद और दुआएं देती है। इसी तरह हर साल दिवाली के पावन माहौल को स्नेह‑भरे उत्सव को समेटते हुए आता है Bhai Dooj  जो भाई‑बहन के प्रेम, सुरक्षा और आशीर्वाद का प्रतीक पर्व है। इस साल भाई दूज का पावन त्यौहार 23 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।

क्या आप जानते हैं भाई दूज पर तिलक का सही समय?

भाई दूज मनाने का शुभ मुहूर्त:

पंचांग के अनुसार, Bhai Dooj का शुभ मुहूर्त 23 अक्टूबर 2025 को दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक है। भाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा, क्योंकि कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर 2025 को रात 8:16 बजे शुरू होकर 23 अक्टूबर को रात 10:46 बजे समाप्त होगी।

भाई को तिलक करने तथा बहन द्वारा पवित्र आशीर्वाद देने का सबसे शुभ मुहूर्त इस दिन दोपहर 1 :13 से 3 :28 बजे तक माना गया है।

शुभ मुहूर्त का महत्व

शुभ मुहूर्त का अर्थ सिर्फ सही समय नहीं, बल्कि उस समय में लगे कर्मों में विशेष शुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और संबंध‑भाव की पवित्रता को दर्शाता है। भाई‑बहन (Bhai Dooj) का यह मिलन, तिलक‑आरती और मंगलकामना का क्षण, जब उपयुक्त समय पर हो, तो माना जाता है कि वह औपचारिकता से परे एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है। इस वर्ष जो समय तय हुआ है — 1:13 से 3:28 बजे — वह ठीक उस अवधि में है जब दिन के प्रकाश के साथ मिलती है छायाएँ समाप्त होती हैं और संबंधों की झलक अधिक स्पष्ट होती है।

बहन जब उस समय (Bhai Dooj) अपने भाई को रोली‑अक्षत से तिलक करती है, आशीर्वाद देती है, मिठाई खिलाती है और भाई उसे उपहार देता है — यह पूरी प्रक्रिया एक तरह से जीवन‑साथ और खुशियों का प्रतीक बन जाती है। इसी कारण से शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना परंपरा में खास महत्त्व रखता है।

क्या आप जानते हैं भाई दूज पर तिलक का सही समय?

पौराणिक कथा के अनुसार क्यों मनाया जाता है भाई-दूज (Bhai Dooj) का पर्व ?

भाई दूज (Bhai Dooj) की कहानी यमराज और यमुना के पौराणिक कथा पर आधारित है। यह कथा बताती है कि यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर आकर भोजन करने का निमंत्रण दिया था। यमराज व्यस्त रहने के कारण बार-बार उन्हें टालते रहे। अंततः, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को, यमुना के प्रेम और आग्रह से प्रसन्न होकर यमराज उनके घर पहुंचे। यमुना ने भाई का बड़े स्नेह और आदर से स्वागत किया। उन्होंने यमराज को स्वादिष्ट भोजन कराया और माथे पर तिलक लगाया। यमुना के प्रेम से खुश होकर यमराज ने उनसे वरदान मांगने को कहा। यमुना ने वरदान मांगा कि वे हर साल इस दिन उनके घर आकर भोजन करें और यह भी कि जो बहनें इस दिन अपने भाई को टीका करें, उन्हें यम का भय न हो। यमराज ने “तथास्तु” कहा और तभी से भाई दूज मनाने की परंपरा शुरू हुई, जिसके अनुसार भाई-बहन इस दिन एक-दूसरे से मिलते हैं, बहनें भाइयों को तिलक लगाती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं।

परंपरा व विधि

भाई‑दूज (Bhai Dooj) सिर्फ भाई‑बहन के बीच महज एक रस्म नहीं, ये रिश्तों के महत्व का त्यौहर है जो परिवार-बंधन और सहयोग की भावना को दर्शाता है। शब्दों में बातें तो बड़ी सरल सी लगती है जैसे भाई वचन देते हैं कि मैं तेरा साथ दूंगा और वहीं बहन जो कामना करती है कि भाई, तू हमेशा सुखी रहो, ये बात है तो बेहद सरल किंतु बेहद गहरी है। उसी तरह, आज‑कल के व्यस्त जीवन में यह क्षण हमें सचेत करता है कि भले ही दूर हो जाएँ, दिल और भावना में रिश्ता जिंदा रह सकता है। यही त्योहार हमें याद दिलाता है कि जीवन के पथ पर साथ‑सहारा, उत्साह और निस्वार्थ प्रेम सबसे बड़ी पूंजी है।

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दिवाली कब मनाएं 20 या 21 अक्टूबर

Table of Contents

दिवाली कब मनाएं 20 या 21 अक्टूबर

दिवाली कब मनाएं 20 या 21 अक्टूबर? : इस बार दिवाली किस तारीख को मनाई जाएगी इस दुविधा ने सभी लोगों को उलझाया है आम तौर पर हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की अमावस्या को शुरुआत होती है

दिवाली कब मनाएं 20 या 21 अक्टूबर

इस बार अमावस्या तिथि 20 अक्तूबर 2025 दोपहर से प्रारम्भ होकर 21 अक्तूबर की शाम को समाप्त हो रही है। चूंकि अमावस्या की शुरुवात 20 अक्तूबर को सूर्यास्त से पूर्व हो रही है, इसलिए मुख्य पूजा-तिथि २० अक्तूबर, सोमवार निर्धारित की गई है।

बावजूद इसके, कुछ पंचांग स्रोत 21 अक्तूबर को भी दिवाली दिवस के रूप में दिखा रहे हैं।

इसलिए, यह समझना महत्वपूर्ण है कि पूजा-मुहूर्त (विशेष समय) का पालन करना और स्थानीय पुरोहित या पंचांग से पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

इस प्रकार, उत्सव-मिजाज के लिए 21 अक्तूबर को मुख्य दिवाली की तिथि माना जा रहा है, लेकिन स्थानीय रीति-रिवाजों व समय के अनुसार 21 अक्तूबर को भी कई स्थानों पर मनाया जा सकता है।

दिवाली का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

  1. दीवाली का त्यौहार हिन्दू धर्म मे बड़ा ही प्रमुख त्यौहार है, और इसे “अंधकार पर प्रकाश”, की विजय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
  2. तथ्यों के अनुसार, यह दिन प्रभु श्री राम जी अपनी पत्नी माता सीता और भाई लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौटे थे और उन्होंने प्रकाश-प्रदाय के लिए दीप जलाए थे।
  3. इसके अलावा एक और तथ्ये के अनुसार भगवन श्री कृष्ण जी ने नरकासुर राक्षस का वध किया था, जिसे हम नरक चतुर्दशी के नाम से जानते हैं।
  4. इसके साथ-साथ, यह त्योहार परिवार, भाई-बहन, मित्र-मिलन, उपहार, मिठाइयाँ, दीपदान, रंगोली आदि के माध्यम से सामाजिक तथा सांस्कृतिक बंधनों को मजबूत करने का अवसर भी है।
दिवाली कब मनाएं 20 या 21 अक्टूबर

इस दीवाली उत्सव पाँच-दिनों तक फैला हुआ है। प्रमुख तिथियाँ इस प्रकार हैं:

धनतेरस – नव-धन का आरंभ, सोना-चाँदी खरीदने का शुभ दिन।

नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली – 20 अक्तूबर की सुबह से, अभ्यंग स्नान आदि विशेष कार्य।

मुख्य दिवाली-रात्रि / लक्ष्मी पूजा – 20 अक्तूबर की शाम से दीप-दान व पूजा।

गोवर्धन पूजा / अन्नकूट – अगले दिन अर्थात 21 अक्तूबर को न्यायवत् माना गया है कुछ क्षेत्रों में

भाई दूज – भाई-बहन के बंधन का उत्सव, इसके बाद नया वर्ष आरंभ होता है।

इस क्रम से हमें यह समझ आता है कि उत्सव सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि एक लय-प्रवाही श्रृंखला है जिसमें धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक आयाम समाहित हैं।

दिवाली के अवसर पर निम्न बातों पर विशेष ध्यान देना अच्छा रहेगा:

दिवाली-तैयारी: घर, मन और परंपरा

सफाई-सज्जा : घर की सफाई, रंगोली, दीयों-मोमबत्तियों, मोम-मोमबत्ती से सजावट – इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

दीपदान : प्रतिदिन शाम में दीप जलाना, खासकर पूजा के समय—यह अंधकार से प्रकाश की ओर संकेत करता है।


हिंदी पंचांग के अनुसार दिवाली कब मनाई जाती है?

पूजा-विधान : पूजा में लक्ष्मी (समृद्धि की देवी) व गणेश (विघ्नहर्ता) की आराधना प्रमुख है। इस वर्ष लक्ष्मी-पूजा का मुहूर्त 20 अक्तूबर शाम 7:08 से 8:18 बजे निर्धारित है।

उपहार-मिठाई : सद्भावना बढ़ाने के लिए मित्रों-रिश्तेदारों को उपहार देना, खासकर सामूहिक रूप से मिठाइयाँ बाँटना।

पर्यावरण-सहजता : आजकल ‘ग्रीन दिवाली’ की प्रवृत्ति है — कम पटाखे, LED लाइट्स, कम शोर-प्रदूषण। इससे स्वास्थ्य-पर्यावरण दोनों को लाभ होता है।

सुरक्षा-सावधानियाँ : प्रकाश सजावट, इलेक्ट्रिकल उपकरण, व आतिशबाजी के समय विशेष ध्यान देना आवश्यक है; लोड अधिक न लें, बच्चों को छेड़-छाड़ न करने दें।

सामाजिकअर्थशास्त्र सामयिक मूल्य

दिवाली केवल स्वयंउत्सव नहीं है, बल्कि उसके सामाजिकआर्थिक अर्थविवरण भी हैं:

खरीदारी-उत्साह : धनतेरस से ही सोना-चाँदी-उपकरण की खरीद शुरू होती है, जिससे स्थानीय व्यापार को गति मिलती है।

सामूहिक मिलन-जुलन : घर-परिवार, मित्र-समूह, मोहल्ला-संगठन मिलकर मिलन-समारोह करते हैं, जिससे सामाजिक समरसता बढ़ती है।

सांस्कृतिक हस्तांतरण : नए पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का यह एक अवसर है — दीपों के पीछे अर्थ जानना, कथा-कहानी सुनना।

पर्यावरण जागरूकता : आज का दिवाली-प्रसंग पर्यावरण-प्रेरित हो रहा है; पटाखों की जगह दीये-मोमबत्तियाँ बढ़ रही हैं, जिससे पुलिस-स्वास्थ्य विभाग को भी राहत मिल रही है।

निष्कर्ष

इस वर्ष की दिवाली-तिथि को लेकर यदि कुछ भ्रम है, तो संक्षिप्त में कह सकते हैं — अमावस्या का आरंभ 20 अक्तूबर को है, इसलिए अधिकांश जगहों पर 20 अक्तूबर को दिवाली मनाई जाएगी। लेकिन 21 अक्तूबर को भी उस अवधि में पूजा-स्नान आदि कुछ आचार-विधान मायने रखते हैं।

याद रखें — दिवाली सिर्फ प्रकाश का त्योहार नहीं, बल्कि –

  • अंधकार को परास्त करने का संदेश,
  • परिवार-मिलन का अवसर,
  • परंपराओं के प्रति आदर,
  • सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारी का प्रतीक भी है।

तो इस वर्ष की दिवाली में आप-हम मिलकर अपने घर-आँगन को दीपों से जगमग कर सकते हैं, पुरानी पुरानी यादों को सुखद बना सकते हैं, और नए-उत्साह के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं।

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Government All Schemes of India: स्वच्छ भारत से डिजिटल इंडिया तक जानें सभी योजनाओं की शुरुआत

Government All Schemes of India: भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह बेहद उपयोगी जानकारी है। अक्सर परीक्षाओं में सरकारी योजनाओं और अभियानों की शुरुआत से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। ऐसे में सिर्फ किताबों का ज्ञान ही नहीं, बल्कि देश की महत्वपूर्ण योजनाओं और अभियानों की जानकारी भी आपकी सफलता की कुंजी साबित हो सकती है।

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ये योजनाएं और मिशन सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये हमारे जीवन और समाज पर गहरा असर डालते हैं। स्वच्छता, बेटियों की शिक्षा, डिजिटल तकनीक, आवास, पेंशन और शहरी विकास जैसी पहलें हर भारतीय के जीवन से सीधे जुड़ी हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसी प्रमुख योजनाओं और उनके उद्देश्यों के बारे में विस्तार से।


Government All Schemes of India: स्वच्छ भारत मिशन (2 अक्टूबर 2014)

गांधी जयंती के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वाकांक्षी अभियान की शुरुआत की। इसका मुख्य उद्देश्य देश को गंदगी और खुले में शौच से मुक्त बनाना था। इस मिशन का मकसद सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं था, बल्कि लोगों में स्वच्छता को आदत के रूप में शामिल करना था।

Government All Schemes of India

स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव-गांव शौचालय बनाए गए, कचरा प्रबंधन पर ध्यान दिया गया और लोगों को स्वच्छता की अहमियत समझाई गई। इस अभियान ने देश के हर नागरिक को जिम्मेदारी का एहसास कराया और एक साफ-सुथरे भारत की ओर कदम बढ़ाए।


Government All Schemes of India: बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (22 जनवरी 2015)

यह अभियान समाज की सोच बदलने के लिए शुरू किया गया। देश में घटते लिंगानुपात और कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर समस्याओं को देखते हुए इसे लागू किया गया।

इस योजना का मकसद था—

  • बेटियों को जन्म से पहले और बाद में सुरक्षा देना।
  • लड़कियों को शिक्षा का पूरा अधिकार दिलाना।
  • समाज में बेटी के महत्व को बढ़ावा देना।

आज इस अभियान ने लाखों परिवारों की सोच बदली है और लड़कियों के लिए शिक्षा और सुरक्षा की राह आसान की है।


Government All Schemes of India: अटल पेंशन योजना (9 मई 2015)

अक्सर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोग बुढ़ापे के लिए आर्थिक सुरक्षा से वंचित रह जाते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अटल पेंशन योजना की शुरुआत की।

इस योजना के तहत कामगारों को रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन मिलती है। यह योजना खासकर गरीब और मजदूर वर्ग के लिए वरदान साबित हुई है। इससे उन्हें जीवन के अंतिम पड़ाव में आर्थिक चिंता से मुक्ति मिलती है।


Government All Schemes of India: डिजिटल इंडिया मिशन (1 जुलाई 2015)

आज के दौर में डिजिटल तकनीक हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। इस सोच को मजबूत करने के लिए सरकार ने डिजिटल इंडिया मिशन शुरू किया।

इसका मुख्य उद्देश्य था—

  • हर नागरिक तक इंटरनेट की सुविधा पहुंचाना।
  • सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करना।
  • युवाओं को डिजिटल साक्षर बनाना।

आज आधार कार्ड, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिलॉकर जैसी सुविधाएं इसी मिशन की देन हैं। डिजिटल इंडिया ने देश को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


Government All Schemes of India: स्मार्ट सिटी मिशन (25 जून 2015)

Government All Schemes of India

देश के शहरों को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने के लिए स्मार्ट सिटी मिशन शुरू किया गया। इसका मकसद था लोगों को बेहतर सुविधाएं देना जैसे—

  • स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट
  • बेहतर बिजली और पानी आपूर्ति
  • आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
  • ग्रीन और क्लीन वातावरण

इस मिशन के तहत चुने गए शहरों को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया ताकि लोग बेहतर जीवन जी सकें।


Government All Schemes of India: प्रधानमंत्री आवास योजना (20 नवंबर 2016)

Government All Schemes of India

“हर किसी का सपना – अपना घर” को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई। इसका लक्ष्य था 2022 तक हर भारतीय परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराना।

इस योजना के तहत गरीब और मध्यम वर्ग को सस्ती दरों पर घर दिए गए। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सब्सिडी का लाभ भी मिला। यह योजना करोड़ों परिवारों के लिए सपनों का आशियाना लेकर आई।


निष्कर्ष

इन सभी अभियानों और योजनाओं ने भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। चाहे स्वच्छता की आदत डालनी हो, बेटियों की शिक्षा सुनिश्चित करनी हो, या फिर हर नागरिक को डिजिटल सुविधा और आवास उपलब्ध कराना—इन पहलों ने हर भारतीय के जीवन को छुआ है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए इन योजनाओं की शुरुआत और उद्देश्य जानना बेहद जरूरी है। यह न केवल आपकी तैयारी को मजबूत बनाएगा बल्कि एक जागरूक नागरिक बनने में भी मदद करेगा।

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iPhone 17 Launch: भारत बना ग्लोबल हब ट्रंप की धमकियों का कोई असर नहीं


iPhone 17 Launch: भारत बना iPhone 17 का ग्लोबल हब

iPhone 17 के लॉन्च के साथ ही भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि अब वह केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तमाम चेतावनियों और धमकियों के बावजूद Apple ने भारत को अपना उत्पादन हब बनाने का फैसला पक्का कर दिया है।

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तमिलनाडु, कर्नाटक और अन्य राज्यों में Apple की उत्पादन इकाइयां दिन-रात काम कर रही हैं। फॉक्सकॉन, टाटा और पेगाट्रॉन जैसी कंपनियां मिलकर iPhone 17 सीरीज का बड़े पैमाने पर निर्माण कर रही हैं। खास बात यह है कि भारत में बने ये iPhone न केवल भारतीय बाजार की जरूरत पूरी कर रहे हैं बल्कि अमेरिका और यूरोप में भी भेजे जा रहे हैं।


iPhone 17 Launch: क्यों बढ़ा भारत में iPhone उत्पादन

भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुआ है। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ योजना, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, और निवेश को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों ने Apple जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित किया।

  • टाटा का नया होसुर प्लांट
  • बेंगलुरु एयरपोर्ट के पास फॉक्सकॉन का 300 एकड़ का हब
  • टाटा की विस्ट्रॉन यूनिट

ये सभी मिलकर iPhone 17 सीरीज के विभिन्न मॉडल तैयार कर रहे हैं। Pro मॉडल पेगाट्रॉन और फॉक्सकॉन में बन रहा है, जबकि बेस मॉडल टाटा की यूनिट्स में तैयार हो रहा है।


iPhone 17 Launch: अमेरिका और यूरोप में भारी डिमांड

भारत में बने iPhone अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं। 2025 की पहली छमाही में भारत से स्मार्टफोन एक्सपोर्ट 30% बढ़कर 40 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया, जिसमें सबसे ज्यादा योगदान iPhone का रहा।

  • 2024 में अमेरिका का योगदान: 30%
  • 2025 में बढ़कर हुआ: 54%
  • साल के अंत तक अनुमान: 60% से ज्यादा

यानी अमेरिका अब भारत से सबसे ज्यादा iPhone खरीदने वाला देश बन गया है।


iPhone 17 Launch: ग्लोबल लॉन्च में शामिल भारत

पहले जब चीन में iPhone बनते थे, तो केवल वहीं से लॉन्च के दिन पूरी दुनिया में सप्लाई होती थी। लेकिन अब भारत भी उसी कतार में शामिल हो गया है। iPhone 17 के लॉन्च के दिन ही भारत से बनी यूनिट्स अमेरिका और यूरोप के स्टोर्स तक पहुंच गईं।


iPhone 17 Launch: ट्रंप की धमकियां बेअसर

iPhone 17 Launch

डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा था कि अमेरिका में बिकने वाले iPhone अमेरिका में ही बनने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर भारत या किसी अन्य देश से बने iPhone अमेरिका में बेचे गए, तो उन पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा।

यह बयान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social और दोहा में हुए एक बिजनेस सम्मेलन में दिया था। उन्होंने यहां तक कहा:
“अगर आप भारत का ख्याल रखना चाहते हैं तो वहां बनाएं, लेकिन अमेरिका में बिकने वाले iPhone अमेरिका में ही बनने चाहिए।”

इसके बावजूद Apple ने अपना रुख नहीं बदला। कंपनी ने भारत में निवेश और उत्पादन जारी रखा और भारतीय अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि भारत उनकी सप्लाई चेन का स्थायी हिस्सा रहेगा।


iPhone 17 Launch: बेंगलुरु यूनिट बनी सबसे बड़ी फैक्ट्री

फॉक्सकॉन की बेंगलुरु यूनिट अब भारत की सबसे बड़ी iPhone फैक्ट्री बन चुकी है। यहां इतनी उत्पादन क्षमता है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक मांग के हिसाब से उत्पादन और बढ़ाया जा सके।

Apple अपने सप्लायर्स को भी भारत में ज्यादा से ज्यादा पार्ट्स बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन बढ़ सके।


iPhone 17 Launch: कीमतें और भारतीय बाजार

iPhone 17 Launch

iPhone 17 सीरीज की कीमतें पिछले मॉडल से अधिक रखी गई हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका बिक्री पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

  • भारत में लगभग 60-65% iPhone ईएमआई पर खरीदे जाते हैं।
  • बैंक ऑफर्स और ट्रेड-इन विकल्पों से उपभोक्ता इसे और भी किफायती मानते हैं।

यही कारण है कि लोग आसानी से नए मॉडल में अपग्रेड कर रहे हैं।


iPhone 17 Launch: iPhone 17 का पोर्टफोलियो

इस बार Apple का भारतीय पोर्टफोलियो अब तक का सबसे बड़ा है।

  • iPhone 17 सीरीज
  • पुराने मॉडल जैसे iPhone 14, 15 और 16
  • डिजाइन लवर्स के लिए नया iPhone Air
  • कैमरा शौकीनों के लिए Pro मॉडल

निष्कर्ष

भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह अब केवल दुनिया के लिए बाजार नहीं, बल्कि उत्पादन का भी केंद्र है। डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का कोई असर Apple पर नहीं पड़ा। इसके विपरीत, Apple ने भारत को अपनी ग्लोबल सप्लाई चेन का मुख्य हिस्सा बना लिया है।

iPhone 17 का लॉन्च भारत के लिए सिर्फ एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि एक आर्थिक उपलब्धि भी है। आने वाले समय में भारत से दुनिया भर में iPhone सप्लाई होना अब सामान्य बात होगी।

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Maruti cars at big discount: मारुति सुजुकी की Dzire और WagonR पर मिलेगा 1 लाख तक का फायदा 22 सितंबर से बदलेंगे जीएसटी रेट

Maruti cars at big discount: जीएसटी काउंसिल के हालिया फैसले के बाद कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका असर ऑटो इंडस्ट्री पर भी साफ दिखाई देगा।

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Maruti cars at big discount

Maruti cars at big discount: 22 सितंबर से बदलेगी गाड़ियों की कीमत

आगामी 22 सितंबर से कार और मोटरसाइकिलों की कीमतों में बदलाव होने वाला है। इस बदलाव का सीधा असर आम खरीदारों की जेब पर पड़ेगा।


Maruti cars at big discount: त्योहारी सीजन खरीदारों को फायदा

अगर आप इस त्योहार पर मारुति सुजुकी की डिजायर (Dzire) और वैगनआर (WagonR) खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए खास है।


Maruti cars at big discount: पीएम मोदी की घोषणा को मिली मंजूरी

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी ढांचे में बड़े बदलाव का ऐलान किया था। अब जीएसटी काउंसिल ने उसे मंजूरी दे दी है।


Maruti cars at big discount: नए जीएसटी स्लैब

Maruti cars at big discount
  • पहले चार जीएसटी स्लैब लागू थे।
  • अब सिर्फ दो स्लैब (5% और 18%) लागू होंगे।
  • सिन और लग्जरी प्रोडक्ट्स पर 40% जीएसटी लगेगा।

Maruti cars at big discount: मारुति कारों पर बड़ा असर

22 सितंबर के बाद जिन गाड़ियों पर 28% जीएसटी लगता था, अब उन पर केवल 18% जीएसटी लगेगा।
इससे मारुति सुजुकी की डिजायर और वैगनआर पर खरीदारों को 1 लाख रुपए तक की बचत हो सकती है।


Maruti cars at big discount: आम आदमी के लिए राहत

जीएसटी कटौती से कार खरीदना अब और आसान हो जाएगा। बजट में फिट बैठने वाली कारें ग्राहकों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई हैं।

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Nepal Protests Turn Violent: नेपाल एक बार फिर से भारी राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। राजधानी काठमांडू सहित कई प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारियों का आक्रोश तेज हो गया है। हाल ही में आई खबरों के अनुसार, नाराज प्रदर्शनकारियों ने नेपाली कांग्रेस के दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ की और बाहर पत्थरबाजी एवं आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। यह घटनाक्रम नेपाल की राजनीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े करता है।

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Nepal Protests Turn Violent: प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से सत्ता संघर्ष, सरकारों का बार-बार गिरना और जनता की अपेक्षाओं का अधूरा रह जाना लोगों के गुस्से को लगातार बढ़ा रहा है। हाल ही में हुई आर्थिक कठिनाइयों, बेरोजगारी और महंगाई की मार ने भी आम जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।
नेपाली कांग्रेस, जो देश की सबसे पुरानी और बड़ी राजनीतिक पार्टी मानी जाती है, इन विरोध प्रदर्शनों का मुख्य निशाना बन रही है। जनता का एक वर्ग मानता है कि कांग्रेस नेतृत्व ने उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया है और सत्ता के लिए केवल अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर ध्यान दिया है।

Nepal Protests Turn Violent

Nepal Protests Turn Violent: दफ्तर पर हमला और आगजनी

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह काठमांडू में स्थित नेपाली कांग्रेस के केंद्रीय दफ्तर के बाहर जमा हुआ। देखते ही देखते यह भीड़ उग्र हो गई और दफ्तर के अंदर घुस गई। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने पत्थरबाजी शुरू कर दी।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने बाहर खड़ी गाड़ियों और आसपास के इलाके में आगजनी कर दी। पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज भी किया। कई प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की खबर है।

Nepal Protests Turn Violent: जनता की नाराजगी के कारण

Nepal Protests Turn Violent
  1. आर्थिक संकट: नेपाल लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। महंगाई और बेरोजगारी ने आम लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है।
  2. राजनीतिक अस्थिरता: बार-बार बदलती सरकारें और सत्ता संघर्ष ने विकास कार्यों को ठप कर दिया है।
  3. भ्रष्टाचार के आरोप: जनता का एक बड़ा वर्ग मानता है कि नेता केवल अपनी जेब भरने में लगे हैं और जनहित की अनदेखी कर रहे हैं।
  4. युवाओं की हताशा: युवाओं को रोजगार और बेहतर भविष्य की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं, जिससे वे विरोध की राह पकड़ रहे हैं।

Nepal Protests Turn Violent: सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया

सरकार ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। प्रधानमंत्री ने अपील की है कि जनता शांति बनाए रखे और हिंसा से दूर रहे। वहीं, विपक्ष ने इसे सरकार की नाकामी बताया है और कहा है कि जनता का गुस्सा बिल्कुल जायज है।
नेपाली कांग्रेस ने अपने दफ्तर पर हुए हमले को लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस तरह की हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और इसे सख्ती से निपटा जाएगा।

Nepal Protests Turn Violent: आगे की राह

Nepal Protests Turn Violent

नेपाल के लिए यह समय बेहद नाजुक है। जनता का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है और अगर इसे समय रहते शांत नहीं किया गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि सरकार और सभी राजनीतिक दल मिलकर जनता की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान दें और ठोस समाधान निकालें।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल राजनीतिक स्थिरता, पारदर्शिता और ईमानदार नेतृत्व ही नेपाल को इस संकट से बाहर निकाल सकता है। अगर भ्रष्टाचार और सत्ता संघर्ष जारी रहा, तो देश को गंभीर अराजकता का सामना करना पड़ सकता है।

निष्कर्ष

नेपाल में भड़के विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस दफ्तर पर हमला केवल एक घटना नहीं है, बल्कि यह वहां के गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकट का आईना है। जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगी। यदि नेताओं ने इस बार भी जनता की आवाज को अनसुना किया, तो आने वाले दिनों में नेपाल और बड़े संकट में फंस सकता है।

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