Haryana Petrol Price Hike : देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर इजाफा किया गया है, जिसका सीधा असर हरियाणा के लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। राज्य में पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर महंगा होकर कई जिलों में ₹100 के पार पहुंच गया है, जबकि डीजल के दामों में 91 पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नई कीमतें शुक्रवार रात से लागू कर दी गई हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 23 May 2026
IBN24 News Network : लगातार बढ़ रही ईंधन कीमतों ने आम लोगों, किसानों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब तेल कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं।
कई जिलों में पेट्रोल ₹100 के पार
नई दरों के बाद हरियाणा के अधिकांश जिलों में पेट्रोल की कीमत ₹100 प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गई है। सिरसा में सबसे ज्यादा ₹101.73 प्रति लीटर रेट दर्ज किया गया है। वहीं करनाल और पानीपत ऐसे जिले हैं जहां कीमतें अभी भी ₹100 से नीचे बनी हुई हैं।
हरियाणा के प्रमुख शहरों में पेट्रोल के नए रेट
| शहर | पुराने रेट | नए रेट |
|---|---|---|
| पंचकूला | ₹100.15 | ₹101.06 |
| सिरसा | ₹100.81 | ₹101.73 |
| रोहतक | ₹99.54 | ₹100.40 |
| फतेहाबाद | ₹100.27 | ₹101.13 |
| सोनीपत | ₹99.23 | ₹101.10 |
| हिसार | ₹100.07 | ₹100.94 |
| करनाल | ₹98.79 | ₹99.65 |
| कैथल | ₹99.23 | ₹100.18 |
| पानीपत | ₹98.74 | ₹99.60 |
| कुरुक्षेत्र | ₹99.31 | ₹100.17 |
इसके अलावा आज जारी नई दरों के मुताबिक अंबाला में पेट्रोल ₹99.58 प्रति लीटर, भिवानी में ₹100.25, फरीदाबाद में ₹99.82, गुरुग्राम में ₹99.30 और झज्जर में ₹99.64 प्रति लीटर दर्ज किया गया। वहीं जींद में पेट्रोल ₹99.51, महेंद्रगढ़ में ₹99.40, मेवात में ₹99.61 और पलवल में ₹99.68 प्रति लीटर पहुंच गया है। रेवाड़ी में पेट्रोल ₹98.93 प्रति लीटर दर्ज किया गया। कई जिलों में कीमतें ₹100 के करीब पहुंचने से आम लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
9 शहर ऐसे हैं जहां पेट्रोल की कीमत ₹100 प्रति लीटर तक पहुंच गई
हरियाणा के दोनों रेट लिस्ट को मिलाकर कुल 19 शहरों के पेट्रोल दाम सामने आए हैं। इनमें से 9 शहर ऐसे हैं जहां पेट्रोल की कीमत ₹100 प्रति लीटर तक पहुंच गई है या उससे ऊपर चली गई है। इन शहरों में पंचकूला, सिरसा, रोहतक, फतेहाबाद, सोनीपत, हिसार, कैथल, कुरुक्षेत्र और भिवानी शामिल हैं। लगातार बढ़ती कीमतों के चलते राज्य के ज्यादातर जिलों में पेट्रोल अब ₹100 के करीब पहुंच चुका है, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है।

तेल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं।
कच्चे तेल की महंगाई का असर सीधे तेल कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में ईंधन और महंगा हो सकता है।
आम आदमी बोला- अब तेल कम डलवाना पड़ रहा
ईंधन कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से आम लोग परेशान दिखाई दे रहे हैं।
गांव माहरा के रहने वाले सुरेश ने कहा कि पेट्रोल पंप पर नया रेट सुनकर वह हैरान रह गए। उनका कहना है कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। पहले जितने पैसे में ज्यादा तेल मिल जाता था, अब उसी रकम में कम तेल मिल रहा है।
वहीं गांव डबरपुर के पूर्व सरपंच कुलदीप का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से किसान, मजदूर और आम आदमी का खर्च लगातार बढ़ रहा है। सरकार को महंगाई पर नियंत्रण के लिए गंभीर कदम उठाने चाहिए।
बुजुर्ग धर्मवीर ने भी कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि अब लोगों के सामने मजबूरी की स्थिति बनती जा रही है।
सिर्फ तेल नहीं, अब ये चीजें भी होंगी महंगी
पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में रोजमर्रा की कई चीजें महंगी हो सकती हैं। ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाले फल, सब्जियां और राशन महंगे हो सकते हैं।
खेती की लागत बढ़ेगी
डीजल महंगा होने से ट्रैक्टर और सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पंप सेट चलाना किसानों के लिए ज्यादा खर्चीला होगा। इससे फसलों की लागत बढ़ सकती है।
बस और ऑटो किराया बढ़ने की संभावना
सार्वजनिक परिवहन, स्कूल बस और ऑटो किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।
आखिर कैसे तय होते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम ?

भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर तेल की बेस कीमत तय होती है।
इसके बाद रिफाइनिंग लागत, तेल कंपनियों का मार्जिन, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकारों का VAT जुड़ने के बाद पेट्रोल और डीजल उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
हर राज्य में VAT अलग होने के कारण अलग-अलग शहरों में ईंधन के रेट भी अलग होते हैं।
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