Judicial Officer Honeytrap : हरियाणा की एक महिला ज्यूडिशियल ऑफिसर से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि ऑनलाइन डेटिंग ऐप टिंडर पर हुई एक दोस्ती प्रेम संबंध में बदली और बाद में कथित हनीट्रैप का रूप ले लिया।

Written by Kajal Panchal • Published on : 12 June 2026
IBN24 News Network : इस पूरे घटनाक्रम में महिला अधिकारी से 52 लाख रुपये से अधिक की ठगी हुई। मामला तब और विवादित हो गया जब अदालत में सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि शिकायत असली पीड़िता के बजाय उनकी हाउस हेल्प के नाम से दर्ज कराई गई थी।
टिंडर पर हुई मुलाकात, फिर शुरू हुई प्रेम कहानी
जानकारी के अनुसार महिला ज्यूडिशियल ऑफिसर ने टिंडर पर “Altruistic Joy” नाम से एक प्रोफाइल बनाई थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात दीपक वत्स नामक व्यक्ति से हुई। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे संबंध काफी करीब हो गए।

आरोप है कि दीपक वत्स ने महिला अधिकारी का विश्वास जीतने के बाद ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में मोटे मुनाफे का लालच दिया। इसके बाद अलग-अलग माध्यमों से उनसे कुल 52 लाख 81 हजार 999 रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
जब ठगी का एहसास हुआ तो बढ़ी बदनामी की चिंता
मामले का खुलासा होने के बाद महिला अधिकारी को अपनी सामाजिक और पेशेवर छवि की चिंता सताने लगी। आरोप है कि इसी कारण उन्होंने खुद शिकायतकर्ता बनने के बजाय अपनी घरेलू सहायिका (हाउस हेल्प) के नाम से पुलिस में FIR दर्ज करवाई।
जांच में सामने आया कि पूरे मामले में धनराशि महिला अधिकारी के खातों से ट्रांसफर हुई थी। इसके बावजूद शिकायत में हाउस हेल्प को पीड़ित बताया गया।
चपरासी से जमा कराए गए 5 लाख रुपये

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले में 5 लाख रुपये की नकद राशि हरियाणा के एक कोर्ट में कार्यरत चपरासी के जरिए जमा कराई गई थी। इस रकम को भी हाउस हेल्प की राशि बताया गया था। हालांकि जांच के दौरान कई तथ्यों ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए।
अदालत में खुली पोल
दिल्ली के पाटियाला हाउस कोर्ट में आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पूरा मामला सामने आया। एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने सुनवाई के दौरान कहा कि शिकायत भले ही हाउस हेल्प के नाम पर दर्ज की गई हो, लेकिन रिकॉर्ड और जांच से स्पष्ट है कि वास्तविक पीड़िता हरियाणा की एक महिला ज्यूडिशियल ऑफिसर हैं।
कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति का हनीट्रैप का शिकार होना व्यक्तिगत रूप से शर्मनाक और पेशेवर रूप से संवेदनशील स्थिति हो सकती है, लेकिन इस कारण किसी आपराधिक जांच की सच्चाई और निष्पक्षता से समझौता नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब न्याय देने की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी ही तथ्यों को छिपाने या बदलने की कोशिश करते हैं तो इससे न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
आरोपी की जमानत याचिका खारिज
अदालत ने आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट के अनुसार आरोपी ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया और अपने मोबाइल फोन का पासवर्ड भी साझा नहीं किया। जांच एजेंसियों को आरोपी के खातों में 52 लाख रुपये से अधिक की रकम मिलने के सबूत भी मिले हैं।
बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड पर फिर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया के जरिए होने वाली ठगी और हनीट्रैप घटनाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन संबंध में आर्थिक लेन-देन करने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद यह केस कानूनी और न्यायिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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