Haryana Horticulture Corruption FIR : हरियाणा बागवानी विभाग की विभिन्न सरकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जॉइंट डायरेक्टर डॉ. सुधीर यादव, तत्कालीन हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर (HDO) सोरन सिंह तथा अन्य कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 7 August 2026
IBN24 NEWS NETWORK : आरोप वर्ष 2007-08 से 2012-13 के दौरान यमुनानगर जिले में बागवानी योजनाओं के क्रियान्वयन में हुई कथित गड़बड़ियों से जुड़े हैं। इस मामले की जांच वर्ष 2013 में शुरू हुई थी और अंतिम जांच रिपोर्ट जुलाई 2025 में सरकार को सौंपे जाने के बाद अब कार्रवाई की गई है।
कौन हैं डॉ. सुधीर यादव ?

डॉ. सुधीर यादव वर्तमान में हरियाणा बागवानी विभाग में संयुक्त निदेशक (Joint Director) के पद पर कार्यरत हैं। जांच के दौरान वे यमुनानगर में जिला बागवानी अधिकारी (DHO) के रूप में कार्यरत थे। उनके साथ तत्कालीन HDO सोरन सिंह और विभाग के अन्य कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
जांच में क्या सामने आया ?
एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में कुल 26 आरोपों की पड़ताल की गई, जिनमें से यमुनानगर से जुड़े 5 प्रमुख आरोप सही पाए गए।
जांच में निम्नलिखित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है—
1. कागजों में बने आम और चीकू के बाग
- रजहेड़ी गांव में लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में आम और चीकू के बाग लगाने का रिकॉर्ड मिला।
- मौके पर निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्थानों पर 100% पौधे मृत पाए गए।
- एक किसान के खेत में रिकॉर्ड होने के बावजूद एक भी पौधा नहीं मिला।
- किसानों का आरोप है कि गड्ढे खोदने के लिए निर्धारित राशि से काफी कम भुगतान किया गया, जबकि रिकॉर्ड में पूरा भुगतान दर्शाया गया।
2. रिकॉर्ड और जमीन की हकीकत में बड़ा अंतर
गांव अलाहड़ में एक किसान के नाम पर 1 एकड़ बाग का रिकॉर्ड था, लेकिन मौके पर केवल 3 कनाल भूमि में 13 पौधे मिले।
इसी प्रकार कई किसानों को पुराने बागों के पुनर्जीवन के लिए सहायता राशि जारी दिखाई गई, लेकिन जांच में न तो निर्धारित क्षेत्र मिला और न ही पौधों की संख्या सही पाई गई।
जांच के अनुसार इससे सरकारी खजाने को करीब 16.50 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
3. वर्मी कंपोस्ट यूनिट सिर्फ रिकॉर्ड में

जैविक खेती योजना के तहत कई किसानों के नाम पर वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित दिखाए गए।
जांच में—
- कुछ स्थानों पर यूनिट बिल्कुल नहीं मिली।
- कहीं यूनिट आधी-अधूरी या खराब हालत में मिली।
ACB ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला माना है।
4. 6.30 लाख रुपये के बीज किसानों तक नहीं पहुंचे
शिवालिक डेवलपमेंट स्कीम के तहत विभिन्न फसलों के बीज खरीदने के लिए बजट स्वीकृत हुआ था।
जांच में आरोप है कि—
- लगभग 6.30 लाख रुपये मूल्य के सब्जियों के बीज किसानों को वितरित ही नहीं किए गए।
- बीज कार्यालय में पड़े-पड़े एक्सपायर हो गए।
- फूलों के बीज भी ऑफ-सीजन में वितरित किए गए।
5. घटिया बीज के 82 मामलों में कानूनी कार्रवाई नहीं
जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2007-08 से 2012-13 के बीच रोहतक, सिरसा, यमुनानगर, पानीपत, कुरुक्षेत्र, फतेहाबाद, रेवाड़ी और नारनौल में घटिया बीज के 82 मामले सामने आए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों ने इन मामलों में बीज अधिनियम के तहत अदालत में कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया, जिसे गंभीर लापरवाही माना गया।
13 साल बाद दर्ज हुई FIR
- 28 मार्च 2013: प्रारंभिक जांच शुरू।
- 18 जुलाई 2025: एंटी करप्शन ब्यूरो ने अंतिम रिपोर्ट सरकार को भेजी।
- 2026: सरकार से अनुमति मिलने के बाद FIR दर्ज की गई।
अब आगे क्या होगा ?
एंटी करप्शन ब्यूरो अब यह जांच करेगी कि—
- सरकारी योजनाओं की राशि किस स्तर पर स्वीकृत और जारी हुई।
- रिकॉर्ड में दिखाए गए कार्य वास्तव में हुए या नहीं।
- खरीद और वितरण प्रक्रिया में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही।
- घटिया बीज के मामलों में कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
जांच के आधार पर आगे संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
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