Fuel Saving Work From Home Policy : वैश्विक परिस्थितियों और ईंधन बचत की जरूरतों को देखते हुए देश के कई राज्यों में प्रशासनिक कार्यशैली में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में सरकार ने सरकारी दफ्तरों के लिए नया निर्देश जारी करते हुए 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू कर दी है।

प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद देशभर में प्रशासनिक स्तर पर बदलाव तेज, कई राज्य सरकारी कामकाज में हाइब्रिड मॉडल और ईंधन बचत के उपायों को दे रहे प्राथमिकता
Written by Kajal Panchal • Published on : 14 May 2026
IBN24 News Network : नई व्यवस्था के तहत अब ग्रुप C और ग्रुप D श्रेणी के केवल आधे कर्मचारी ही प्रतिदिन कार्यालय में उपस्थित रहेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी घर से अपने कार्यों का संचालन करेंगे। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य दफ्तरों में भीड़ कम करना और संसाधनों के साथ ईंधन की बचत को बढ़ावा देना है।
केंद्र की अपील के बाद राज्यों में तेजी से बदलाव
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में देशवासियों से ईंधन के सीमित उपयोग और संसाधनों की बचत की अपील की थी। इसके बाद कई राज्यों ने अपने स्तर पर प्रशासनिक और परिवहन व्यवस्था में बदलाव शुरू कर दिए हैं।

इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने लखनऊ में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को वर्क फ्रॉम होम संस्कृति को बढ़ावा देने और सरकारी वाहनों के काफिले को सीमित करने के निर्देश दिए।
अन्य राज्यों में भी तैयार हो रहा ‘हाइब्रिड मॉडल’
उत्तराखंड सरकार भी इस दिशा में कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व वाली सरकार निजी क्षेत्रों में वर्क फ्रॉम होम लागू करने पर विचार कर रही है। साथ ही सरकारी विभागों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल मीटिंग्स को प्राथमिकता दी जा रही है।

सरकार की योजना के तहत—
- मंत्रियों और अधिकारियों के काफिले में वाहनों की संख्या कम करने पर जोर
- सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने की तैयारी
- सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने की रणनीति
केंद्र की स्थिति स्पष्ट: अनिवार्य नीति नहीं
इस बीच सरकारी सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कंपनी या IT सेक्टर के लिए वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य करने की कोई नीति फिलहाल प्रस्तावित नहीं है। हालांकि राज्यों को अपने स्तर पर आवश्यक कदम उठाने की छूट दी गई है।
बदलाव की ओर बढ़ता प्रशासनिक ढांचा
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में यह कदम केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली को डिजिटल और लचीला बनाने की दिशा में भी एक बड़ा बदलाव है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही…
क्या यह अस्थायी व्यवस्था आने वाले समय में देशभर में स्थायी “हाइब्रिड वर्क कल्चर” का रूप ले लेगी?
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