CBSE Big Change 2026 : स्कूल शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026-27 सत्र से 9वीं और 10वीं कक्षा के लिए तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने का ऐलान किया है। नई व्यवस्था के तहत अब छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी।

Written by Kajal Panchal • Published on : 16 May 2026
IBN24 News Network : CBSE ने साफ किया है कि विदेशी भाषाएं जैसे फ्रेंच, जर्मन या अन्य भाषाएं अब भारतीय भाषाओं की जगह नहीं ले सकेंगी। इन्हें केवल तीसरी (R3) या अतिरिक्त चौथी भाषा के विकल्प के तौर पर ही पढ़ा जा सकेगा।
- क्या बदलेगा तीन-भाषा मॉडल में ?
नई व्यवस्था में भाषाओं को R1, R2 और R3 श्रेणियों में बांटा गया है। R1 छात्र की प्राथमिक भाषा होगी, R2 दूसरी और R3 तीसरी भाषा। नियम के मुताबिक, इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होना जरूरी होगा।
CBSE का मानना है कि इस बदलाव से छात्रों की भाषाई समझ मजबूत होगी और भारतीय भाषाओं से उनका जुड़ाव और गहरा होगा।
- विदेशी भाषा पर क्या नियम रहेगा ?

यदि कोई छात्र विदेशी भाषा चुनना चाहता है, तो उसे पहले दो स्थानों पर भारतीय भाषाएं रखनी होंगी। तभी वह विदेशी भाषा को तीसरी भाषा (R3) के रूप में चुन सकेगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो विदेशी भाषा को केवल अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही पढ़ा जाएगा।
- R3 के लिए 6वीं की किताबें होंगी आधार
फिलहाल 9वीं के लिए R3 की नई किताबें तैयार नहीं हैं। ऐसे में CBSE ने अस्थायी रूप से 2026-27 सत्र की कक्षा 6वीं की R3 पुस्तकों को पढ़ाई का आधार बनाने का फैसला लिया है।
इसके साथ ही स्कूलों को यह भी छूट दी गई है कि वे स्थानीय कहानियां, कविताएं और क्षेत्रीय साहित्य को पाठ्यक्रम में शामिल कर सकें।
सीबीएसई और एनसीईआरटी मिलकर 19 भारतीय भाषाओं—जैसे असमिया, बंगाली, मराठी, तमिल, तेलुगु, पंजाबी और अन्य—में पाठ्य सामग्री विकसित कर रहे हैं।
- शिक्षकों की चुनौती पर क्या होगा ?
कई स्कूलों में भाषा शिक्षकों की कमी को देखते हुए बोर्ड ने वैकल्पिक व्यवस्था भी सुझाई है। इसके तहत अन्य विषयों के शिक्षकों को भाषा का कार्यात्मक ज्ञान होने पर लगाया जा सकता है। साथ ही क्लस्टर मॉडल, ऑनलाइन क्लास और रिटायर्ड शिक्षकों की मदद लेने की भी अनुमति दी गई है।
- 10वीं बोर्ड परीक्षा में क्या होगा ?

सबसे अहम बात यह है कि R3 भाषा की कोई अलग बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक (internal assessment) के जरिए किया जाएगा। हालांकि इसका रिकॉर्ड सीबीएसई सर्टिफिकेट में दर्ज होगा।
साथ ही बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को केवल R3 भाषा के कारण 10वीं बोर्ड परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा।
स्कूलों को देना होगा डेटा, जुलाई से लागु होगा नियम
CBSE ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 30 जून 2026 तक ओएसिस पोर्टल पर अपनी R3 भाषा की जानकारी अपडेट करें। बोर्ड का कहना है कि यह बदलाव छात्रों पर बोझ डालने के लिए नहीं, बल्कि बहुभाषिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। नियम जुलाई से लागु होने की बात की गयी है।
अब बड़ा सवाल यही है…
क्या यह नया तीन-भाषा फॉर्मूला छात्रों के लिए सीखने के नए अवसर खोलेगा या स्कूलों के सामने संसाधन और शिक्षक उपलब्धता की नई चुनौती खड़ी करेगा ?
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