Schedule H1 medicines India : केंद्र सरकार ने अल्कोहल युक्त दवाओं की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली ओरल (मुंह से ली जाने वाली) दवाएं बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदी जा सकेंगी। सरकार ने ऐसी दवाओं को Schedule H1 श्रेणी में शामिल कर दिया है, जिससे इनकी बिक्री और खरीद पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

Written by Kajal Panchal • Published on : 10 July 2026
IBN24 News Network : इस फैसले का सबसे अधिक असर उन कफ सिरप, टॉनिक और अन्य ओरल दवाओं पर पड़ेगा जिनमें 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल मौजूद है। पहले कई ऐसी दवाएं मेडिकल स्टोर से केवल नाम बताकर आसानी से खरीदी जा सकती थीं, लेकिन अब डॉक्टर का पर्चा अनिवार्य होगा।
किन दवाओं पर लागू होगा नया नियम ?
सरकार के नए नियम के अनुसार, 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली सभी ओरल दवाएं, जो 30 मिलीलीटर से अधिक की बोतल या पैक में बेची जाती हैं, अब Schedule H1 के तहत आएंगी। ऐसी दवाओं की बिक्री केवल वैध डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही की जा सकेगी।

क्या है Schedule H1 ?
Schedule H1 भारत के ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत बनाई गई एक विशेष श्रेणी है। इसमें ऐसी दवाएं शामिल होती हैं जिनका दुरुपयोग होने की संभावना अधिक होती है या जिनकी बिक्री पर विशेष निगरानी आवश्यक होती है।

इस श्रेणी में शामिल दवाओं के लिए:
- बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिक्री नहीं की जा सकती।
- मेडिकल स्टोर संचालकों को हर बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।
- डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की कॉपी निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखनी होगी।
- नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
क्यों लिया गया यह फैसला ?

सरकार का उद्देश्य अल्कोहल युक्त दवाओं के गलत इस्तेमाल और दुरुपयोग पर रोक लगाना है। पिछले कुछ वर्षों में कफ सिरप और अन्य अल्कोहल युक्त दवाओं के गैर-चिकित्सीय उपयोग के कई मामले सामने आए हैं। नए नियम से ऐसी दवाओं की बिक्री अधिक नियंत्रित होगी और मरीजों को इन्हें केवल चिकित्सकीय सलाह पर ही उपलब्ध कराया जाएगा।
आम लोगों पर क्या होगा असर ?
इस बदलाव के बाद यदि किसी व्यक्ति को 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली कफ सिरप या अन्य ओरल दवा खरीदनी है, तो उसे पहले डॉक्टर से परामर्श लेकर प्रिस्क्रिप्शन लेना होगा। वहीं मेडिकल स्टोर संचालकों को भी बिक्री संबंधी रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।
सरकार का मानना है कि यह कदम दवाओं के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देगा तथा अल्कोहल युक्त दवाओं के दुरुपयोग को रोकने में मदद करेगा।
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