Haryana IVF Verdict : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक अहम फैसले ने IVF और मातृत्व को लेकर देशभर में नई बहस छेड़ दी है। अदालत ने साफ कहा है कि यदि किसी महिला का स्वास्थ्य ठीक है, तो केवल उम्र के आधार पर उसे मां बनने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए भी IVF के जरिए मां बनने का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 28 May 2026
IBN24 News Network : यह मामला हरियाणा के हिसार की 51 वर्षीय महिला से जुड़ा है। महिला ने 2022 में एक IVF सेंटर से संपर्क किया था, जिसके बाद उनका इलाज शुरू हुआ। प्रेग्नेंसी के दौरान जांच में पता चला कि महिला की कोख में दो भ्रूण हैं, हालांकि उनमें से एक सुरक्षित नहीं रह सका। इसके बाद सितंबर 2023 में महिला ने एक बेटी को जन्म दिया।
बेटी के जन्म के बाद महिला ने दोबारा मां बनने की इच्छा जताई और फिर से IVF सेंटर का रुख किया। लेकिन इस बार डॉक्टरों ने उनकी उम्र का हवाला देते हुए इलाज करने से इनकार कर दिया। उस समय महिला की उम्र 51 वर्ष हो चुकी थी। IVF नियमों के मुताबिक 50 साल से अधिक उम्र की महिलाएं इस तकनीक का लाभ नहीं ले सकती थीं। इसके बाद महिला ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
कोर्ट में क्या दलील दी गई ?
महिला की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि 51 साल की उम्र होने के बावजूद महिला पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें किसी प्रकार की शारीरिक समस्या नहीं है। उन्होंने अदालत में यह भी कहा कि केवल उम्र के आधार पर किसी महिला को मातृत्व के अधिकार से वंचित करना गलत है।
महिला की ओर से “सरबजीत कौर बनाम पंजाब राज्य” मामले का हवाला भी दिया गया, जिसमें प्रजनन अधिकारों को महत्वपूर्ण माना गया था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा ?
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने महिला की याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने IVF सेंटर को उपचार शुरू करने की अनुमति देते हुए कहा कि “मां बनना कभी अनैतिक नहीं हो सकता।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि महिला चिकित्सकीय रूप से फिट है, तो सिर्फ उम्र को आधार बनाकर उसे IVF उपचार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने दंपति को संबंधित अथॉरिटी के सामने एक शपथ पत्र जमा कराने का निर्देश भी दिया।
फैसले के बाद क्यों बढ़ी चर्चा ?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद IVF से जुड़े मौजूदा नियमों और महिलाओं के प्रजनन अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या आने वाले समय में IVF की आयु सीमा में बदलाव हो सकता है।
वर्तमान नियमों के अनुसार महिलाओं के लिए IVF की आयु सीमा 21 से 50 वर्ष तय है, जबकि पुरुष 21 से 55 वर्ष की उम्र तक IVF उपचार ले सकते हैं। वहीं एग डोनर की आयु 23 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
हरियाणा में क्यों खास है यह फैसला ?
हरियाणा में यह फैसला सामाजिक और भावनात्मक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में कई ऐसे परिवार हैं जिन्होंने हादसे या बीमारी में अपने इकलौते बच्चे को खो दिया। वहीं सीमा पर शहीद हुए जवानों के माता-पिता भी ढलती उम्र में अकेले रह जाते हैं। ऐसे परिवारों के लिए यह फैसला नई उम्मीद बन सकता है।
70 साल की महिला बनी थीं मां
हरियाणा पहले भी अधिक उम्र में मातृत्व को लेकर चर्चा में रह चुका है। वर्ष 2008 में हिसार की 70 वर्षीय राजो देवी ने IVF तकनीक के जरिए बच्चे को जन्म देकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। हालांकि इसके बाद IVF और सरोगेसी से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए और महिलाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा तय कर दी गई।
विशेषज्ञों की क्या राय ?
फर्टिलिटी विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र में गर्भधारण के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। ऐसे मामलों में महिला की मेडिकल जांच और फिटनेस बेहद जरूरी होती है। हालांकि आधुनिक तकनीक और बेहतर इलाज के कारण अब अधिक उम्र में भी मातृत्व संभव हो पा रहा है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का यह फैसला केवल एक महिला को राहत देने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे महिलाओं के प्रजनन अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े बड़े फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
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