CJI Cockroach Remark Controversy : देश की सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को हुई एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी ने नई बहस छेड़ दी। एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए CJI ने कथित तौर पर कहा कि “कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं।” कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक चर्चा तेज हो गई है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 12 May 2026
IBN24 News Network : मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच कर रही थी। याचिकाकर्ता एक वकील था, जिसने खुद को सीनियर एडवोकेट घोषित किए जाने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान बेंच ने वकील के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि समाज में पहले से ही “पैरासाइट” यानी परजीवी मौजूद हैं, जो सिस्टम पर लगातार हमला करते हैं।
“हर कोई सीनियर बनने योग्य हो सकता है, लेकिन आप नहीं”
सुनवाई के दौरान बेंच ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा मांगकर नहीं लिया जाता, बल्कि यह सम्मान योग्यता और पेशेवर आचरण के आधार पर दिया जाता है। बेंच ने टिप्पणी की कि “दुनिया में हर कोई सीनियर बनने के योग्य हो सकता है, लेकिन आप इसके हकदार नहीं हैं।”

कोर्ट ने यहां तक कहा कि यदि दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें सीनियर एडवोकेट बना भी दिया, तो सुप्रीम कोर्ट उनके व्यवहार को देखते हुए उस फैसले को रद्द कर सकता है। बेंच ने सवाल उठाया कि क्या याचिकाकर्ता के पास कोई और मुकदमा नहीं है और क्या यह किसी जिम्मेदार वकील का आचरण माना जा सकता है।
डिग्रियों की जांच कराने तक की बात
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने वकीलों की डिग्रियों की सत्यता पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भविष्य में CBI से कई वकीलों की डिग्री की जांच कराने पर विचार कर सकता है, क्योंकि कई मामलों में उनकी योग्यता को लेकर गंभीर संदेह पैदा हुए हैं।
बेंच ने यह भी कहा कि Bar Council of India इस मुद्दे पर शायद कार्रवाई नहीं करेगा, क्योंकि उसे वोट बैंक की चिंता रहती है। कोर्ट की इस टिप्पणी को लेकर भी कानूनी हलकों में बहस तेज हो गई है।
आखिर में मांगी माफी, वापस ली याचिका
सख्त टिप्पणियों और फटकार के बाद याचिकाकर्ता ने कोर्ट से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी और मामले का निपटारा कर दिया।
जयपुर में भी दिया था बड़ा बयान

इससे पहले अप्रैल के आखिरी सप्ताह में CJI सूर्यकांत जयपुर पहुंचे थे। यहां आयोजित एक कानूनी कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि पूर्व जज देश की अमूल्य धरोहर हैं और उनके अनुभव व न्यायिक विवेक का इस्तेमाल ADR, लोक अदालतों और कानूनी जागरूकता अभियानों में किया जाना चाहिए।
निजी जिंदगी का किस्सा भी सुनाया
इसी दौरान शुक्रवार को एक अन्य मामले की सुनवाई में CJI सूर्यकांत ने अपने करियर का एक दिलचस्प अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में एक जज ने उन्हें डांटते हुए चैंबर से बाहर निकल जाने तक को कह दिया था। यह किस्सा उन्होंने ज्यूडिशियल सर्विस से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुनाया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि अदालत की कार्यवाही के दौरान की गई ऐसी टिप्पणियां क्या न्यायपालिका की सख्त कार्यशैली का हिस्सा मानी जाएंगी या फिर इससे बेरोजगार युवाओं और एक्टिविस्ट्स को लेकर गलत संदेश जाएगा?
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