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ToggleTamil Nadu Election 2026 में Thalapathy Vijay का ‘हिट शो’ लेकिन क्लाइमैक्स अभी बाकी, जानिए क्या-क्या हो सकते हैं सरकार बनाने के विकल्प
IBN24 News Network (Kajal Panchal)
शुरुआत में ही ट्विस्ट : जीत भी, कमी भी
तमिलनाडु की राजनीति में इस बार जो हुआ, वो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। थलापति विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया, लेकिन बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 पार नहीं कर पाई। यानी जनता ने दिल खोलकर वोट तो दिया, लेकिन पूरी चाबी अभी अपने पास ही रखी।
यही वजह है कि जना नायकन कहलाने वाले विजय अब सत्ता के दरवाजे पर खड़े हैं लेकिन दरवाजा खोलने के लिए उन्हें किसी और की चाबी चाहिए।

इस चुनाव का सबसे बड़ा संदेश यही है कि दशकों से चली आ रही DMK और AIADMK की राजनीति को इस बार सबसे बड़ा झटका लगा है। TVK ने दोनों पार्टियों के गढ़ में सेंध लगाई और वोटरों को नया विकल्प दिया लेकिन दिलचस्प बात ये है कि किला पूरी तरह ढहा नहीं। AIADMK अभी भी मजबूत नंबर के साथ दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है, जबकि DMK ने भी अपनी मौजूदगी बचाए रखी है।
अब क्या करेंगे विजय? हीरो से “किंगमेकर” तक
फिल्मों में विजय अक्सर अकेले ही पूरी लड़ाई जीत लेते हैं, लेकिन राजनीति की कहानी अलग है। यहां 108 सीटें जीतने के बाद भी उन्हें सोलो हीरो से कोएलिशन आर्किटेक्ट बनना पड़ेगा।

अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है किसके साथ हाथ मिलाया जाए? क्योंकि अगला कदम ही तय करेगा कि ये जीत इतिहास बनेगी या अधूरी कहानी रह जाएगी।
छोटा सहयोग, बड़ा सिरदर्द?
पहला विकल्प है छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाना। कांग्रेस, PMK, CPI और VCK जैसे दल मिलकर विजय को बहुमत तक पहुंचा सकते हैं।
लेकिन यहां एक खतरा भी है छोटे दलों की बड़ी मांगें। मंत्री पद, नीतियों में दखल और सत्ता में हिस्सेदारी जैसे मुद्दे विजय के फास्ट और रिजल्ट बेस्ड गवर्नेंस मॉडल को धीमा कर सकते हैं।
AIADMK के साथ हाथ मिलाना-सबसे मजबूत दांव
दूसरा और सबसे चर्चित विकल्प है AIADMK के साथ गठबंधन। अगर ऐसा होता है तो सरकार पूरी तरह स्थिर हो सकती है और 160 से ज्यादा सीटों का मजबूत आंकड़ा बन सकता है।
लेकिन यहां राजनीति का सबसे बड़ा ट्विस्ट छिपा है – BJP फैक्टर। विजय की छवि सेक्युलर और सोशल जस्टिस वाली रही है, ऐसे में AIADMK के पुराने समीकरण इस गठबंधन को मुश्किल बना सकते हैं।
DMK के साथ हाथ? कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट
तीसरा विकल्प सबसे दिलचस्प है : DMK और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाना।

विजय ने पूरे चुनाव में DMK को अपना नंबर-1 दुश्मन बताया, ऐसे में उनके साथ गठबंधन करना उनके वोटर्स के लिए बड़ा झटका हो सकता है। लेकिन भारतीय राजनीति में “कभी नहीं” जैसा शब्द अक्सर टिकता नहीं और यही इस कहानी को और रोमांचक बनाता है।
यें 10 सीटें बदल सकती थीं पूरी कहानी
इस चुनाव में TVK की सबसे बड़ी कमी वही 10 सीटें रहीं, जहां जीत बहुत करीब आकर छूट गई। आसान भाषा में समझें तो ये वो सीटें हैं, जहां थोड़ा सा और वोट मिल जाता तो आज विजय को किसी के सहारे की जरूरत नहीं पड़ती।
सबसे पहले बात तिरुक्कोयिलूर की, यहां सिर्फ 285 वोटों से हार हुई। इतना कम अंतर बताता है कि आखिरी समय तक मुकाबला बराबरी का था, लेकिन स्थानीय नेटवर्क और आखिरी दौर की वोटिंग AIADMK के पक्ष में चली गई।
- पलानी में 693 वोटों का अंतर रहा। यहां TVK ने मजबूत चुनौती दी, लेकिन पारंपरिक वोट बैंक AIADMK के साथ बना रहा, जिससे जीत हाथ से निकल गई।
- ऊटी (उधगमंडलम) में 976 वोटों से हार हुई। यह एक त्रिकोणीय मुकाबला था, जहां वोट बंट गए और इसका फायदा BJP उम्मीदवार को मिला।
- पापनासम में 1,065 वोटों का अंतर रहा। यहां IUML का मजबूत ग्राउंड नेटवर्क और गठबंधन का असर TVK पर भारी पड़ा।
- डिंडीगुल में 1,131 वोटों से हार हुई, जहां DMK के अनुभवी नेता को स्थानीय पकड़ और संगठन का फायदा मिला।
- किल्लीयूर में 1,311 वोटों का अंतर रहा। यहां कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक TVK के लिए दीवार बन गया।
- थिरुमयम में 1,492 वोटों से हार हुई, जहां ग्रामीण इलाकों में DMK की पकड़ और बूथ मैनेजमेंट निर्णायक साबित हुआ।
- पुडुकोट्टई में 1,867 वोटों का अंतर रहा। यहां अंत तक कांटे की टक्कर रही, लेकिन DMK के संगठित वोट बैंक ने बाजी मार ली।
- यरकौड में 2,189 वोटों से हार हुई। यह आदिवासी क्षेत्र है, जहां AIADMK का स्थानीय प्रभाव ज्यादा मजबूत साबित हुआ।
- और आखिर में तिरुत्तनी, जहां 5,793 वोटों से हार हुई। यहां मुकाबला थोड़ा बड़ा अंतर से रहा, लेकिन यह भी उन सीटों में शामिल रही, जहां TVK ने अपेक्षा से ज्यादा मजबूत प्रदर्शन किया।
इन सभी सीटों को देखें तो एक बात साफ है TVK हारी जरूर, लेकिन हर जगह कड़ी टक्कर दी। कारण भी लगभग एक जैसे रहे: कहीं मजबूत लोकल नेटवर्क, कहीं गठबंधन का असर, तो कहीं वोटों का बंटवारा। अगर इन 10 सीटों में से आधी भी TVK जीत जाती, तो आज तस्वीर पूरी तरह अलग होती और विजय बिना किसी गठबंधन के मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में होते।
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