UPI Payment Alert : देश में डिजिटल पेमेंट को लेकर दुकानदारों और छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा देने वाली कंपनियों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मर्चेंट्स की Re-KYC के लिए तय 15 सितंबर की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 7 September 2026
IBN24 NEWS NETWORK : पेमेंट कंपनियों का कहना है कि देशभर में बड़ी संख्या में छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे ऑनलाइन कारोबारियों का वेरिफिकेशन अभी पूरा नहीं हो पाया है। अगर तय समयसीमा में Re-KYC पूरी नहीं हुई और RBI ने डेडलाइन नहीं बढ़ाई, तो ऐसे मर्चेंट अकाउंट पर अस्थायी रोक लग सकती है। इसका असर रोजमर्रा की खरीदारी पर भी दिखाई दे सकता है। कुछ दुकानों, ठेलों या छोटे कारोबारियों के यहां UPI या अन्य डिजिटल पेमेंट से पैसे भेजने में परेशानी आ सकती है।
मामला क्या है ?
पेटीएम और फोनपे जैसी पेमेंट कंपनियां देशभर में लाखों दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा देती हैं। इन कारोबारियों के पास QR कोड, साउंड बॉक्स और दूसरे डिजिटल पेमेंट सिस्टम लगे हैं।

पेमेंट इंडस्ट्री का कहना है कि बड़ी संख्या में मर्चेंट्स का वेरिफिकेशन अभी बाकी है। ऐसे में 15 सितंबर की डेडलाइन तक पूरी प्रक्रिया खत्म करना कंपनियों के लिए मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से इंडस्ट्री RBI से अतिरिक्त समय देने की मांग कर रही है।
डेडलाइन नहीं बढ़ी तो क्या होगा ?
अगर Re-KYC की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होती है, तो संबंधित मर्चेंट अकाउंट पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है। ऐसे में दुकानदार के QR कोड के जरिए पेमेंट स्वीकार करने में परेशानी आ सकती है। कुछ मामलों में ग्राहक UPI या कार्ड के जरिए भुगतान करने की कोशिश करेंगे, लेकिन ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो पाएगा।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में UPI बंद हो जाएगा। इसका असर मुख्य रूप से उन मर्चेंट्स पर पड़ने की आशंका है जिनकी जरूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई है।
करीब 10 लाख छोटे ऑनलाइन कारोबारियों पर असर की आशंका
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Re-KYC पूरी नहीं होने की स्थिति में लगभग 10 लाख छोटे ऑनलाइन बिजनेसेज प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा QR कोड के जरिए पेमेंट लेने वाले करीब 30 से 35 फीसदी छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

इनमें छोटे किराना दुकानदार, स्ट्रीट वेंडर्स और ऐसे कारोबारी शामिल हैं, जो मुख्य रूप से डिजिटल पेमेंट के लिए QR कोड का इस्तेमाल करते हैं।
छोटे दुकानदारों का वेरिफिकेशन क्यों मुश्किल ?
छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में पेमेंट कंपनियों के QR कोड और साउंड बॉक्स बड़ी संख्या में लगे हुए हैं। इनमें कई ऐसे छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता हैं, जिनके दस्तावेज पूरी तरह अपडेट नहीं हैं।
इसके अलावा कई कारोबारियों का स्थायी दुकान का पता भी नहीं होता। ऐसे में मौके पर जाकर उनका फिजिकल वेरिफिकेशन करना कंपनियों के लिए चुनौती बन रहा है। सख्त KYC नियमों के तहत पेमेंट कंपनियों को जरूरी दस्तावेज और कारोबारी जानकारी का सत्यापन करना होता है।
Re-KYC क्या है ?
KYC यानी Know Your Customer। इसके तहत ग्राहक या मर्चेंट की पहचान और अन्य जरूरी जानकारी का सत्यापन किया जाता है। Re-KYC इसी जानकारी को समय-समय पर दोबारा अपडेट और वेरिफाई करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पेमेंट सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली पहचान और कारोबारी जानकारी सही और अपडेट रहे।

Re-KYC के जरिए फर्जी अकाउंट, धोखाधड़ी और गलत तरीके से होने वाले वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाने में मदद मिलती है।
RBI ने कब जारी किए थे नए नियम ?
पेमेंट कंपनियों के मुताबिक, RBI ने सितंबर 2025 में मर्चेंट्स के वेरिफिकेशन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे। कंपनियों और मर्चेंट्स को Re-KYC प्रक्रिया पूरी करने के लिए लगभग एक साल का समय मिला।
अब 15 सितंबर की समयसीमा नजदीक आने के साथ बड़ी संख्या में लंबित वेरिफिकेशन कंपनियों के लिए चुनौती बन गए हैं। पेमेंट इंडस्ट्री का कहना है कि प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है।
कंपनियों को कर्मचारियों की भी कमी पड़ रही
Re-KYC प्रक्रिया में एक बड़ी चुनौती फिजिकल वेरिफिकेशन को लेकर है। नियमों के मुताबिक, दुकान या कारोबारी के स्थान पर जाकर वेरिफिकेशन पेमेंट कंपनी के अपने कर्मचारी द्वारा किया जाना जरूरी है।
कंपनियों ने इसके लिए नए कर्मचारियों की भर्ती भी की है, लेकिन मर्चेंट्स की संख्या काफी ज्यादा होने के कारण मौजूदा स्टाफ के लिए समयसीमा के भीतर सभी का वेरिफिकेशन पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
क्या 15 सितंबर तक पूरा हो पाएगा Re-KYC ?
पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक, तय समयसीमा तक पूरी प्रक्रिया पूरी होने की संभावना कम है। कंपनियों का अनुमान है कि 15 सितंबर तक करीब 80 फीसदी Re-KYC प्रक्रिया पूरी हो सकती है, जबकि बाकी करीब 20 फीसदी मर्चेंट्स के वेरिफिकेशन के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत पड़ सकती है।
इसी वजह से कंपनियां RBI से डेडलाइन बढ़ाने की अपील कर रही हैं।
क्या पूरे देश में UPI पेमेंट बंद हो जाएगा ?
ऐसा नहीं है। Re-KYC की वजह से पूरे देश में UPI सिस्टम बंद होने की बात सही नहीं होगी। संभावित असर मुख्य रूप से उन मर्चेंट अकाउंट पर पड़ सकता है जिनकी जरूरी KYC या Re-KYC प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई है।
कुल डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है, क्योंकि छोटे कारोबारियों की संख्या बड़ी होने के बावजूद कुल डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन में उनकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। हालांकि, छोटे दुकानदारों और ग्राहकों की रोजमर्रा की खरीदारी पर इसका असर जरूर पड़ सकता है।
Payment Aggregator क्या होता है ?

Payment Aggregator यानी PA ऐसी संस्था या सर्विस है जो दुकानदारों और ई-कॉमर्स कारोबारियों को ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा देती है।
इसके जरिए ग्राहक UPI, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और दूसरे डिजिटल माध्यमों से भुगतान कर सकते हैं। पेमेंट एग्रीगेटर ग्राहक से पेमेंट लेकर उसे संबंधित मर्चेंट तक पहुंचाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
RBI से कंपनियों को क्या उम्मीद ?
पेमेंट इंडस्ट्री को उम्मीद है कि RBI जमीनी स्तर की समस्याओं को देखते हुए Re-KYC की समयसीमा बढ़ा सकता है। कंपनियों का कहना है कि अतिरिक्त समय मिलने से छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों का वेरिफिकेशन पूरा किया जा सकेगा और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में अचानक किसी तरह की रुकावट से बचा जा सकेगा।
फिलहाल निगाहें RBI के अगले फैसले पर हैं। अगर डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाती है, तो 15 सितंबर के बाद उन मर्चेंट्स के डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर असर पड़ सकता है जिनकी Re-KYC प्रक्रिया लंबित है।
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