Sugar Export Ban in India : देश में लगातार बढ़ती चीनी की कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है। बुधवार रात जारी आदेश के बाद अब सामान्य परिस्थितियों में विदेशों को चीनी भेजने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार का मानना है कि इससे घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने और भविष्य में संभावित कमी से निपटने में मदद मिलेगी।
Written by Kajal Panchal • Published on : 14 May 2026
IBN24 News Network : भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। ऐसे में भारत के इस फैसले का असर केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक शुगर मार्केट पर भी दिखाई देगा। फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची और सफेद चीनी के दामों में तेजी दर्ज की गई है।
क्यों लिया गया निर्यात रोकने का फैसला ?
सरकार को आशंका है कि आने वाले सीजन में चीनी उत्पादन उम्मीद से कम रह सकता है। मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञों ने अल नीनो के असर के कारण कमजोर मानसून की संभावना जताई है। अगर बारिश कम होती है तो गन्ने की फसल प्रभावित हो सकती है, जिससे चीनी उत्पादन में गिरावट आ सकती है।
इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव और उर्वरकों की संभावित कमी को भी सरकार गंभीरता से देख रही है। सरकार नहीं चाहती कि भविष्य में घरेलू बाजार में चीनी की कमी हो और कीमतें अचानक बेकाबू हो जाएं।
देश में कितना है चीनी का स्टॉक ?

सरकारी अनुमान के मुताबिक 2025-26 सीजन में देश में लगभग 275 लाख टन चीनी उत्पादन होने की संभावना है। पुराने स्टॉक के 50 लाख टन को जोड़ने पर कुल उपलब्धता करीब 325 लाख टन रहेगी। वहीं घरेलू खपत लगभग 280 लाख टन रहने का अनुमान है।
इस हिसाब से सीजन के अंत तक केवल 45 लाख टन स्टॉक बच सकता है, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम स्तर माना जा रहा है। इसी कम बफर स्टॉक को देखते हुए सरकार ने एहतियाती कदम उठाया है।
किन मामलों में मिलेगी छूट ?
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने साफ किया है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में निर्यात जारी रह सकेगा।
- यूरोपीय संघ और अमेरिका को तय ‘तरजीही कोटा’ के तहत चीनी भेजी जा सकेगी।
- जिन शिपमेंट की लोडिंग 13 मई से पहले शुरू हो चुकी थी, उन्हें अनुमति मिलेगी।
- जिन मालों को पहले ही कस्टम विभाग को सौंपा जा चुका है, वे भी निर्यात किए जा सकेंगे।
- जरूरत पड़ने पर भारत सरकार अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों के लिए विशेष अनुमति दे सकती है।
व्यापारियों और बाजार पर क्या असर पड़ेगा ?
सरकार ने फरवरी में अतिरिक्त निर्यात कोटा जारी किया था, जिसके बाद कई व्यापारियों ने बड़े निर्यात सौदे किए थे। अब अचानक लगी रोक के कारण व्यापारियों के सामने उन ऑर्डर्स को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
भारत के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हलचल बढ़ गई। न्यूयॉर्क में रॉ शुगर फ्यूचर्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जबकि लंदन व्हाइट शुगर बाजार में करीब 3 प्रतिशत उछाल देखने को मिला।
क्या आम लोगों को मिलेगा फायदा ?
सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है। यदि निर्यात जारी रहता और उत्पादन घटता, तो आने वाले महीनों में शक्कर की कीमतों में और तेज बढ़ोतरी हो सकती थी।
अब सबकी नजर मानसून और गन्ना उत्पादन पर टिकी है। अगर बारिश सामान्य रहती है तो बाजार में राहत मिल सकती है, लेकिन कमजोर मानसून की स्थिति में सरकार आगे और सख्त फैसले भी ले सकती है।
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