Premanand Maharaj Appeal : वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों और शिष्यों के लिए एक भावुक संदेश जारी किया है। स्वास्थ्य खराब होने के बीच उन्होंने भक्तों से चिंता न करने और भगवान श्रीजी के ध्यान एवं नाम जप में लगे रहने की अपील की। उनका यह वीडियो संदेश सोशल मीडिया और भक्तों के बीच तेजी से वायरल हो रहा है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 25 May 2026
IBN24 News Network : करीब 1 मिनट 19 सेकेंड का यह वीडियो रविवार को केली कुंज आश्रम ट्रस्ट के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर साझा किया गया। वीडियो में प्रेमानंद महाराज ने बेहद शांत और भावुक स्वर में कहा कि भक्तों को उनकी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपने आध्यात्मिक जीवन और भजन में मन लगाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चाहे वे भक्तों से मिलें या न मिलें, बात करें या न करें, उनका प्रेम हमेशा अपने अनुयायियों के साथ रहेगा। महाराज ने भरोसा दिलाया कि उनके गुरु और उनकी सीख हमेशा भक्तों के मन में बनी रहेगी।
“नाम जप करते रहो, सब मंगल होगा”

प्रेमानंद महाराज ने अपने संदेश में भक्तों को अधिक से अधिक नाम जप और भजन करने की सलाह दी। महाराज ने कहा कि भय, चिंता और दुख छोड़कर भगवान का स्मरण करना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि फिलहाल वे एकांतवास में हैं और जब उचित समय होगा, तब स्वयं भक्तों से संवाद करेंगे।
स्वास्थ्य खराब होने के कारण बंद हुई पदयात्रा
प्रेमानंद महाराज पिछले 17 मई से अपनी प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा पर नहीं निकल रहे हैं। बताया गया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है, जिसके चलते उन्होंने एकांतिक मुलाकात और वार्तालाप भी बंद कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक महाराज की दोनों किडनी प्रभावित हैं और उन्हें सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है। स्वास्थ्य कारणों से चिकित्सकों ने उन्हें आराम की सलाह दी है।
17 मई की रात बड़ी संख्या में भक्त महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन रोजाना तड़के निकलने वाली पदयात्रा स्थगित कर दी गई। आश्रम की ओर से शिष्यों ने लाउडस्पीकर पर इसकी जानकारी दी और भक्तों से भीड़ न लगाने का अनुरोध किया।
हालांकि कुछ दिन पहले प्रेमानंद महाराज को वराह घाट स्थित अपने गुरु संत गोविंद शरण महाराज के आश्रम जाते हुए देखा गया था।
हजारों भक्तों की आस्था का केंद्र

सामान्य दिनों में करीब 20 हजार श्रद्धालु उनके दर्शन करने पहुंचते थे, जबकि सप्ताहांत और बड़े धार्मिक आयोजनों में यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती थी।
कैसे बने राधावल्लभी संत ?
प्रेमानंद महाराज का आध्यात्मिक जीवन भी बेहद रोचक माना जाता है। शुरुआती समय में वे संन्यासी जीवन में थे, लेकिन वृंदावन आने के बाद उनका झुकाव राधावल्लभ परंपरा की ओर बढ़ा।
बताया जाता है कि वृंदावन परिक्रमा के दौरान उन्होंने एक सखी द्वारा गाया गया श्लोक सुना, जिसने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। उसी घटना के बाद वे राधावल्लभ संप्रदाय से जुड़ गए और धीरे-धीरे राधावल्लभी संत के रूप में प्रसिद्ध हो गए।
आज प्रेमानंद महाराज देशभर के लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का बड़ा नाम बन चुके हैं।
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