NEET 2026 Rajasthan to Bihar Connection : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा को रद्द कर दिया है। एजेंसी ने कहा कि केंद्र सरकार की मंजूरी और जांच एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर यह फैसला लिया गया। अब परीक्षा दोबारा कराई जाएगी और नई तारीखों की घोषणा जल्द होगी।

NEET 2026 में 60 लाख की ‘सीट डील’ का खुलासा : MBBS स्टूडेंट चला रहा था सॉल्वर गैंग, इसलिए रद्द हुई पूरी परीक्षा
बिहार से राजस्थान तक फैले संदिग्ध नेटवर्क, हाथ से लिखे सवालों और सॉल्वर गैंग के खुलासे के बाद NTA ने लिया बड़ा फैसला, अब CBI करेगी जांच
Written by Kajal Panchal • Published on : 12 May 2026
IBN24 News Network : इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा बिहार से हुआ, जहां परीक्षा से ठीक पहले सक्रिय सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ। जांच में सामने आया कि मेडिकल सीट दिलाने के नाम पर 50 से 60 लाख रुपये तक की डील की जा रही थी। इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड एक MBBS छात्र निकला, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर परीक्षा में असली अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठाने की तैयारी कर रखी थी।
चेकिंग के दौरान खुला पूरा खेल
2 मई की रात नालंदा जिले की पावापुरी थाना पुलिस वाहन जांच कर रही थी। इसी दौरान दो लग्जरी गाड़ियां पुलिस को देखकर भागने लगीं। पीछा कर पुलिस ने दोनों वाहनों को रोक लिया। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई।
पकड़े गए लोगों में विम्स मेडिकल कॉलेज का सेकेंड ईयर MBBS छात्र अवधेश कुमार भी शामिल था।

पुलिस ने जब मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें NEET समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, अभ्यर्थियों से चैट और पैसों के लेन-देन से जुड़े दस्तावेज मिले। यहीं से पूरे नेटवर्क का खुलासा शुरू हुआ।
60 लाख में तय होती थी मेडिकल सीट
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह अभ्यर्थियों से 50 से 60 लाख रुपये तक वसूलता था। शुरुआत में 1.5 से 2 लाख रुपये एडवांस लिए जाते थे। इसके बाद परीक्षा केंद्र पर असली उम्मीदवार की जगह दूसरे व्यक्ति को बैठाने की तैयारी होती थी।
पुलिस ने पहले तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें अवधेश कुमार, अमन कुमार सिंह और पंकज कुमार साह शामिल थे। पूछताछ में पता चला कि गिरोह का मुख्य संचालक उज्जवल उर्फ राजा बाबू है, जो पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र बताया जा रहा है। फिलहाल वह फरार है।
कई जिलों में छापेमारी, 7 आरोपी जेल भेजे गए
मामले के सामने आने के बाद नालंदा पुलिस ने मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद, जमुई समेत कई जिलों में छापेमारी की। जांच के दौरान चार और लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें एक डॉक्टर का बेटा भी शामिल है।
पुलिस का दावा है कि यह केवल एक राज्य तक सीमित नेटवर्क नहीं था, बल्कि कई जिलों और परीक्षा केंद्रों तक इसकी पहुंच थी। गिरफ्तार सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य फरार लोगों की तलाश जारी है।
राजस्थान में ‘हाथ से लिखे सवाल’ बने बड़ा सुराग
इसी बीच राजस्थान में भी जांच एजेंसियों को ऐसे हाथ से लिखे प्रश्न मिले, जिनके कई सवाल असली NEET पेपर से मेल खा रहे थे। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने देहरादून, सीकर और झुंझुनू में कार्रवाई करते हुए 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया।

जांच में सामने आया कि परीक्षा से दो दिन पहले छात्रों तक एक कथित ‘गेस पेपर’ पहुंचा था। इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के सैकड़ों सवाल थे। शुरुआती जांच में दावा किया गया कि इनमें से बड़ी संख्या में प्रश्न असली परीक्षा में आए।
एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह केवल गेस पेपर था या संगठित तरीके से पेपर लीक किया गया था। सोशल मीडिया चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच की जा रही है।
CBI करेगी पूरे मामले की जांच
केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का फैसला लिया है। NTA ने कहा है कि एजेंसी जांच में पूरा सहयोग करेगी और सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाएंगे।
NTA के अनुसार, 8 मई से ही मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई थी। जांच रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो चुके हैं, इसलिए परीक्षा रद्द करना जरूरी हो गया।
छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं करना होगा
NTA ने स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों को नया आवेदन नहीं करना पड़ेगा। पहले से निर्धारित परीक्षा केंद्रों में भी बदलाव नहीं होगा। हालांकि री-एग्जाम के लिए नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। एजेंसी ने परीक्षा शुल्क वापस करने की भी घोषणा की है।
2024 जैसा विवाद फिर सामने
NEET परीक्षा को लेकर विवाद पहली बार नहीं हुआ है। 2024 में भी पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगे थे। उस समय बिहार और झारखंड में जांच के बाद कई गिरफ्तारियां हुई थीं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द नहीं की थी और केवल कुछ केंद्रों पर दोबारा परीक्षा कराई गई थी।
अब लगातार दूसरे बड़े विवाद ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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