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Punjab AAP Minister Sanjeev Arora Arrested : 157 करोड़ के फर्जी एक्सपोर्ट का आरोप, ED ने दिल्ली ले जाकर शुरू की बड़ी पूछताछ… क्या अब खुलेंगे विदेशी नेटवर्क ?

Punjab AAP Minister Sanjeev Arora Arrested
Punjab AAP Minister Sanjeev Arora Arrested

चंडीगढ़ से गुरुग्राम तक ED की बड़ी रेड, 157 करोड़ के फर्जी एक्सपोर्ट और UAE के जरिए राउंड-ट्रिपिंग का आरोप; बैंक खाते, डीमैट होल्डिंग्स और करोड़ों की संपत्तियां अटैच, पूछताछ में कई बड़े खुलासों के संकेत

Punjab AAP Minister Sanjeev Arora Arrested

IBN24 News Network
Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026

Punjab AAP Minister Sanjeev Arora Arrested : पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को शनिवार को बड़ा झटका लगा, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के मंत्री Sanjeev Arora को मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी एक्सपोर्ट से जुड़े मामले में गिरफ्तार कर लिया। सुबह चंडीगढ़ में उनके सरकारी आवास पर शुरू हुई ED की कार्रवाई करीब 10 घंटे तक चली पूछताछ के बाद गिरफ्तारी में बदल गई। शाम करीब 5 बजे ED की टीम उन्हें चंडीगढ़ से दिल्ली लेकर रवाना हो गई, जहां अब उनसे आगे की पूछताछ की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद उनकी रात ED लॉकअप में बितेगी और एजेंसी आने वाले दिनों में उन्हें अदालत में पेश कर सकती है।

चंडीगढ़, दिल्ली और गुरुग्राम में एक साथ रेड

ED ने शनिवार सुबह चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित सरकारी कोठी के अलावा दिल्ली और गुरुग्राम के कुल 5 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी का दावा है कि संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़ी कंपनियों ने मोबाइल खरीद-बिक्री के नाम पर करीब 157.12 करोड़ रुपए का फर्जी कारोबार दिखाया।

Punjab AAP Minister Sanjeev Arora Arrested

जांच में सामने आया कि शेल कंपनियों के जरिए फर्जी एक्सपोर्ट तैयार किए गए और विदेशों से पैसों की “राउंड-ट्रिपिंग” की गई। ED का आरोप है कि दुबई से भारत में अवैध रकम वापस लाने के लिए इन्हीं फर्जी निर्यात दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

फर्जी GST बिलों से करोड़ों का फायदा

जांच एजेंसी के अनुसार, दिल्ली की कई गैर-मौजूद कंपनियों से फर्जी GST खरीद बिल हासिल किए गए। इन बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), GST रिफंड और ड्यूटी ड्रॉबैक का लाभ लिया गया। ED का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया जबकि निजी तौर पर करोड़ों रुपए का फायदा कमाया गया।

ED के जाल में कैसे फंसे अरोड़ा?

ED सूत्रों के मुताबिक, यह मामला हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं की जांच के दौरान सामने आया। एजेंसी ने कंपनी और संजीव अरोड़ा से जुड़े बैंक खातों, डीमैट होल्डिंग्स और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह अटैचमेंट 19 अप्रैल को FEMA Act 1999 की धारा 37(3) और आयकर अधिनियम की धारा 132(9B) के तहत जारी आदेशों के बाद की गई। जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए 180 दिनों के लिए ये संपत्तियां जब्त की गई हैं।

Punjab AAP Minister Sanjeev Arora Arrested

UAE की दो कंपनियों पर ED की नजर

ED के मुताबिक, 157.12 करोड़ रुपए के कथित फर्जी एक्सपोर्ट में से करीब 102.50 करोड़ रुपए के लेन-देन UAE स्थित दो कंपनियों — मेसर्स फोर्टबेल टेलीकॉम FZCO और मेसर्स ड्रैगन ग्लोबल FZCO — के जरिए किए गए।

जांच एजेंसी का दावा है कि फोर्टबेल टेलीकॉम FZCO का संबंध भारत की फोर्टबेल गैजेट्स प्राइवेट लिमिटेड से है, जिसके मालिक हेमंत सूद और चंद्र शेखर बताए जा रहे हैं। इसी आधार पर एजेंसी को विदेशी कंपनियों के जरिए फंड की “राउंड-ट्रिपिंग” का संदेह हुआ। ED ने इसे FEMA की धारा 7 और FEMA Export Regulations 2015 के संभावित उल्लंघन का मामला माना है।

किन संपत्तियों पर हुई कार्रवाई?

जांच एजेंसी द्वारा जिन संपत्तियों को अटैच किया गया है, उनमें हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के कई बैंक खाते, काव्या अरोड़ा के डीमैट खाते, म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स और लुधियाना, मोहाली व गुरुग्राम में स्थित कई अचल संपत्तियां शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, अब ED विदेशी लेन-देन, कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड और जुड़े लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।

गिरफ्तारी के बाद सियासी हमला तेज

मंत्री की गिरफ्तारी के बाद पंजाब की राजनीति भी गरमा गई है। Arvind Kejriwal ने केंद्र सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और कहा कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं Bhagwant Mann ने दावा किया कि ED रेड का मकसद भ्रष्टाचार पकड़ना नहीं बल्कि नेताओं पर राजनीतिक दबाव बनाना है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली में होने वाली पूछताछ के दौरान क्या ED इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और बड़े नामों तक पहुंच पाएगी?

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IMD Weather Alert 2026 : देशभर में मौसम का डबल अटैक अलर्ट जारी, 9 से 15 मई तक आंधी-तूफान, बारिश और लू का कहर, जानिए आपके क्षेत्र में कैसा रहेगा मौसम का हाल

IMD Weather Alert 2026
IMD Weather Alert 2026

IMD Weather Alert 2026 : IMD ने 9 से 15 मई 2026 तक देशभर में उत्तर से दक्षिण भारत तक तेज आंधी, बारिश, बिजली गिरने और लू का खतरा बढ़ गया है।

IMD Weather Alert 2026

IBN24 News Network
Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026

IMD Weather Alert 2026 : देशभर में मई के महीने में मौसम ने इस बार पूरी तरह अप्रत्याशित करवट ले ली है। जहां एक तरफ कई राज्यों में तेज आंधी, भारी बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं देखने को मिल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी और लू ने फिर से दस्तक दे दी है।

IMD Weather Alert 2026

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 9 मई से 15 मई 2026 तक देश के बड़े हिस्सों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है।

मौसम का अस्थिर दौर 9 मई से 15 मई तक सक्रिय

मौसम विभाग के अनुसार यह पूरा सिस्टम 9 मई 2026 से सक्रिय हो चुका है और 15 मई तक अलग-अलग राज्यों में इसका असर देखने को मिलेगा। इस दौरान मौसम बार-बार बदलता रहेगा—कहीं बारिश, कहीं आंधी और कहीं तापमान में तेजी से बदलाव दर्ज किया जाएगा। IMD ने साफ किया है कि 11 से 14 मई के बीच उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम सबसे ज्यादा खराब रहेगा। इस दौरान कई राज्यों में तेज हवाओं के साथ तूफान जैसी स्थिति बन सकती है। इस अवधि में 40 से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने, गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं की आशंका जताई गई है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि का भी खतरा है।

किसानों पर सबसे ज्यादा असर की आशंका

इस बदले मौसम का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ सकता है। कई राज्यों में फसल कटाई का काम अंतिम चरण में है, ऐसे में अचानक आने वाली आंधी और बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। गेहूं और सब्जियों की तैयार फसल गिरने, खेतों में पानी भरने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

दिल्ली-NCR में मौसम का मिला-जुला असर

दिल्ली-NCR में फिलहाल मौसम कुछ राहत भरा बना हुआ है। हल्की हवाएं और बादलों की आवाजाही से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि 10 मई के बाद यहां भी आंधी और बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है।

यूपी में आंधी-बारिश का डबल अलर्ट

उत्तर प्रदेश में मौसम तेजी से बदल रहा है। कई जिलों में तेज हवाएं और बारिश का दौर जारी है। पूर्वी यूपी में बिजली गिरने और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है।

IMD Weather Alert 2026

मौसम विभाग के अनुसार 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है।

बिहार में तूफान का खतरा, 70 KM/H तक हवाएं

बिहार में स्थिति और गंभीर बताई जा रही है। पटना, गया, भागलपुर समेत कई जिलों में 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चल सकती हैं। तेज बारिश की भी चेतावनी जारी की गई है। ग्रामीण इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

झारखंड में आंधी और बारिश का असर

झारखंड के कई जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट है। रांची, बोकारो और हजारीबाग में मौसम खराब रहने की संभावना है। बिजली गिरने और पेड़ गिरने जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ गया है, जिससे प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।

राजस्थान में फिर लौटी भीषण गर्मी

राजस्थान में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। जैसलमेर, बाड़मेर और फलोदी जैसे इलाकों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। लू का असर फिर से तेज हो गया है, हालांकि कुछ जिलों में हल्की बारिश की संभावना भी बनी हुई है।

मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में बदला मौसम

मध्य प्रदेश में कई जिलों में तेज बारिश और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। भोपाल और इंदौर में तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया जा रहा है।

IMD Weather Alert 2026

पंजाब में 11 मई तक येलो अलर्ट जारी है। हरियाणा में 10 और 11 मई को मौसम अचानक बदल सकता है और आंधी-बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।

पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और भूस्खलन का खतरा

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में मौसम फिर से बिगड़ने की संभावना है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और ओलावृष्टि हो सकती है। चमोली, शिमला, कुल्लू और मंडी जैसे क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भारी बारिश का अलर्ट

पूर्वोत्तर भारत में असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण भारत में तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण भारी बारिश की संभावना है। तटीय इलाकों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।


मौसम का ‘डबल सिस्टम’ अलर्ट, सतर्कता जरूरी

देशभर में इस समय मौसम का डबल असर देखने को मिल रहा है-कहीं तेज आंधी और बारिश, तो कहीं भीषण गर्मी और लू। IMD की चेतावनी साफ संकेत देती है कि आने वाले कुछ दिन बेहद संवेदनशील हैं। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने, अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम अपडेट पर नजर रखने की जरूरत है।

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Suvendu Adhikari Becomes Bengal Chief Minister : 15 साल बाद बदला बंगाल का सत्ता समीकरण, आखिर शपथ समारोह में ऐसा क्या हुआ कि पीएम मोदी ने छुए 97 वर्षीय नेता के पैर

Suvendu Adhikari Becomes Bengal Chief Minister
Suvendu Adhikari Becomes Bengal Chief Minister

Suvendu Adhikari Becomes Bengal Chief Minister कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुए भव्य समारोह ने सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं दिखाया, बल्कि मंच पर घटे एक अनपेक्षित भावनात्मक क्षण ने पूरे राजनीतिक माहौल को अचानक शांत और चर्चा का केंद्र बना दिया।

Suvendu Adhikari Becomes Bengal Chief Minister

IBN24 News Network
Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026

Suvendu Adhikari Becomes Bengal Chief Minister : पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब भाजपा नेता Suvendu Adhikari ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कोलकाता के ऐतिहासिक Brigade Parade Ground में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल R. N. Ravi ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही बंगाल में 15 वर्षों से जारी तृणमूल कांग्रेस शासन का अंत हो गया और पहली बार भाजपा ने राज्य की सत्ता पर कब्जा कर लिया।

यह शपथ ग्रहण समारोह बंगाली कैलेंडर के अनुसार गुरुदेव Rabindranath Tagore की जयंती के दिन आयोजित किया गया, जिससे कार्यक्रम को सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर खास महत्व मिला।

प्रधानमंत्री मोदी समेत कई बड़े नेता पहुंचे

Suvendu Adhikari Becomes Bengal Chief Minister

समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath और दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta समेत भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूरे ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भाजपा समर्थकों की भारी भीड़ दिखाई दी, जिसे पार्टी ने नए बंगाल की शुरुआत बताया।

भवानीपुर से ममता को हराकर बने सबसे बड़े चेहरे

राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि Suvendu Adhikari ने चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को भवानीपुर सीट से हराया। कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे शुभेंदु अधिकारी ने ही अब उनके 15 साल पुराने राजनीतिक किले को ढहा दिया।

नंदीग्राम आंदोलन से उभरे शुभेंदु अधिकारी को लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस का मजबूत संगठनकर्ता माना जाता था। लेकिन 2019 के बाद पार्टी नेतृत्व से मतभेद बढ़े और उन्होंने 2021 में भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद वे बंगाल में भाजपा के सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे।

सामूहिक नेतृत्व से सरकार चलाने का दावा

शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने कहा कि उनकी सरकार सामूहिक नेतृत्व के सिद्धांत पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि सभी बड़े फैसले मंत्रिमंडल और सहयोगियों के साथ मिलकर लिए जाएंगे।

Suvendu Adhikari Becomes Bengal Chief Minister

उनके साथ Dilip Ghosh, Agnimitra Paul, Nisith Pramanik, Khudiram Tudu और Ashok Kirtania ने भी मंत्री पद की शपथ ली।

कैसे बनी भाजपा की सरकार ?

8 मई को गृह मंत्री Amit Shah कोलकाता पहुंचे थे, जहां भाजपा विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी को नेता चुना गया। इसके बाद उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर समर्थन पत्र सौंपा और सरकार बनाने का दावा पेश किया। चुनाव परिणामों में भाजपा ने 207 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत हासिल किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। यह परिणाम बंगाल की राजनीति में सबसे बड़े सत्ता परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।

शपथ ग्रहण में दिखा भावुक पल, पीएम मोदी ने छुए 97 वर्षीय नेता के पैर

शपथ ग्रहण समारोह का सबसे भावुक और चर्चित क्षण तब आया जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 97 वर्षीय भाजपा नेता Makhan Lal Sarkar को गले लगाया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

Suvendu Adhikari Becomes Bengal Chief Minister

माखन लाल सरकार भाजपा के शुरुआती दौर के नेताओं में माने जाते हैं और वे जनसंघ के संस्थापक Syama Prasad Mookerjee के करीबी सहयोगी रहे हैं। बंगाल भाजपा अध्यक्ष Samik Bhattacharya ने बताया कि माखन लाल सरकार डॉ. मुखर्जी की कश्मीर यात्रा के साथी थे और 1952 में तिरंगा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार भी हुए थे।

उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस शासन के दौरान देशभक्ति गीत गाने पर माखन लाल सरकार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अदालत में जब उनसे माफी मांगने को कहा गया तो उन्होंने इनकार कर दिया और वही गीत दोबारा गाकर सुनाया। बाद में अदालत ने पुलिस को उन्हें सम्मानपूर्वक घर भेजने का निर्देश दिया था।

भाजपा के लिए प्रतीकात्मक जीत क्यों ?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की यह जीत सिर्फ एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि वैचारिक और संगठनात्मक विस्तार का संकेत भी है। जिस राज्य में लंबे समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा, वहां भाजपा का सत्ता तक पहुंचना राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या Suvendu Adhikari बंगाल की राजनीतिक संस्कृति को नई दिशा दे पाएंगे या राज्य में टकराव की राजनीति और तेज होगी? आने वाले महीनों में इसकी तस्वीर और साफ हो जाएगी।

please also read this article : Previous article : TVK vs DMK-AIADMK : 107 विधायकों के इस्तीफे की चेतावनी, DMK-AIADMK पर सरकार गठन को लेकर मिलीभगत का आरोप… आपको क्या लगता है बदल जाएगी सत्ता की तस्वीर ?

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Vijay Government Majority Crisis : तमिलनाडु में CM बनने से ठीक पहले अटक गए Vijay ! बहुमत से बस दो कदम दूर, आखिर कौन रोक रहा है सत्ता का रास्ता… क्या विजय ले पाएंगे शपथ ?

Vijay Government Majority Crisis
Vijay Government Majority Crisis
Vijay Government Majority Crisis
Vijay Government Majority Crisis : तमिलनाडु की राजनीति इस समय किसी फिल्मी क्लाइमैक्स से कम नहीं दिख रही। फर्क सिर्फ इतना है कि इस कहानी का हीरो सच में फिल्मों से राजनीति में आया है—और अब मुख्यमंत्री की कुर्सी से बस दो कदम दूर खड़ा है। लेकिन सवाल ये है कि जब लगभग पूरा मंच तैयार था, समर्थक जश्न मनाने लगे थे और चेन्नई में शपथ ग्रहण की चर्चा तेज हो चुकी थी, तब आखिर ऐसा क्या हुआ कि पूरी कहानी अचानक रुक गई?

IBN24 News Network
Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026

तमिलनाडु में इस वक्त हर राजनीतिक चर्चा सिर्फ एक नाम के आसपास घूम रही है-Vijay। चुनाव में धमाकेदार प्रदर्शन करने वाली उनकी पार्टी TVK सत्ता के दरवाजे तक पहुंच चुकी है, लेकिन दरवाजा अब भी पूरी तरह खुला नहीं है। शुक्रवार शाम विजय जब राज्यपाल से मिलने पहुंचे, तब माहौल लगभग तय माना जा रहा था। TVK कार्यकर्ताओं को भरोसा था कि अगली सुबह उनका नेता मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा। सोशल मीडिया पर CM Vijay ट्रेंड करने लगा था। चेन्नई के राजनीतिक गलियारों में हलचल इतनी थी कि कई जगह संभावित कैबिनेट चेहरों तक की चर्चा शुरू हो चुकी थी। लेकिन देर रात तक जो नहीं आया, उसने पूरा खेल रोक दिया-समर्थन का औपचारिक पत्र।

विजय ने TVK, कांग्रेस, CPI और CPI(M) के कुल 116 विधायकों का समर्थन राज्यपाल को सौंपा। मगर बहुमत का आंकड़ा 118 है। यानी सत्ता की कुर्सी और विजय के बीच सिर्फ दो विधायक खड़े हैं।

Vijay Government Majority Crisis

अब पूरा तमिलनाडु दो छोटे दलों-VCK और IUML-की तरफ देख रहा है। दोनों के पास 2-2 विधायक हैं। राजनीतिक गणित कहता है कि अगर इनमें से कोई एक भी पूरी तरह साथ आ जाए, तो विजय मुख्यमंत्री बन सकते हैं। सबसे ज्यादा हैरानी VCK के रुख ने पैदा की। पार्टी प्रमुख Thol. Thirumavalavan ने सुबह खुले मंच से कहा कि उनकी पार्टी TVK का समर्थन करेगी। इस बयान के बाद माना जाने लगा कि मामला खत्म हो चुका है और सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है।

लेकिन जैसे-जैसे रात बढ़ी, राजनीतिक माहौल बदलता गया। राज्यपाल कार्यालय तक समर्थन का आधिकारिक पत्र नहीं पहुंचा। यही वह पल था, जहां तमिलनाडु की राजनीति में सस्पेंस ने एंट्री मारी। सवाल उठने लगे—क्या आखिरी वक्त में कोई नई डील चल रही है? क्या समर्थन के बदले बड़ी शर्तें रखी गई हैं? या फिर कोई ऐसा राजनीतिक दबाव है, जो खुलकर सामने नहीं आ रहा ?

क्या पर्दे के पीछे बन रहा है नया समीकरण ?

Vijay Government Majority Crisis

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ समर्थन पत्र की देरी नहीं है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस वक्त चेन्नई में “साइलेंट नेगोशिएशन” चल रही है। यानी बाहर से सब शांत दिख रहा है, लेकिन अंदर सत्ता को लेकर तेजी से बातचीत हो रही है।

माना जा रहा है कि सहयोगी दल सरकार में अपनी हिस्सेदारी और मंत्रालयों को लेकर अंतिम समय तक रणनीति बना रहे हैं। कुछ सूत्रों का दावा है कि विपक्ष भी लगातार सक्रिय है और नहीं चाहता कि विजय इतनी आसानी से सत्ता तक पहुंच जाएं। यही कारण है कि जिस सरकार को शुक्रवार शाम तक लगभग तय माना जा रहा था, वह रात होते-होते फिर अनिश्चितता में चली गई।

राज्यपाल ने साफ कर दिया रुख

सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने साफ कहा है कि जब तक 118 विधायकों का स्पष्ट समर्थन नहीं दिखाया जाता, तब तक सरकार गठन का निमंत्रण नहीं दिया जा सकता। यही वजह है कि विजय लगातार तीसरी बार दावा पेश करने के बावजूद शपथ तक नहीं पहुंच पाए। अब राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर अगले कुछ घंटों में बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हुआ, तो राज्य की राजनीति में कोई नया गठबंधन या अप्रत्याशित मोड़ भी सामने आ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंची सियासत

सरकार गठन में हो रही देरी अब अदालत तक पहुंच चुकी है। TVK ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मांग की है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उसे सरकार बनाने का मौका दिया जाए। पार्टी का तर्क है कि जनता ने सबसे ज्यादा सीटें TVK को दी हैं, इसलिए संवैधानिक परंपरा के अनुसार पहला अधिकार उसी का बनता है। हालांकि विपक्ष इस दलील से सहमत नहीं है और कह रहा है कि “संख्या” ही अंतिम सच्चाई होती है।

अब तमिलनाडु किस मोड़ पर खड़ा है ?

4 मई को जब चुनाव परिणाम आए थे, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि पहली बार चुनाव लड़ने वाली TVK इतनी बड़ी ताकत बन जाएगी। 108 सीटों के साथ पार्टी सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से थोड़ी दूर रह गई।

अब पूरा तमिलनाडु अगले कुछ घंटों पर टिका है। क्या VCK आखिरी वक्त में समर्थन पत्र दे देगी?
क्या IUML कोई बड़ा फैसला लेने वाली है?
क्या विपक्ष कोई नया राजनीतिक दांव खेलने जा रहा है?
या फिर विजय की यह “अधूरी जीत” तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा ट्विस्ट बन जाएगी?

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Heatwave School Closure Alert : अप्रैल में ही टूटा गर्मी का रिकॉर्ड, 45 डिग्री के पार पहुंचा तापमान, कई राज्यों 50 दिनों तक स्कूलों की छुट्टियों का ऐलान

Heatwave School Closure Alert
Heatwave School Closure Alert
Heatwave School Closure Alert

हीटवेव के बढ़ते खतरे के बीच दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में बदले स्कूल टाइम, कहीं 50 दिन तक बंद रहेंगे स्कूल

Heatwave School Closure Alert : देशभर में इस बार गर्मी ने अप्रैल महीने से ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए। उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया, जबकि कई शहरों में लगातार हीटवेव जैसी स्थिति बनी रही। तेज धूप, गर्म हवाओं और उमस भरे मौसम ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। सबसे ज्यादा चिंता स्कूली बच्चों को लेकर देखी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए कई राज्य सरकारों और शिक्षा विभागों ने स्कूलों की गर्मी की छुट्टियों का शेड्यूल जारी कर दिया है।

IBN24 News Network
Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026

Heatwave School Closure Alert : दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद समेत बिहार, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में सरकारी और निजी स्कूलों के लिए अलग-अलग तारीखों में समर वेकेशन घोषित की गई है। कई राज्यों में स्कूलों के समय में बदलाव करते हुए सुबह की शिफ्ट लागू कर दी गई है ताकि बच्चों को दोपहर की भीषण गर्मी से बचाया जा सके।

हालांकि पिछले कुछ दिनों में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि देखने को मिली, जिससे तापमान में हल्की गिरावट आई है। इसके बावजूद मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत अस्थायी है और मई-जून में गर्मी का असर और बढ़ सकता है। यही कारण है कि प्रशासन पहले से सतर्क नजर आ रहा है।

दिल्ली में 50 दिन की छुट्टियां

Heatwave School Closure Alert

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अप्रैल के आखिरी सप्ताह में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। मौसम विभाग ने कई बार हीटवेव को लेकर अलर्ट भी जारी किया। इसके बाद दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां घोषित कर दीं। राजधानी के स्कूल 11 मई से 30 जून 2026 तक बंद रहेंगे और 1 जुलाई से दोबारा खुलेंगे। यानी छात्रों को इस बार लगभग 50 दिनों की लंबी छुट्टी मिलेगी।

दिल्ली-एनसीआर के कई निजी स्कूलों ने भी इसी अवधि के आसपास छुट्टियों की घोषणा शुरू कर दी है। नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद में भी स्कूल स्थानीय प्रशासन और मौसम की स्थिति के अनुसार फैसले ले रहे हैं।

यूपी में समय से पहले छुट्टियों की संभावना

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार सरकारी स्कूलों में 20 मई से 15 जून तक समर वेकेशन रहेगी। वहीं कई निजी स्कूल 15 मई से ही छुट्टियां शुरू कर सकते हैं। हालांकि यदि तापमान में और बढ़ोतरी होती है तो जिला प्रशासन समय से पहले स्कूल बंद करने का निर्णय ले सकता है।

राज्य के कई जिलों में पहले ही स्कूलों का समय सुबह कर दिया गया है ताकि बच्चों को लू और तेज धूप से बचाया जा सके।

बिहार और हरियाणा में भी अलर्ट

Heatwave School Closure Alert

बिहार शिक्षा विभाग के अनुसार राज्य में स्कूल 1 जून से 20 जून तक बंद रहने की संभावना है। वहीं हरियाणा में 1 जून से 30 जून तक गर्मी की छुट्टियां प्रस्तावित हैं। दोनों राज्यों में अधिकारियों ने साफ किया है कि मौसम की स्थिति खराब होने पर छुट्टियों की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। हरियाणा और पंजाब के कई जिलों में दोपहर के समय बाहर निकलने को लेकर भी एडवाइजरी जारी की गई है।

राजस्थान में बदले स्कूल टाइम

राजस्थान में हर साल की तरह इस बार भी गर्मी का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। राज्य शिक्षा विभाग ने 17 मई से 20 जून तक गर्मी की छुट्टियों का ऐलान किया है।

भीषण गर्मी को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। प्रशासन लगातार मौसम की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर छुट्टियों को आगे बढ़ाया जा सकता है।

पश्चिम बंगाल और पंजाब में चरणबद्ध छुट्टियां

पश्चिम बंगाल सरकार ने दार्जिलिंग और कालिम्पोंग जैसे पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर बाकी जिलों में गर्मी की छुट्टियां घोषित कर दी हैं। पंजाब में भी मई और जून के दौरान चरणबद्ध तरीके से स्कूल बंद किए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन को मौसम के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

अप्रैल में ही बढ़ गई थी गर्मी

इस साल अप्रैल महीने से ही गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे।

Heatwave School Closure Alert

उत्तर भारत के कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जबकि राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में पारा 44 से 45 डिग्री तक दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार अप्रैल में ही हीटवेव जैसे हालात ज्यादा देखने को मिले। पिछले वर्ष जहां मई के दौरान भीषण गर्मी का असर बढ़ा था, वहीं इस बार अप्रैल के अंत से ही गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी।

मई की शुरुआत में राहत, फिर बढ़ सकती है गर्मी

मई के पहले सप्ताह में कई राज्यों में बारिश, तेज हवाएं और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि के कारण तापमान में 2 से 4 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में लोगों को कुछ दिनों की राहत जरूर मिली। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी। अनुमान है कि मई के दूसरे पखवाड़े और जून में तापमान फिर तेजी से बढ़ सकता है। इसी संभावना को देखते हुए कई राज्यों ने स्कूलों की छुट्टियां घोषित करने और स्कूल टाइमिंग बदलने जैसे फैसले लेने शुरू कर दिए हैं।

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Tamil Nadu Political Twist LIVE : तामिलनाडु में TVK की सरकार बनना तय, कांग्रेस के कहने के बाद किन दलों ने दिया TVK को समर्थन ? क्या एक्टर विजय ही बनने जा रहे है CM ?

Tamil Nadu Political Twist LIVE
Tamil Nadu Political Twist LIVE

Political turmoil intensifies over government formation in Tamil Nadu : कांग्रेस, CPI, CPI(M) और VCK के समर्थन के बाद विजय बहुमत के आंकड़े के करीब

Tamil Nadu Political Twist LIVE
Tamil Nadu Political Twist LIVE : कांग्रेस-वाम दलों के समर्थन से बहुमत के करीब पहुंचे विजय, शाम 6 बजे राज्यपाल से मिलेंगे TVK प्रमुखतमिलनाडु की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जारी असमंजस अब एक निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) अब सरकार बनाने के बेहद करीब पहुंच गई है। कांग्रेस, CPI, CPI(M) और वीसीके के समर्थन के बाद विधानसभा में पार्टी का आंकड़ा बहुमत के जादुई नंबर तक पहुंचता दिख रहा है।

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Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026

Tamil Nadu Political Twist LIVE : सूत्रों के मुताबिक, TVK प्रमुख विजय शुक्रवार शाम 6 बजे राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात करेंगे और सरकार बनाने का दावा दोबारा पेश कर सकते हैं। इस बैठक पर पूरे तमिलनाडु की नजर टिकी हुई है। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है। चुनाव परिणामों में TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसके पास 107 विधायक थे। शुरुआत में बहुमत से दूर दिख रही विजय की पार्टी को अब विपक्षी दलों का साथ मिल गया है।

कांग्रेस के 5 विधायक, CPI और CPI(M) के 2-2 विधायक तथा VCK के 2 विधायकों ने TVK को समर्थन देने का फैसला किया। इसके बाद विजय के समर्थन में कुल संख्या 118 तक पहुंच गई, जो सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह समर्थन तमिलनाडु की सत्ता की तस्वीर पूरी तरह बदल सकता है।

राज्यपाल के फैसले से बढ़ा विवाद

एक दिन पहले तक स्थिति बिल्कुल अलग थी। राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने से इनकार कर दिया था। राजभवन की ओर से कहा गया था कि TVK पर्याप्त समर्थन दिखाने में असफल रही है।

Tamil Nadu Political Twist LIVE

इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति गरमा गई। विपक्षी दलों ने भाजपा और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस और वाम दलों ने कहा कि संवैधानिक परंपरा के तहत सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए था।

TVK समर्थकों ने भी राजभवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और राज्यपाल के फैसले को “लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ” बताया।

खड़गे की एंट्री से बदले हालात

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने खुद वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन से बातचीत की और विजय को समर्थन देने की अपील की। इसके बाद तमिलनाडु में विपक्षी दलों के बीच तेज राजनीतिक गतिविधियां शुरू हो गईं।

Tamil Nadu Political Twist LIVE

जल्द ही CPI और CPI(M) की बैठकों में भी TVK को समर्थन देने पर सहमति बन गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल विजय को समर्थन देने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका मकसद भाजपा और राज्यपाल पर दबाव बनाना भी था।

इसी के बाद तमिलनाडु की राजनीति में अचानक सत्ता का समीकरण बदल गया।

समर्थन के साथ सख्त संदेश भी

हालांकि विजय को समर्थन मिल गया है, लेकिन सहयोगी दलों ने उन्हें खुली चेतावनी भी दी है। वीसीके नेता सिंथानई सेल्वन ने भाजपा पर लोकतांत्रिक संस्थाओं का इस्तेमाल कर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने विजय की राजनीतिक शैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद विजय को व्यक्तिगत रूप से सहयोगी दलों से संपर्क करना चाहिए था। केवल व्हाट्सऐप संदेश भेजकर समर्थन मांगना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। सेल्वन ने यह भी आरोप लगाया कि विजय के आसपास मौजूद कुछ नेता उन्हें बाकी दलों से दूर कर रहे हैं।

फिर चर्चा में आई ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’

तमिलनाडु में एक बार फिर “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” की चर्चा तेज हो गई है। खबरें हैं कि TVK ने अपने विधायकों को एक सुरक्षित स्थान पर रखा है ताकि किसी तरह की तोड़फोड़ या राजनीतिक दबाव से बचा जा सके। हालांकि पार्टी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में विधायकों की सुरक्षा और एकजुटता सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

वहीँ कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि सबसे बड़ी पार्टी बहुमत का दावा कर रही है, तो उसे विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक के पुराने उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी कई सरकारें शपथ लेने के बाद सदन में बहुमत साबित करती रही हैं। ऐसे में तमिलनाडु में अलग प्रक्रिया अपनाना सवाल खड़े करता है। विपक्षी दलों का भी यही कहना है कि बहुमत का परीक्षण राजभवन में नहीं बल्कि विधानसभा में होना चाहिए।

शाम 6 बजे की बैठक पर सबकी नजर

अब तमिलनाडु की राजनीति की सबसे अहम घड़ी शाम 6 बजे मानी जा रही है, जब विजय राज्यपाल से मुलाकात करेंगे।

Tamil Nadu Political Twist LIVE

यदि राज्यपाल उन्हें सरकार बनाने का न्योता देते हैं, तो जल्द ही फ्लोर टेस्ट की तारीख भी तय हो सकती है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय अब मुख्यमंत्री पद की दहलीज पर खड़े नजर आ रहे हैं। लेकिन तमिलनाडु की सत्ता का अंतिम फैसला अब राजभवन और विधानसभा की अगली कार्रवाई तय करेगी।

BJP ने क्या कहा?

वहीं भाजपा ने राज्यपाल के फैसले का बचाव किया है। पार्टी प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने कहा कि राज्यपाल पूरी तरह संवैधानिक नियमों के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समर्थन देने वाले दल औपचारिक रूप से विजय के पक्ष में दस्तावेज पेश करते हैं, तो स्थिर सरकार बनने का रास्ता साफ हो सकता है।भाजपा का कहना है कि इस पूरे मामले को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

DMK अभी भी मैदान में

हालांकि विजय बहुमत के करीब पहुंच गए हैं, लेकिन DMK अभी पूरी तरह पीछे हटती नहीं दिख रही। सूत्रों के मुताबिक, निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने सहयोगी दलों से गठबंधन में बने रहने की अपील की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तमिलनाडु की राजनीति में आखिरी क्षण तक समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में सरकार गठन की प्रक्रिया अभी पूरी तरह खत्म नहीं मानी जा सकती।

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TVK vs DMK-AIADMK : 107 विधायकों के इस्तीफे की चेतावनी, DMK-AIADMK पर सरकार गठन को लेकर मिलीभगत का आरोप… आपको क्या लगता है बदल जाएगी सत्ता की तस्वीर ?

TVK vs DMK-AIADMK
TVK vs DMK-AIADMK

TVK vs DMK-AIADMK : विवाद के बीच तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी संकट गहरा गया है। सूत्रों के अनुसार, 107 सीटें जीतने वाली विजय की पार्टी ने दावा किया है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उसे सरकार बनाने का मौका नहीं दिया जा रहा। 107 विधायकों के इस्तीफे की चेतावनी

TVK vs DMK-AIADMK
TVK vs DMK-AIADMK : तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद अब सत्ता का संघर्ष और भी नाटकीय होता जा रहा है। अभिनेता विजय की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने गुरुवार शाम ऐसा राजनीतिक दांव चला, जिसने राज्य की सियासत को नई दिशा दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने संकेत दिया है कि अगर Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) और All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करती हैं, तो TVK के सभी 107 विधायक इस्तीफा दे सकते हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में सरकार गठन को लेकर लगातार राजनीतिक बैठकों और अंदरूनी रणनीतियों का दौर चल रहा है। TVK का आरोप है कि राज्य की दो पारंपरिक द्रविड़ पार्टियां मिलकर उस पार्टी को सत्ता से दूर रखने की कोशिश कर रही हैं, जिसे सबसे ज्यादा जनसमर्थन मिला है।

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Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026

TVK vs DMK-AIADMK : 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में TVK ने 107 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े 118 से अभी 10 सीट दूर है, लेकिन उसका दावा है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल को सरकार बनाने का पहला मौका उसे देना चाहिए।

TVK vs DMK-AIADMK

सूत्रों के अनुसार, विजय ने राज्यपाल R. V. Arlekar से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें यह कहते हुए मना कर दिया गया कि उनके पास फिलहाल बहुमत नहीं है। बताया जा रहा है कि राज्यपाल ने स्पष्ट रूप से 118 विधायकों के समर्थन पत्र प्रस्तुत करने की मांग की है। राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वर्तमान स्थिति में सरकार गठन के लिए आवश्यक बहुमत समर्थन उपलब्ध नहीं है।

कांग्रेस साथ, बाकी समर्थन की तलाश जारी

TVK को पहले ही Indian National Congress के पांच विधायकों का समर्थन मिल चुका है। पार्टी अब वामपंथी दलों और कुछ छोटे क्षेत्रीय दलों से बातचीत कर रही है। सूत्रों का कहना है कि अगर संवैधानिक स्तर पर गतिरोध बना रहता है तो TVK अदालत का दरवाजा भी खटखटा सकती है। पार्टी के भीतर यह भावना मजबूत हो रही है कि जनता ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से हटकर नया विकल्प चुना है और उसे सत्ता से दूर रखना जनादेश का अपमान होगा।

क्या DMK बना रही है वैकल्पिक रणनीति ?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच DMK की गतिविधियां भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। पार्टी ने गुरुवार सुबह अहम बैठक कर चार प्रस्ताव पारित किए। इनमें एक प्रस्ताव ऐसा भी था, जिसमें पार्टी प्रमुख M. K. Stalin को “आपातकालीन निर्णय” लेने का अधिकार दिया गया। बैठक के बाद जारी बयान में DMK ने कहा कि उसकी प्राथमिकता राज्य में राजनीतिक अस्थिरता रोकना और दोबारा चुनाव से बचना है। पार्टी ने सभी विधायकों को 10 मई तक चेन्नई में मौजूद रहने का निर्देश भी दिया है।

हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा उस संभावित फार्मूले की हो रही है, जिसके तहत AIADMK नेता Edappadi K. Palaniswami मुख्यमंत्री बन सकते हैं और DMK बाहर से समर्थन दे सकती है। सूत्रों के मुताबिक, DMK के भीतर इस प्रस्ताव को लेकर मतभेद हैं। पार्टी के कुछ युवा नेताओं को डर है कि अगर विजय सत्ता में आ गए, तो वह तमिल राजनीति में उसी तरह स्थायी प्रभाव छोड़ सकते हैं जैसा कभी M. G. Ramachandran (एमजीआर) ने छोड़ा था।

AIADMK फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ मोड में

AIADMK ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। पार्टी नेतृत्व ने विधायकों से शांत रहने और स्थिति पर नजर बनाए रखने को कहा है। पलानीस्वामी के साथ हुई बैठक में 45 से अधिक विधायक शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर एक वर्ग TVK के साथ संभावित गठबंधन का समर्थन कर रहा है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने फिलहाल ऐसी किसी संभावना से इनकार किया है। विधायकों से कहा गया है कि अगले दो दिनों तक किसी भी तरह की राजनीतिक बयानबाजी से बचें।

राज्यपाल के फैसले पर बढ़ता विवाद

राज्यपाल के रुख को लेकर कई दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

TVK vs DMK-AIADMK

Communist Party of India (CPI) की तमिलनाडु इकाई ने कहा है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते TVK को विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के एस.आर. बोम्मई फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संवैधानिक परंपरा यही कहती है कि सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का मौका दिया जाए। वहीं Thol. Thirumavalavan ने भी राज्यपाल के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि शपथ ग्रहण से पहले समर्थन पत्रों की मांग करना उचित नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि सत्ता से बाहर हो रही DMK के कुछ नेताओं ने भी राज्यपाल के फैसले को “जनादेश का अपमान” बताया है। अभिनेता और नेता Kamal Haasan ने भी विजय के समर्थन में बयान दिया है।

अब आगे क्या?

तमिलनाडु की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर घंटे समीकरण बदल रहे हैं। एक तरफ विजय की TVK खुद को जनता का नया विकल्प बता रही है, वहीं दूसरी तरफ दशकों से राजनीति पर कब्जा जमाए द्रविड़ दल सत्ता बचाने के लिए नए समीकरण तलाश रहे हैं। अगर TVK अपने इस्तीफे की चेतावनी पर कायम रहती है, तो राज्य में संवैधानिक और राजनीतिक संकट और गहरा सकता है। वहीं यदि DMK और AIADMK किसी साझा फार्मूले पर आगे बढ़ते हैं, तो यह तमिलनाडु की राजनीति का सबसे अप्रत्याशित गठबंधन साबित हो सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या तमिलनाडु बदलाव की राजनीति की ओर बढ़ रहा है, या फिर पुराने राजनीतिक खिलाड़ी एक बार फिर सत्ता का रास्ता निकाल लेंगे?

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TCS Nashik Conversion Case : 40 दिन बाद मास्टरमाइंड निदा खान गिरफ्तार, धर्म परिवर्तन और दबाव के आरोपों ने मचाया हड़कंप… आपको क्या लगता है अब कॉरपोरेट ऑफिसों में सख्त निगरानी जरूरी है?

TCS Nashik Conversion Case
TCS Nashik Conversion Case

TCS Nashik Case में गिरफ्तार निदा खान पर महिला कर्मचारियों पर धर्म परिवर्तन का दबाव, मानसिक उत्पीड़न और कथित नेटवर्क चलाने के आरोप हैं। SIT अब डिजिटल सबूतों, 9 FIR और मानव तस्करी एंगल की गहन जांच कर रही है।

TCS Nashik Conversion Case
TCS Nashik Conversion Case : कॉरपोरेट दफ्तरों की चमकती दुनिया के पीछे क्या कभी ऐसा नेटवर्क भी छिपा हो सकता है, जिसकी परतें खुलते ही पुलिस, अदालत और जांच एजेंसियां एक साथ सक्रिय हो जाएं ? Nashik से सामने आया कथित धार्मिक परिवर्तन और कार्यस्थल उत्पीड़न का मामला फिलहाल पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस केस में अब सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब महाराष्ट्र पुलिस ने 40 दिनों से फरार चल रही 26 वर्षीय निदा खान को Chhatrapati Sambhajinagar से गिरफ्तार कर लिया।

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Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026

TCS Nashik Conversion Case : Tata Consultancy Services (TCS) की नाशिक बीपीओ यूनिट में काम करने वाली निदा खान को पुलिस इस कथित नेटवर्क की “मुख्य साजिशकर्ता” बता रही है। गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर नाशिक लाया गया, जहां अब SIT उससे लगातार पूछताछ कर रही है।

एक टेली-कॉलर… या पूरे नेटवर्क का चेहरा?

दिसंबर 2021 में TCS से जुड़ी निदा खान कंपनी में प्रोसेस एसोसिएट के तौर पर काम कर रही थी। शुरुआती रिपोर्टों में उसे HR विभाग से जुड़ा बताया गया, लेकिन बाद में कंपनी ने साफ किया कि वह केवल सेल्स डिपार्टमेंट में टेली-कॉलर थी और उसके पास कोई प्रशासनिक अधिकार नहीं थे। लेकिन जांच एजेंसियों का दावा इससे कहीं बड़ा है।

TCS Nashik Conversion Case

पुलिस के मुताबिक, निदा खान अपने सह-आरोपियों दानिश शेख और तौसीफ अत्तार के साथ मिलकर कथित तौर पर महिला कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रभावित करने, धार्मिक पहचान बदलने और विशेष धार्मिक प्रथाएं अपनाने के लिए दबाव डालती थी। दोनों सह-आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में हैं।

“तुम्हारा नाम अब हानिया होगा…”

इस केस की सबसे चौंकाने वाली बात पीड़िताओं के बयान हैं। एक शिकायतकर्ता के अनुसार, निदा खान ने उसका नाम बदलकर “हानिया” रखने को कहा। इतना ही नहीं, उसे मलेशिया में नौकरी दिलाने का सपना दिखाया गया और कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए लगातार दबाव बनाया गया। शिकायत में दावा है कि मना करने पर परिवार के साथ “कुछ बुरा होने” जैसी बातें कही गईं। FIR के अनुसार, कुछ पीड़िताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें नमाज पढ़ना सिखाया गया, सिर पर स्कार्फ पहनने को कहा गया और घर में इस्लामी प्रतीक रखने के लिए प्रेरित किया गया। कुछ महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि खान-पान और पहनावे तक बदलने का दबाव बनाया गया।

धार्मिक टिप्पणियों से लेकर मानसिक दबाव तक

जांच में शामिल अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों पर हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करने के भी आरोप हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बातचीत के दौरान भगवान कृष्ण, द्रौपदी और शिवलिंग को लेकर आपत्तिजनक बातें कही जाती थीं, ताकि मानसिक रूप से प्रभावित किया जा सके। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता अदालत में पेश सबूतों और जांच के बाद ही तय होगी।

TCS ने बनाई दूरी

मामला सामने आने के बाद TCS ने 9 अप्रैल को निदा खान को सस्पेंड कर दिया।

कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि आरोप गंभीर हैं और जांच पूरी होने तक उसे कार्य से अलग रखा जाएगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि निदा खान किसी नेतृत्वकारी पद पर नहीं थी और उसके पास संस्थागत अधिकार नहीं थे।

केस में ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग’ एंगल भी?

मामला तब और गंभीर हो गया जब SIT ने इसमें संभावित मानव तस्करी के एंगल की भी जांच शुरू कर दी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे नशीला पदार्थ देकर कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई थी। फिलहाल पुलिस इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

40 दिन तक कैसे बचती रही?

  • 26 मार्च को पहला मामला दर्ज होते ही निदा खान फरार हो गई थी। इसके बाद महाराष्ट्र के कई शहरों में पुलिस टीमें भेजी गईं। इस दौरान अदालत में उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी दाखिल हुई, लेकिन नाशिक सेशंस कोर्ट ने मामले को “गंभीर” मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
  • बचाव पक्ष ने अदालत में यह दलील भी दी कि निदा खान गर्भवती है, इसलिए उसे राहत मिलनी चाहिए। लेकिन अदालत ने कहा कि मामले की प्रकृति को देखते हुए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
  • आखिरकार 7 मई को पुलिस ने उसे छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया।

अब आगे क्या?

अब तक इस मामले में नौ FIR दर्ज हो चुकी हैं और आठ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस का मानना है कि निदा खान की गिरफ्तारी के बाद पूरे कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली, संपर्क और संभावित डिजिटल सबूतों के बारे में अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि कॉरपोरेट कार्यस्थलों में सुरक्षा, मानसिक दबाव और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे सवाल भी खड़े कर रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि SIT की जांच अदालत में कितनी मजबूत साबित होती है — और क्या यह मामला आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे करेगा?

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Tamil Nadu CM Race : बहुमत के बिना सरकार गठन पर अटका TVK का दावा, आपको क्या लगता है शपथ ले पाएंगे विजय ?

Tamil Nadu CM Race
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Tamil Nadu CM Race : तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद सत्ता गठन को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है। अभिनेता से नेता बने C. Joseph Vijay की पार्टी TVK राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री पद की तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।

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Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026

राज्य की 234 विधानसभा सीटों में से TVK ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की है। हालांकि सरकार बनाने के लिए पार्टी को बहुमत का आंकड़ा हासिल करना जरूरी है। वर्तमान राजनीतिक गणित के अनुसार विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 117 विधायकों का समर्थन चाहिए। ऐसे में विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ फिलहाल बहुमत जुटाने पर निर्भर मानी जा रही है।

विधायक दल का नेता चुने गए विजय

Tamil Nadu CM Race : चुनाव परिणाम आने के बाद TVK के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई गई, जिसमें विजय को विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु के राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया।

Tamil Nadu CM Race
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राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा था कि राज्यपाल जल्द ही विजय को सरकार गठन का न्योता दे सकते हैं, लेकिन अब नई जानकारी सामने आई है कि राज्यपाल स्थिर सरकार चाहते हैं और तभी शपथ ग्रहण की अनुमति देंगे जब TVK बहुमत साबित कर देगी।

सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल का मानना है कि किसी भी तरह की राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए पहले संख्याबल स्पष्ट होना जरूरी है। इसी वजह से फिलहाल विजय के शपथ ग्रहण पर सस्पेंस बना हुआ है।

कांग्रेस का समर्थन, DMK ने भी दिए संकेत

तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मोड़ तब आया जब कांग्रेस ने DMK से अपना पुराना गठबंधन तोड़ते हुए TVK को समर्थन देने का फैसला किया। कांग्रेस के पांच विधायक विजय के समर्थन में आने को तैयार बताए जा रहे हैं।

Tamil Nadu CM Race
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हालांकि इसके बावजूद TVK को पूर्ण बहुमत हासिल करने के लिए और समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। राजनीतिक समीकरण इसलिए भी दिलचस्प बने हुए हैं क्योंकि विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक छोड़नी होगी, जिसके बाद पार्टी का आंकड़ा 107 पर आ जाएगा।

इसी बीच M. K. Stalin ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विजय को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए और DMK अगले छह महीने तक नई सरकार के कामकाज पर नजर रखेगी।

स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी फिलहाल राज्य में किसी संवैधानिक संकट या दोबारा चुनाव की स्थिति नहीं चाहती। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नई सरकार को पिछली योजनाओं को जारी रखना चाहिए और जनता से किए गए चुनावी वादों को पूरा करना चाहिए।

चुनावी वादों पर भी उठे सवाल

स्टालिन ने विजय की चुनावी घोषणाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने खासतौर पर महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देने के वादे का जिक्र करते हुए कहा कि इसे लागू करना आसान नहीं होगा।

उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि अगर 2,500 रुपये देना संभव नहीं है तो कम से कम 1,000 रुपये की योजना जारी रखी जाए, जैसा DMK सरकार ने किया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल आर्थिक चुनौती की ओर इशारा नहीं करता, बल्कि आने वाले समय में TVK सरकार पर बढ़ने वाले राजनीतिक दबाव का भी संकेत है।

समर्थकों का प्रदर्शन तेज

विजय के समर्थकों में मुख्यमंत्री पद को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। लोक भवन के बाहर TVK कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए विजय को तुरंत मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने की मांग की। कई समर्थक पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे और राज्यपाल से जल्द फैसला लेने की अपील करते नजर आए।

सोशल मीडिया पर भी विजय के समर्थन में अभियान तेज हो गया है। TVK समर्थकों का दावा है कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और अब सरकार गठन में देरी नहीं होनी चाहिए।

क्या बन पाएंगे विजय मुख्यमंत्री?

फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति पूरी तरह संख्या के खेल पर टिक गई है। TVK सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा हासिल करना अभी भी चुनौती बना हुआ है।

यदि कांग्रेस समेत अन्य दलों का पर्याप्त समर्थन विजय को मिल जाता है तो वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। लेकिन अगर संख्याबल पूरा नहीं हुआ तो राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।

आने वाले कुछ दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इन्हीं दिनों में तय होगा कि राज्य की सत्ता आखिर किसके हाथों में जाएगी।

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Haryana RTE Admissions Warning : मनमानी करने वाले निजी स्कूलों पर गिरेगी गाज, जानिए शिक्षा विभाग ने क्या सख्त चेतावनी की जारी

Haryana RTE Admissions Warning
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आरटीई दाखिलों में गड़बड़ी और अभिभावकों की शिकायतों के बाद हरियाणा शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को सख्त चेतावनी दी है, जबकि प्रवेश प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल किया गया शुरू

Haryana RTE Admissions Warning

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Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026

Haryana RTE Admissions Warning : हरियाणा में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत दाखिलों को लेकर सरकार ने निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई निजी स्कूल बिना वैध कारण के आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश देने से मना करता है, तो उसके खिलाफ मान्यता रद्द करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए हरियाणा के निजी स्कूलों में कुल 21,752 छात्रों को सीटें आवंटित की हैं। विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि 9 मई तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। हालांकि इसके बावजूद कई अभिभावकों ने शिकायत की है कि कुछ निजी स्कूल दाखिले में देरी कर रहे हैं या अनुचित कारणों का हवाला देकर प्रवेश देने से इनकार कर रहे हैं।

अभिभावकों की शिकायतों के बाद विभाग हुआ सख्त

शिक्षा विभाग के अनुसार, हेल्पलाइन नंबर, ईमेल और अन्य माध्यमों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। शिकायतों में कहा गया है कि कई स्कूल आरटीई नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं और जानबूझकर दाखिले रोक रहे हैं।

Haryana RTE Admissions Warning

निदेशालय ने कहा कि ऐसे मामले आरटीई अधिनियम का उल्लंघन हैं और इन्हें बेहद गंभीरता से लिया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना दस्तावेजी और वैध कारण के किसी भी बच्चे का प्रवेश अस्वीकार करना कानून के खिलाफ माना जाएगा।

पारदर्शिता के लिए शुरू किया गया विशेष पोर्टल

आरटीई दाखिलों की निगरानी के लिए शिक्षा विभाग ने एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है। इस पोर्टल के जरिए हर आवंटित छात्र की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।

Haryana RTE Admissions Warning

निजी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्येक छात्र की प्रवेश स्थिति “स्वीकृत” या “अस्वीकृत” के रूप में पोर्टल पर अपडेट करें। यदि किसी छात्र का प्रवेश अस्वीकार किया जाता है, तो स्कूल को उसका उचित कारण भी दर्ज करना होगा। विभाग ने कहा है कि अस्वीकृति के कारण आरटीई नियमों और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार होने चाहिए, न कि मनमाने ढंग से।

पड़ोस नियम बना विवाद की वजह

नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस के अध्यक्ष Kulbhushan Sharma ने कहा कि प्रवेश अस्वीकृति के पीछे सबसे बड़ा कारण पड़ोस (Neighbourhood) नियम है। उन्होंने बताया कि पहले विभाग ने 0-1 किलोमीटर और 1-3 किलोमीटर के दायरे में आने वाले छात्रों के लिए संयुक्त चयन प्रक्रिया लागू की थी। बाद में जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि 1-3 किलोमीटर के दायरे वाले छात्रों को प्रवेश देना स्कूलों के लिए स्वैच्छिक होगा। इस बदलाव के कारण कई अभिभावकों और स्कूलों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने पहले ही आवेदन कर दिए थे, जिसके बाद अब विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है।

आरटीई कानून क्या कहता है?

  • आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश स्तर की कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं।
  • 0-1 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले पात्र बच्चों को प्रवेश देना स्कूलों के लिए अनिवार्य है। वहीं 1-3 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले बच्चों को प्रवेश देना स्वैच्छिक रखा गया है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विभाग शुरुआत से ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करता, तो यह विवाद खड़ा नहीं होता। फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि आरटीई नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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