Karnal local Toll Pass Demand Rises : हरियाणा के करनाल जिले स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा पर मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम लागू होने के बाद स्थानीय वाहन चालकों के बीच लोकल टोल पास बनवाने का रुझान तेजी से बढ़ गया है।
Written by Kajal Panchal • Published on : 30 June 2026
IBN24 News Network : पहले जहां प्रतिदिन 70 से 80 लोकल पास ही बनाए जाते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 200 से 250 तक पहुंच गई है। सरकार भी स्थानीय वाहन चालकों को राहत देने के लिए करीब ₹2000 के सालाना लोकल पास की योजना पर काम कर रही है।
MLFF सिस्टम के बाद बढ़ी लोकल पास की मांग
बसताड़ा टोल प्लाजा पर नई तकनीक आधारित मल्टी लेन फ्री फ्लो सिस्टम लागू होने के बाद वाहन चालकों को बिना रुके टोल पार करने की सुविधा मिल रही है। इसी वजह से स्थानीय लोग अब बार-बार टोल शुल्क देने की बजाय लोकल पास बनवाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। टोल प्रबंधन के अनुसार पहले प्रतिदिन 70-80 पास बनते थे, जबकि अब यह संख्या 200-250 तक पहुंच चुकी है।
₹2000 के सालाना पास से मिलेगी बड़ी राहत
सरकार अगले एक से दो महीने के भीतर स्थानीय वाहन चालकों के लिए करीब ₹2000 का वार्षिक लोकल पास लागू कर सकती है। हालांकि अंतिम शुल्क में बदलाव संभव है। यदि यह योजना लागू होती है, तो वाहन चालक लगभग ₹180 प्रति माह के खर्च में पूरे साल असीमित बार टोल प्लाजा पार कर सकेंगे। इससे रोजाना आने-जाने वाले लोगों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई
MLFF सिस्टम के तहत हाईटेक कैमरे और सेंसर हर वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन करते हैं। जिन वाहनों की नंबर प्लेट से छेड़छाड़ की गई होती है या नंबर प्लेट गायब होती है, उनका डेटा सीधे गुजरात स्थित कंट्रोल सेंटर भेजा जाता है। वहां से संबंधित आरटीओ को सूचना भेजी जाती है, जिसके आधार पर वाहन मालिक के खिलाफ कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
रोजाना 150 से 200 वाहनों में मिल रही नंबर प्लेट की समस्या
टोल प्रबंधन के मुताबिक प्रतिदिन करीब 150 से 200 ऐसे वाहन गुजरते हैं जिनकी नंबर प्लेट सही तरीके से स्कैन नहीं हो पाती या उसमें कोई तकनीकी समस्या होती है। यदि किसी वाहन की नंबर प्लेट गलती से स्कैन नहीं होती है या किसी अन्य कारण से दिक्कत आती है, तो वाहन चालक शिकायत दर्ज कर समाधान प्राप्त कर सकता है।
प्रदीप मलिक ने दी चेतावनी
टोल प्रबंधन से जुड़े प्रदीप मलिक ने बताया कि कुछ लोग टोल शुल्क बचाने के लिए नंबर प्लेट हटाने या उसमें बदलाव करने की कोशिश करते हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक के सामने ऐसा करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का पूरा रिकॉर्ड गुजरात स्थित कंट्रोल सेंटर भेजा जाता है और उसके बाद आरटीओ के माध्यम से कार्रवाई की जाती है। कई मामलों में जुर्माना इतना अधिक हो सकता है कि उतने पैसे में वर्षों तक फास्टैग रिचार्ज कराया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने भी दिए संकेत
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने भी हाल ही में संकेत दिए हैं कि स्थानीय वाहन चालकों के लिए ₹2000 के सालाना लोकल पास की योजना लागू की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना को लागू होने में लगभग एक से दो महीने का समय लग सकता है। योजना लागू होने के बाद करनाल और आसपास के क्षेत्रों के हजारों स्थानीय वाहन चालकों को टोल शुल्क से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
बसताड़ा टोल प्लाजा पर लागू नई MLFF तकनीक ने टोल संचालन को अधिक आधुनिक और तेज बना दिया है। इसके साथ ही लोकल पास की बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि स्थानीय लोग स्थायी और सस्ती सुविधा चाहते हैं। यदि सरकार जल्द ₹2000 का सालाना पास लागू करती है, तो यह नियमित यात्रियों के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकता है।
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