Japan Ban Indian Mangoes : भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक साथ दो बड़े झटके लगे हैं। एक तरफ जापान ने भारतीय आमों के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है, वहीं दूसरी ओर चीन ने एक बार फिर भारतीय चावल की खेपों को अस्वीकार कर दिया है। इन घटनाओं ने भारतीय निर्यातकों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 29 May 2026
IBN24 News Network : जापान ने अप्रैल से जून के बीच होने वाले भारतीय आमों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले से अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी लोकप्रिय किस्मों के आम जापानी बाजार में नहीं पहुंच पाएंगे।
दरअसल, जापान हर साल आम निर्यात सीजन शुरू होने से पहले अपनी क्वारंटीन टीम भारत भेजता है, जो निर्यात प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों की जांच करती है। जांच के दौरान Vapour Heat Treatment (VHT) केंद्रों में फ्यूमिगेशन और स्वच्छता से जुड़ी कुछ कमियां सामने आने के बाद जापानी अधिकारियों ने यह कदम उठाया है।
20 साल बाद फिर आई ऐसी स्थिति
यह पहला अवसर नहीं है जब जापान ने भारतीय आमों पर रोक लगाई हो। इससे पहले 1986 में भी जापानी बाजार भारतीय आमों के लिए लगभग दो दशकों तक बंद रहा था।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जापान भारतीय आमों का सबसे बड़ा आयातक नहीं है। भारत के प्रमुख आम निर्यात बाजारों में UAE, अमेरिका, ब्रिटेन, कुवैत और कतर शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 29,938 मीट्रिक टन ताजे आमों का निर्यात किया था।
चीन ने फिर लौटाई भारतीय चावल की खेप
दूसरी ओर चीन ने भारतीय चावल की कई खेपों को वापस भेज दिया है। चीन का दावा है कि इन खेपों में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) के अंश पाए गए हैं।
हालांकि भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी (GEAC) का कहना है कि देश में व्यावसायिक स्तर पर जीएम चावल की खेती नहीं की जाती।
पहले भी कई बार लौटा चुका है खेप
जानकारी के अनुसार चीन इससे पहले भी कई बार भारतीय चावल की खेपों को रोक या वापस भेज चुका है। मार्च और अप्रैल में भी कई भारतीय निर्यातकों को इसी तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।
क्या भारत की बढ़ती ताकत से परेशान है चीन ?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती कृषि निर्यात क्षमता चीन के लिए चुनौती बन रही है। हाल के वर्षों में भारत ने वैश्विक चावल बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाई है और उत्पादन के मामले में भी चीन को पीछे छोड़ दिया है।

भारत सरकार और कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि चीन द्वारा लगाए जा रहे आरोप वैज्ञानिक तथ्यों से मेल नहीं खाते। ऐसे में यह मामला केवल गुणवत्ता जांच का नहीं बल्कि व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का भी माना जा रहा है।
चावल उत्पादन में भारत नंबर-1
भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है। कृषि आंकड़ों के अनुसार देश का कुल चावल उत्पादन लगभग 150.18 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है।
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत ने 172 से अधिक देशों को करीब 2.01 करोड़ टन चावल निर्यात किया। इससे देश को लगभग 12.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई।
किसानों और निर्यातकों के लिए क्या मायने ?
जापान और चीन के ताजा फैसलों का असर सीधे तौर पर किसानों और निर्यातकों पर पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास निर्यात के लिए कई बड़े वैश्विक बाजार मौजूद हैं, इसलिए दीर्घकालिक स्तर पर इसका प्रभाव सीमित रह सकता है।
फिलहाल सरकार और निर्यात एजेंसियां दोनों मामलों में समाधान तलाशने और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के प्रयासों में जुटी हुई हैं।
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