Indian Army Ends Several British-Era Traditions : भारतीय सेना ने अपनी ड्रेस और परंपराओं में बड़ा बदलाव करते हुए नया ‘Army Uniforms-2026’ लागू किया है। इस नई ड्रेस नीति का उद्देश्य सेना से ब्रिटिश शासनकाल की बची हुई परंपराओं और प्रतीकों को हटाकर भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय पहचान और आधुनिक सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्था विकसित करना है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 15 June 2026
IBN24 News Network : सेना द्वारा जारी नए नियमों में कई औपनिवेशिक (Colonial) परंपराओं को समाप्त कर दिया गया है। इसके तहत परेड और औपचारिक कार्यक्रमों में उपयोग होने वाले कुछ पारंपरिक ब्रिटिश प्रतीकों को हटाया गया है, जबकि भारतीय परिधान और आधुनिक सैन्य पहनावे को बढ़ावा दिया गया है।
अब हर समारोह में तलवार ले जाना नहीं जरूरी

नई ड्रेस नीति के अनुसार, परेड और औपचारिक समारोहों में समीक्षा अधिकारी (Reviewing Officer) के लिए तलवार धारण करना अनिवार्य नहीं रहेगा। तलवार का उपयोग अब केवल विशेष सैन्य और औपचारिक अवसरों तक सीमित किया गया है।
भारतीय ‘बंडी’ जैकेट को मिली जगह
सेना ने पहली बार भारतीय पारंपरिक ‘बंडी’ (Bandi) जैकेट को औपचारिक ड्रेस का हिस्सा बनाया है। इसके अलावा आधुनिक बैटल जैकेट्स और अन्य व्यावहारिक परिधानों को भी शामिल किया गया है, जिससे सैनिकों को बेहतर सुविधा और पेशेवर पहचान मिल सके।
हटाया गया ‘रॉयल’ शब्द

नए यूनिफॉर्म कोड के तहत सेना ने कई पुरानी ब्रिटिशकालीन शब्दावली को समाप्त करने का फैसला लिया है। इनमें “Royal” जैसे शब्द शामिल हैं, जो लंबे समय से सैन्य परंपराओं का हिस्सा रहे थे। सेना का मानना है कि यह कदम भारतीय सैन्य पहचान को और मजबूत करेगा।
महिलाओं के लिए भी नए प्रावधान
नई ड्रेस गाइडलाइन में महिला अधिकारियों के लिए भी कई विकल्प शामिल किए गए हैं। उन्हें औपचारिक अवसरों पर सादे रंग की साड़ी, कुर्ता-सलवार और अन्य निर्धारित भारतीय परिधानों की अनुमति दी गई है।
आठ साल बाद जारी हुआ नया नियम
‘Army Uniforms-2026’ नामक 174 पन्नों की नई नियमावली पिछले आठ वर्षों में यूनिफॉर्म और ड्रेस संबंधी सबसे बड़ा बदलाव मानी जा रही है। इसमें यूनिफॉर्म, ग्रूमिंग स्टैंडर्ड, टैटू नियम, औपचारिक ड्रेस और सैन्य समारोहों से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश शामिल हैं।
भारतीय पहचान को मजबूत करने की दिशा में कदम
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल ड्रेस तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सेना की पहचान को औपनिवेशिक प्रभावों से मुक्त कर राष्ट्रीय मूल्यों और भारतीय परंपराओं के अनुरूप ढालने का प्रयास है। सेना का मानना है कि नई नीति आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन स्थापित करेगी तथा सैनिकों में राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत बनाएगी।
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