High Court Health Order : पंजाब और हरियाणा की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दोनों राज्य सरकारों को निर्देश देते हुए कहा है कि हर जिला अस्पताल में कम से कम एक CT स्कैन मशीन, एक MRI मशीन और जरूरत के अनुसार ICU सुविधा उपलब्ध होना जरूरी है। इसके साथ ही डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के खाली पदों पर तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के आदेश भी दिए गए हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 20 May 2026
IBN24 News Network : मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान जारी किए। कोर्ट ने साफ कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट ने सरकारों को क्या कहा ?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। अदालत ने कहा कि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
कोर्ट ने निर्देश दिए कि:
- हर जिला अस्पताल में कम से कम एक CT स्कैन मशीन हो
- हर जिला अस्पताल में MRI सुविधा उपलब्ध कराई जाए
- ICU में पर्याप्त बेड और जरूरी संसाधन हों
- मशीनों का संचालन अस्पताल के स्थायी स्टाफ द्वारा किया जाए
- डॉक्टरों और विशेषज्ञों के खाली पद जल्द भरे जाएं
निजी कंपनियों पर निर्भरता पर सवाल
हाईकोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निजी कंपनियों पर निर्भरता को लेकर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि CT स्कैन और MRI जैसी जरूरी सुविधाएं सरकार को खुद उपलब्ध करानी चाहिए। यह जिम्मेदारी निजी एजेंसियों पर छोड़ना उचित नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं बेहद गंभीर विषय हैं, लेकिन सरकारें इन्हें पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दे रही हैं।
पंजाब में हजारों डॉक्टरों के पद खाली

हरियाणा सरकार को भी लगाई फटकार
कोर्ट ने हरियाणा सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि सरकार यह तक स्पष्ट नहीं कर पाई कि राज्य में सामान्य और विशेषज्ञ डॉक्टरों के कितने पद खाली हैं। हाईकोर्ट ने विस्तृत जानकारी के साथ नया जवाब दाखिल करने को कहा है।
मालेरकोटला अस्पताल से शुरू हुआ मामला
यह पूरा मामला पंजाब के मालेरकोटला स्थित सिविल अस्पताल की सुविधाओं को लेकर दायर जनहित याचिका से शुरू हुआ था। सुनवाई के दौरान सामने आया कि अस्पताल में ICU जैसी बुनियादी सुविधा तक मौजूद नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई।
अदालत ने कहा कि जिला अस्पतालों में जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव आम लोगों के स्वास्थ्य अधिकारों पर असर डालता है।
6 जुलाई तक देनी होगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को निर्देश दिया है कि वे:
- आवश्यक मशीनों की व्यवस्था करें
- डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करें
- स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें
और इसकी अनुपालन रिपोर्ट 6 जुलाई तक अदालत में पेश करें।
माना जा रहा है कि अदालत के इस सख्त रुख के बाद दोनों राज्यों में जिला अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार देखने को मिल सकता है। इससे मरीजों को जांच और इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा कम लेना पड़ेगा।
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