Haryana VIP Cars Reduced : ईंधन बचत और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को लेकर हरियाणा सरकार ने VIP वाहनों की संख्या कम करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाने का ऐलान किया है, जिसके बाद अब मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के वाहन उपयोग की भी समीक्षा शुरू हो गई है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 14 May 2026
IBN24 News Network : प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचत और संसाधनों के संतुलित उपयोग की अपील का असर अब हरियाणा में दिखाई देने लगा है। Nayab Singh Saini ने VIP कल्चर में कटौती की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि अगले आदेश तक उनके कारकेड में केवल सुरक्षा के लिहाज से जरूरी वाहन ही शामिल किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने अपने फ्लीट में न्यूनतम वाहनों के उपयोग का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने सप्ताह में एक दिन बिना किसी सरकारी वाहन के काम करने का संकल्प भी लिया है। सीएम ने राज्य के मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों से भी सीमित वाहनों के इस्तेमाल की अपील की है।
अब कितनी गाड़ियां रहेंगी CM काफिले में ?
प्रोटोकॉल के अनुसार मुख्यमंत्री के काफिले में आमतौर पर 8 से 15 वाहन शामिल रहते हैं। मुख्यमंत्री को Z+ सुरक्षा प्राप्त है, जिसके चलते उनके साथ एनएसजी कमांडो, पुलिसकर्मी और विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान तैनात रहते हैं। सुरक्षा टीम के लिए अलग वाहन चलते हैं, जबकि सीएम स्टाफ के लिए भी अलग गाड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक नए फैसले के बाद मुख्यमंत्री के काफिले में वाहनों की संख्या घटाकर करीब 7 तक सीमित की जा सकती है। माना जा रहा है कि इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ सरकारी खर्चों में भी कमी आएगी।
मंत्रियों और अधिकारियों की गाड़ियों की होगी समीक्षा
सरकार के इस फैसले का असर केवल मुख्यमंत्री कार्यालय तक सीमित नहीं रहेगा। विभिन्न विभागों में मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य वीआईपी श्रेणी के लिए उपलब्ध वाहनों की समीक्षा की जा रही है। जिन अधिकारियों के पास एक से अधिक वाहन तैनात हैं, वहां संख्या घटाई जाएगी।
इसके अलावा एस्कॉर्ट और फॉलो कारों की तैनाती को भी दोबारा परखा जाएगा। विभागीय पूल वाहनों के साझा उपयोग को बढ़ावा देने और नई गाड़ियों की खरीद पर नियंत्रण रखने की तैयारी की जा रही है।
वर्चुअल बैठकों पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों से अधिकतम बैठकों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने का आग्रह भी किया है। सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक यात्राओं में कमी आएगी और सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा।
हरियाणा सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में ईंधन बचत, सरकारी खर्चों में कटौती और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दूसरे राज्य भी VIP वाहनों और सरकारी फ्लीट को लेकर इसी तरह के फैसले लेते हैं या नहीं।
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