Haryana IAS CBI Raid : हरियाणा के 661 करोड़ रुपए के सरकारी फंड घोटाले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा कैडर के तीन आईएएस अधिकारियों और एक आईएफएस अधिकारी के आवासों पर छापेमारी की। रविवार देर रात चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कुल छह स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई। जांच के दौरान दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण कब्जे में लिए गए हैं।

Written By Kajal Panchal, published on: 07 June 2026
IBN24 News Network : सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के दो विभागों के बैंक खातों में जमा सरकारी फंड के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुईं। शुरुआती तौर पर 560 करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आई थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह राशि बढ़कर 661 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
किन अधिकारियों के यहां हुई कार्रवाई
सीबीआई ने आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल, मोहम्मद शाइन और प्रदीप कुमार के साथ-साथ आईएफएस अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव के ठिकानों पर छापेमारी की। इसके अलावा नोएडा स्थित एमएस विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक के परिसरों पर भी जांच एजेंसी की टीम पहुंची।जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी फंड के लेनदेन से जुड़े कई अहम दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जाएगी।
बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर खुलवाए गए कथित खाते
सीबीआई की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ अधिकारियों ने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर कथित तौर पर ऐसे खाते खुलवाए, जिनके जरिए सरकारी धन को अन्य खातों में स्थानांतरित किया गया। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन लेनदेन के बदले संबंधित अधिकारियों को किसी प्रकार का आर्थिक लाभ मिला था या नहीं।
ACB से CBI तक पहुंची जांच
इस मामले की शुरुआती जांच हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने की थी। जांच के दौरान कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिलने के बाद मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। इसके बाद एजेंसी ने विभिन्न पहलुओं की जांच शुरू की और अब छापेमारी की कार्रवाई की गई है।
दो महीने पहले खरीदी गई कोठी के दस्तावेज भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, पंचकूला के सेक्टर-6 में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी द्वारा करीब एक कनाल की कोठी खरीदे जाने से जुड़े दस्तावेज भी सीबीआई के हाथ लगे हैं। बताया जा रहा है कि यह संपत्ति किसी रिश्तेदार के नाम पर खरीदी गई थी और इसका लेनदेन लगभग दो महीने पहले हुआ था।सीबीआई अब अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।
कंपनी खाते से निजी खाते में ट्रांसफर हुआ पैसा
जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित फर्जी लेनदेन से अर्जित धन पहले एमएस विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के खाते में पहुंचा और बाद में कंपनी के निदेशक के निजी खाते में ट्रांसफर किया गया। प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
चार्जशीट में हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) के कुछ अधिकारियों की भूमिका का जिक्र किया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि IDFC फर्स्ट बैंक और AU फाइनेंस बैंक में जमा सरकारी धन को कथित तौर पर फर्जी लेनदेन के जरिए दूसरे खातों में भेजा गया।
घोटाले के समय कौन किस पद पर था
जिस समय कथित अनियमितताएं हुईं, उस दौरान मोहम्मद शाइन हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक थे। पंकज अग्रवाल कृषि विभाग में प्रशासनिक सचिव के पद पर कार्यरत थे, जबकि प्रदीप कुमार हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव थे।
वहीं आईएफएस अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके हैं।
पहले भी हुई थी लंबी पूछताछ
इससे पहले सीबीआई दो आईएएस अधिकारियों से लंबी पूछताछ कर चुकी है। उनके मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए थे। अधिकारियों को अलग-अलग दिनों में सरकारी आवासों पर रखकर पूछताछ की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, आईएएस अधिकारी मोहम्मद शाइन के आवास पर तीन गाड़ियों में पहुंचे सात से आठ अधिकारियों की टीम ने देर रात तक जांच की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की।
जल्द दाखिल हो सकती है पूरक चार्जशीट
सीबीआई का कहना है कि तीनों मामलों की जांच अभी जारी है। जांच के दौरान जिन अन्य लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस मामले में पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है।
आखिर 661 करोड़ रुपए के इस बैंक फंड घोटाले में और किन अधिकारियों या संस्थाओं की भूमिका सामने आएगी? सीबीआई की आगे की जांच पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।
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