Ethanol Fuel Impact : देश में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की नीति के तहत E20 फ्यूल को बड़े स्तर पर लागू किया जा चुका है। हाल ही में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 लॉन्च किया गया है और भविष्य में E100 यानी लगभग 100% एथेनॉल ईंधन लाने की तैयारी भी चल रही है। सरकार का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण घटाना है, लेकिन दूसरी ओर कई वाहन मालिक और मैकेनिक E20 फ्यूल के कारण गाड़ियों में नई समस्याएं आने का दावा कर रहे हैं।
Written by Kajal Panchal • Published on : 23 June 2026
IBN24 News Network : दिल्ली के पालिका भवन में कार्यरत विक्रम ने तीन साल पहले एक पुरानी कार खरीदी थी। उनका कहना है कि कार E10 पेट्रोल के लिए डिज़ाइन की गई थी, लेकिन उसमें E20 पेट्रोल का उपयोग होने के बाद फ्यूल सिस्टम में लगातार समस्याएं आने लगीं। इसके चलते वाहन की सर्विसिंग लागत बढ़ गई और माइलेज पर भी असर पड़ा। इसी तरह कई वाहन मालिक सोशल मीडिया पर भी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण इंजन, फ्यूल पंप और माइलेज संबंधी शिकायतें साझा कर रहे हैं।
मैकेनिकों का दावा : फ्यूल टैंक में जम रही काली परत
दिल्ली के कार रिपेयरिंग मार्केट में पिछले दो दशकों से काम कर रहे मैकेनिक दीपक राज के अनुसार, पिछले दो वर्षों में फ्यूल सिस्टम से जुड़ी शिकायतों में वृद्धि हुई है।
उनका कहना है कि एथेनॉल में वातावरण से नमी सोखने की क्षमता होती है। इस वजह से फ्यूल टैंक के अंदर नमी बढ़ सकती है, जिससे कुछ वाहनों में काली परत या फंगस जैसी जमा दिखाई देती है। इससे फ्यूल सेंसर, फ्यूल पंप और फिल्टर प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
चलते-चलते बंद हो रही गाड़ियां ?
कार मैकेनिक मोहसिन के अनुसार, कई वाहन मालिक ऐसी शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं कि वाहन अचानक बंद हो जाता है या स्टार्टिंग में समस्या आती है। उनका दावा है कि फ्यूल पंप, हाई-प्रेशर पंप, इंजेक्टर और फिल्टर में खराबी के मामले बढ़े हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह जरूरी नहीं कि हर समस्या का कारण केवल एथेनॉल ही हो। वाहन की उम्र, रखरखाव और फ्यूल सिस्टम की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पुरानी कारों पर ज्यादा असर ?
प्रीमियम कार डीलर मयंक मलिक के मुताबिक, एथेनॉल का असर विशेष रूप से पुरानी गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले रबर और प्लास्टिक पार्ट्स पर देखने को मिल सकता है। उनका कहना है कि कई पुराने पार्ट्स E20 के अनुरूप नहीं बनाए गए थे, इसलिए उनमें घिसावट और खराबी जल्दी आ सकती है।
ऑटो पार्ट्स कारोबारी राजेश का दावा है कि पहले जहां फ्यूल पंप कई वर्षों तक चलता था, वहीं अब कुछ मामलों में अपेक्षाकृत जल्दी खराब होने की शिकायतें मिल रही हैं।
बाइक चालकों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है ?
बाइक मैकेनिकों के अनुसार E20 पेट्रोल के बाद निम्नलिखित समस्याएं अधिक देखने को मिल रही हैं:
- 1. कोल्ड स्टार्ट की समस्या
पुरानी बाइकें सुबह स्टार्ट होने में अधिक समय ले सकती हैं, विशेषकर सर्दियों में।
- 2. रबर और प्लास्टिक पार्ट्स की घिसावट
फ्यूल लाइन, सील और गैस्केट जैसे पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं।
- 3. फ्यूल टैंक में नमी और जंग
लंबे समय तक वाहन खड़ा रहने पर फ्यूल सिस्टम में नमी जमा हो सकती है।
- 4. माइलेज में कमी
कुछ वाहन मालिकों ने 5 से 7 प्रतिशत तक माइलेज घटने की शिकायत की है।
- 5. इंजन परफॉर्मेंस में बदलाव
पिकअप और थ्रॉटल रिस्पॉन्स में अंतर महसूस होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
एथेनॉल नमी क्यों सोखता है ?
विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल एक हाइग्रोस्कोपिक (Hygroscopic) पदार्थ है, यानी यह वातावरण में मौजूद नमी को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है।
यदि वाहन लंबे समय तक खड़ा रहे और फ्यूल टैंक पूरी तरह सील न हो, तो नमी ईंधन में मिल सकती है। अधिक मात्रा में पानी जमा होने पर फेज सेपरेशन की स्थिति बन सकती है, जिसमें एथेनॉल और पानी नीचे बैठ जाते हैं जबकि पेट्रोल ऊपर रह जाता है। इससे इंजन के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की राय
ऑटोमोटिव एक्सपर्ट टूटू धवन का कहना है कि एथेनॉल से माइलेज और इंजन पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर व्यापक और पारदर्शी टेस्टिंग की जरूरत है।
उनके अनुसार:
- माइलेज पर वास्तविक प्रभाव का वैज्ञानिक डेटा सार्वजनिक होना चाहिए।
- नमी और जंग की समस्या पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है।
- पुरानी गाड़ियों में असर अधिक हो सकता है, लेकिन वाहन तुरंत खराब हो जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा।
पुरानी कार मालिकों के लिए 3 जरूरी सलाह
- वाहन को लंबे समय तक खड़ा न रखें, समय-समय पर चलाते रहें।
- फ्यूल फिल्टर, फ्यूल पंप और अन्य फ्यूल सिस्टम पार्ट्स की नियमित जांच करवाएं।
- निर्माता द्वारा सुझाए गए फ्यूल और मेंटेनेंस गाइडलाइन का पालन करें।
सरकार से उठे सवाल
वाहन मालिकों और ऑटो विशेषज्ञों ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि E20, E85 और भविष्य के E100 फ्यूल का पुराने वाहनों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि E10 के लिए डिज़ाइन किए गए करोड़ों वाहनों के लिए आगे की रणनीति क्या होगी।
फिलहाल पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से इन सवालों पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और पेट्रोल आयात पर निर्भरता कम होगी, लेकिन वाहन मालिकों की चिंताओं को दूर करने के लिए वैज्ञानिक आंकड़े और स्पष्ट दिशानिर्देश जरूरी हैं।
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