Bastara Toll Goes High-Tech with MLFF : हरियाणा के करनाल स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा पर मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम लागू होने के बाद टोल की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जहां पहले वाहनों की लंबी कतारें और जाम आम बात थी, वहीं अब वाहन बिना रुके तेज रफ्तार से टोल पार कर रहे हैं।
Written by Kajal Panchal • Published on : 29 June 2026
IBN24 News Network : हाईटेक कैमरे और सेंसर की मदद से फास्टैग स्कैन होते ही टोल अपने आप कट रहा है, जिससे वाहन चालकों का समय और ईंधन दोनों की बचत हो रही है।
22 जून से लागू हुआ MLFF सिस्टम
बसताड़ा टोल प्लाजा पर 22 जून दोपहर 2 बजे से MLFF सिस्टम शुरू कर दिया गया। अब जैसे ही कोई वाहन गेंट्री के नीचे से गुजरता है, वहां लगे हाईटेक कैमरे और सेंसर फास्टैग को स्कैन कर स्वतः टोल शुल्क काट लेते हैं। टोल कटने की सूचना वाहन चालक के मोबाइल पर एसएमएस के जरिए तुरंत मिल जाती है।
रोजाना 60 से 70 हजार वाहन गुजर रहे
टोल संचालन से जुड़े ऑपरेशन मैनेजर प्रदीप मलिक के अनुसार, बसताड़ा टोल से प्रतिदिन करीब 60 से 70 हजार वाहन गुजरते हैं। इनमें से लगभग 6 से 7 हजार वाहनों को हर दिन ई-नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ऐसे नोटिस उन वाहनों को भेजे जाते हैं जिनके फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस नहीं होता या फास्टैग ब्लॉक होता है।
72 घंटे में भुगतान नहीं किया तो दोगुना चार्ज
ई-नोटिस मिलने के बाद वाहन चालक को 72 घंटे के भीतर टोल शुल्क जमा करना होता है। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया जाता तो टोल शुल्क दोगुना हो जाता है। साथ ही संबंधित वाहन का फास्टैग ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है, जिसे पूरा बकाया जमा करने के बाद ही दोबारा सक्रिय किया जाता है।
हटाए जा रहे हैं कंक्रीट बैरियर
MLFF सिस्टम लागू होने के बाद टोल प्लाजा के ढांचे में भी बदलाव शुरू हो गया है। लेन में लगे कंक्रीट बैरियर हटाए जा रहे हैं ताकि वाहनों की आवाजाही और अधिक सुगम हो सके तथा दुर्घटनाओं की आशंका कम हो। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल केवल बैरियर हटाने का कार्य चल रहा है, जबकि टोल बूथ और पूरे स्ट्रक्चर को हटाने की प्रक्रिया करीब छह महीने बाद शुरू हो सकती है।
लोकल ड्राइवरों में बढ़ी नाराजगी
नई व्यवस्था के तहत अब स्थानीय वाहन चालकों को भी फास्टैग के माध्यम से टोल देना पड़ रहा है। पहले स्थानीय पहचान पत्र के आधार पर कई वाहन बिना शुल्क के गुजर जाते थे, लेकिन अब 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को 350 रुपये का मासिक पास बनवाना अनिवार्य है।
इस मासिक पास पर सालाना करीब 4,200 रुपये खर्च आते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि अपने ही क्षेत्र में आने-जाने के लिए टोल देना आर्थिक बोझ बन गया है।
बिना पास के देना होगा टोल
यदि किसी वाहन चालक ने मासिक पास नहीं बनवाया है तो उसे प्रत्येक यात्रा के लिए वाहन श्रेणी के अनुसार टोल शुल्क देना होगा। टोल का भुगतान नहीं करने पर संबंधित वाहन को ई-नोटिस भी जारी किया जा सकता है।
लंबी दूरी वालों के लिए विशेष फास्टैग
करनाल और पानीपत के बीच नियमित यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए 3,075 रुपये का विशेष फास्टैग विकल्प उपलब्ध है, जिसमें 200 ट्रिप मिलती हैं। हालांकि बसताड़ा टोल पर लगातार उपयोग करने से ये ट्रिप लगभग 100 दिनों में समाप्त हो जाती हैं। ऐसे में यदि चालक अलग से 350 रुपये का लोकल पास भी बनवाता है तो उसका सालाना खर्च करीब 7,200 रुपये तक पहुंच जाता है।
2 हजार रुपये सालाना पास की तैयारी
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में स्थानीय वाहन चालकों के लिए करीब 2,000 रुपये का वार्षिक पास लागू किया जा सकता है। इस पास में अनलिमिटेड ट्रिप की सुविधा मिलने की संभावना है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उन्हें नेशनल फास्टैग और लोकल पास दोनों रखने पड़ेंगे तो उनका कुल खर्च फिर भी काफी अधिक रहेगा।
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय वाहन चालकों ने सरकार से मांग की है कि लोकल पास पूरी तरह निशुल्क किया जाए ताकि रोजमर्रा की आवाजाही करने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उनका कहना है कि नई व्यवस्था ने यातायात को तेज और आधुनिक जरूर बनाया है, लेकिन स्थानीय लोगों की जेब पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।
बसताड़ा टोल पर लागू MLFF सिस्टम ने टोल वसूली को पूरी तरह डिजिटल और हाईटेक बना दिया है। इससे जहां वाहन चालकों को बिना रुके सफर करने की सुविधा मिल रही है, वहीं स्थानीय लोगों के लिए मासिक पास और अतिरिक्त खर्च नई चुनौती बनकर सामने आया है। आने वाले समय में सरकार द्वारा प्रस्तावित वार्षिक पास इस समस्या का कितना समाधान करेगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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