AI Reshaping Future Job Market : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर अब सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर तक सीमित नहीं है। आईटी, लॉ, कॉमर्स, ट्रांसलेशन, ग्राफिक डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में AI तेजी से पारंपरिक नौकरियों और डिग्रियों की उपयोगिता बदल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सिर्फ डिग्री होना नौकरी की गारंटी नहीं होगा, बल्कि AI स्किल्स के साथ हाइब्रिड प्रोफाइल रखने वाले उम्मीदवारों को ज्यादा अवसर मिलेंगे।

Written by Kajal Panchal • Published on : 16 June 2026
IBN24 News Network : वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, 2030 तक दुनिया की करीब 22% नौकरियां AI और ऑटोमेशन से प्रभावित हो सकती हैं। वहीं भारत में 40% कंपनियां अब ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास डिग्री के साथ AI टूल्स की समझ भी हो।
AI के कारण किन डिग्रियों पर सबसे ज्यादा असर ?

विशेषज्ञों का कहना है कि इन क्षेत्रों में AI टूल्स कई बुनियादी कार्य कुछ सेकंड में कर रहे हैं, जिनके लिए पहले कई कर्मचारियों की जरूरत पड़ती थी।
40% कंपनियां AI स्किल्स को दे रही प्राथमिकता
एचआर कंपनी TeamLease के अनुसार, देश की करीब 40% कंपनियां भर्ती के दौरान “Hybrid Skills” को महत्व दे रही हैं।
इसका मतलब है कि उम्मीदवार के पास केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि ChatGPT, Copilot, Midjourney, Claude, Gemini या अन्य AI टूल्स का व्यावहारिक ज्ञान भी होना चाहिए।
वहीं NASSCOM की 2024 रिपोर्ट के अनुसार भारत में 82% BCA और MCA ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है, जिससे उनकी रोजगार क्षमता प्रभावित हो रही है।
AI ने कैसे बदला काम करने का तरीका ?

एक्सपर्ट बोले- सिर्फ डिग्री से नहीं चलेगा काम
HR और टेक इंडस्ट्री एक्सपर्ट पंकज बंसल का कहना है कि पारंपरिक डिग्रियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी, लेकिन उनका स्वरूप तेजी से बदल रहा है।
उनके मुताबिक यदि शिक्षा व्यवस्था और कोर्स कंटेंट को अपडेट नहीं किया गया तो आने वाले समय में केवल थ्योरी आधारित डिग्रियों की वैल्यू काफी कम हो जाएगी।
उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे केवल डिग्री लेने के बजाय लाइव प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप और AI टूल्स पर काम करना शुरू करें।
AI लोगों की नौकरी नहीं लेगा, AI जानने वाले लोग लेंगे
IBM Institute for Business Value की रिपोर्ट के अनुसार AI सीधे इंसानों की जगह नहीं लेगा, लेकिन AI का उपयोग करने वाले लोग उन लोगों की जगह ले सकते हैं जो नई तकनीक सीखने से बच रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता देंगी जो AI की मदद से अपनी उत्पादकता 40% तक बढ़ा सकें।
चीन ने 12,200 डिग्री प्रोग्राम बंद किए
AI और उभरती तकनीकों की बढ़ती मांग को देखते हुए चीन ने अपने उच्च शिक्षा ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं।
2021 से 2025 के बीच चीन के विश्वविद्यालयों ने 12,200 से अधिक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम बंद या निलंबित कर दिए, जबकि करीब 10,200 नए कोर्स शुरू किए।
इन नए कोर्सों का फोकस मुख्य रूप से:
- Artificial Intelligence
- Robotics
- Semiconductors
- Data Science
- Advanced Manufacturing
जैसे क्षेत्रों पर है।
भारत में भी बदलाव शुरू
भारत में भी उच्च शिक्षा व्यवस्था में बदलाव दिखाई देने लगा है।
कर्नाटक सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए सरकारी कॉलेजों में कम मांग वाले 458 BA, BSc और BCom कॉम्बिनेशन बंद कर दिए हैं, जबकि 1300 से अधिक कोर्सों में सीटें कम कर दी गई हैं।
भविष्य में किन स्किल्स की होगी सबसे ज्यादा मांग ?

छात्रों के लिए क्या है सबसे बड़ा सबक ?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि “Degree + AI Skills + Practical Experience” सफलता का नया फॉर्मूला होगा।
जो छात्र अभी पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें AI टूल्स सीखने, इंटर्नशिप करने और वास्तविक समस्याओं पर काम करने पर फोकस करना चाहिए। क्योंकि भविष्य की नौकरी उसी को मिलेगी जो AI के साथ काम करना जानता हो।
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