Renu Bhatia Resignation : हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया के विवादित बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उनके इस्तीफे के बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा है। अपनी बेटी को किसी के साथ कमरे में छोड़ने संबंधी टिप्पणी पर उठे भारी विरोध के बीच रेणु भाटिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन नर्सिंग समुदाय अब भी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़ा हुआ है।

हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। संगठन की मांग है कि रेणु भाटिया सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाए। इसी कारण प्रदेशभर में चल रहा विरोध प्रदर्शन और हड़ताल फिलहाल समाप्त करने से इनकार कर दिया गया है।
नर्सिंग एसोसिएशन ने की कानूनी कार्रवाई की तैयारी
हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष विनीता ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि 10 जून को हुई बैठक में संगठन ने आगे की रणनीति तय की है। उन्होंने बताया कि रेणु भाटिया के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने के साथ-साथ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी भी की जा रही है।
विनीता ने कहा, “हमारे सम्मान और पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले बयान को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। जब तक उचित कार्रवाई नहीं होती और सार्वजनिक माफी नहीं मिलती, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”
इस्तीफे के बाद भी जारी रहेगा विरोध
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी पद या व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि सम्मान और आत्मसम्मान की लड़ाई है। उनका मानना है कि विवादित बयान ने पूरे नर्सिंग समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाया है, इसलिए केवल पद छोड़ देने से मामला खत्म नहीं हो सकता।
संगठन के नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो विरोध प्रदर्शन को और व्यापक बनाया जा सकता है।
सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़ीं नर्सें
नर्सिंग एसोसिएशन लगातार रेणु भाटिया से सार्वजनिक मंच पर माफी मांगने की मांग कर रही है। संगठन का कहना है कि बयान से आहत हजारों नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के सम्मान की बहाली के लिए माफी जरूरी है।
प्रदर्शनकारी नर्सों का कहना है कि जब तक माफी नहीं मांगी जाती और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तब तक हड़ताल और विरोध प्रदर्शन वापस नहीं लिया जाएगा।
क्या था पूरा मामला ?
दरअसल, कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश सिविल अस्पताल में एक युवती के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद रेणु भाटिया 7 जून को अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने अस्पताल प्रशासन और नर्सिंग स्टाफ से घटना को लेकर जवाब-तलब किया।

निरीक्षण के दौरान सीनियर नर्सिंग ऑफिसर अनिता से बातचीत करते हुए भाटिया ने कहा था, “क्या आपकी भी बेटी है? छोड़ दूं उसे किसी के साथ 15 मिनट एक कमरे में? फिर इस बच्ची को अकेला कैसे छोड़ दिया गया?”
यह बयान सामने आते ही विवाद खड़ा हो गया और नर्सिंग स्टाफ ने इसे अपमानजनक बताते हुए विरोध शुरू कर दिया।
नर्सिंग अधिकारी ने दी सफाई
सीनियर नर्सिंग ऑफिसर अनिता ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि घटना के दिन उनकी ड्यूटी सुपरविजन की थी और उन्हें संबंधित डॉक्टर की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई थी। उन्होंने बताया कि अस्पताल में रोजाना करीब 1500 मरीजों की ओपीडी होती है और हर मरीज की गतिविधियों की जानकारी नर्सिंग स्टाफ को होना संभव नहीं है।

अनिता ने कहा कि पीड़िता उनके लिए भी बेटी समान है और घटना से उन्हें गहरा दुख है, लेकिन इस मामले में नर्सिंग स्टाफ की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि रेणु भाटिया के बयान से पूरे नर्सिंग समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।
इस्तीफे में क्या लिखा ?
मुख्यमंत्री को भेजे अपने त्यागपत्र में रेणु भाटिया ने लिखा कि उन्होंने पिछले साढ़े चार वर्षों में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह भविष्य में भी महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई जारी रखेंगी।
कार्यकाल को लेकर भी उठे थे सवाल
रेणु भाटिया का कार्यकाल पहले भी कानूनी बहस का विषय बन चुका है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता हेमंत कुमार ने दावा किया था कि हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 के अनुसार चेयरपर्सन का कार्यकाल अधिकतम तीन वर्ष का होता है।
उनके अनुसार, रेणु भाटिया ने 19 जनवरी 2022 को पदभार संभाला था और उनका कार्यकाल 18 जनवरी 2025 को समाप्त हो चुका था। हालांकि विभागीय आदेश के माध्यम से उनका कार्यकाल “अगले आदेशों तक” बढ़ाया गया था, जिस पर भी कानूनी सवाल उठाए गए थे।
रेणु भाटिया के इस्तीफे के बाद अब हरियाणा सरकार को महिला आयोग के नए अध्यक्ष की नियुक्ति करनी होगी। वहीं, नर्सिंग स्टाफ संगठनों ने फिलहाल अपने आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति पर विचार शुरू कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने महिला सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की भाषा एवं व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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