At 17, She Looks 70 : मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाली दो बहनों की जिंदगी ऐसी बीमारी से जूझ रही है, जिसके बारे में अधिकांश लोगों ने कभी सुना भी नहीं होगा। महज 17 और 19 साल की उम्र में दोनों बहनें उम्रदराज महिलाओं जैसी दिखती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक वे ‘प्रोजेरिया’ नामक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से प्रभावित हैं, जो बच्चों को समय से पहले बूढ़ा बना देती है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 5 June 2026
IBN24 News Network : रायसेन जिले के सालेर गांव की रहने वाली 19 वर्षीय राजकुमारी और 17 वर्षीय रोशनी का शरीर बचपन से ही सामान्य बच्चों की तरह विकसित नहीं हो पाया। उम्र बढ़ने के साथ उनके चेहरे और शरीर की त्वचा ढीली पड़ती गई, बाल झड़ने लगे और शारीरिक कमजोरी बढ़ती चली गई।
परिवार के अनुसार, दोनों बहनों में बीमारी के लक्षण एक साल की उम्र के आसपास ही दिखाई देने लगे थे। धीरे-धीरे उनका चेहरा और शरीर इस तरह बदलने लगा कि वे अपनी वास्तविक उम्र से कई गुना अधिक उम्र की दिखने लगीं।
समाज की तानेभरी नजरों ने बढ़ाया दर्द
बीमारी से जूझने के साथ-साथ दोनों बहनों को सामाजिक उपेक्षा का भी सामना करना पड़ा। परिवार का कहना है कि गांव में कई लोग उन्हें देखकर अजीब टिप्पणियां करते हैं। बचपन में स्कूल जाने के दौरान भी उन्हें उपहास का सामना करना पड़ा, जिसके कारण पढ़ाई बीच में ही छूट गई।
रोशनी बताती है कि वह सामान्य लड़कियों की तरह पढ़ना, घूमना और जीवन जीना चाहती थी, लेकिन लोगों की प्रतिक्रियाओं और लगातार बिगड़ती सेहत ने उसके सपनों को सीमित कर दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
माता-पिता के लिए यह स्थिति किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। परिवार आर्थिक रूप से भी संघर्ष कर रहा है। दोनों बहनों का इलाज कराने के लिए कई अस्पतालों के चक्कर लगाए गए, लेकिन डॉक्टरों ने बीमारी को लाइलाज बताया।
परिवार को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि भविष्य में बेटियों की देखभाल कौन करेगा। माता-पिता का कहना है कि जब तक वे जीवित हैं, बेटियों की सेवा करेंगे, लेकिन उनके बाद क्या होगा, यह चिंता हमेशा बनी रहती है।
भाई की भी इसी बीमारी से हो चुकी है मौत
परिवार के अनुसार, दोनों बहनों का एक छोटा भाई भी इसी बीमारी से पीड़ित था। बचपन में ही उसके शरीर में तेजी से बुढ़ापे के लक्षण दिखाई देने लगे थे और सात साल की उम्र में उसकी मौत हो गई।
यह घटना परिवार के लिए आज भी सबसे बड़ा सदमा है और इसी वजह से माता-पिता बेटियों की सेहत को लेकर लगातार चिंतित रहते हैं।
क्या है प्रोजेरिया ?
प्रोजेरिया (Progeria) एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में हचिंसन-गिलफोर्ड प्रोजेरिया सिंड्रोम (HGPS) कहा जाता है। यह बीमारी शरीर की कोशिकाओं में होने वाले एक विशेष जीन परिवर्तन के कारण विकसित होती है।

इस बीमारी से प्रभावित बच्चों में कम उम्र में ही बुढ़ापे जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- त्वचा का ढीला पड़ना और झुर्रियां आना
- बालों का झड़ना
- वजन और लंबाई का सामान्य रूप से न बढ़ना
- जोड़ों में अकड़न
- हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याएं
- सांस लेने में दिक्कत
कितना दुर्लभ है यह रोग ?

चिकित्सकों के अनुसार, प्रोजेरिया दुनिया की सबसे दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों में से एक है। इसके मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं और अधिकांश मरीजों की जीवन प्रत्याशा सामान्य लोगों की तुलना में काफी कम होती है।
क्या इसका इलाज संभव है ?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल प्रोजेरिया का कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि कुछ दवाओं और चिकित्सा देखभाल के जरिए मरीजों के जीवन की गुणवत्ता और जीवनकाल को कुछ हद तक बढ़ाया जा सकता है। वैज्ञानिक लगातार इस बीमारी पर शोध कर रहे हैं, ताकि भविष्य में बेहतर उपचार विकसित किया जा सके।
उम्मीद और संघर्ष की कहानी
राजकुमारी और रोशनी की कहानी केवल एक दुर्लभ बीमारी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष की भी कहानी है जिसमें एक परिवार सामाजिक तानों, आर्थिक चुनौतियों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उम्मीद का दामन थामे हुए है।
इन दोनों बहनों की जिंदगी यह याद दिलाती है कि दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे लोगों को केवल इलाज ही नहीं, बल्कि समाज के सहयोग, संवेदनशीलता और सम्मान की भी जरूरत होती है।
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