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चुनाव खत्म होते ही कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹973 बढ़े, होटल-ढाबों में खाने की लागत बढ़ेगी, आपकी जेब पर होगा सीधा असर

1 मई से 19 किलो एलपीजी के दाम 3000 रुपये पार, होटल-ढाबों की बढ़ी लागत, बाहर का खाना पड़ेगा जेब पर भारी

1 मई, 2026

पांच राज्यों में हुए चुनाव के नतीजों से ठीक पहले महंगाई से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है। 1 मई से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में करीब ₹993 की बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके बाद इसकी कीमत ₹3000 के पार पहुंच गई है।

वहीँ, सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक हर घर की रसोई गैस पर ही टिकी होती है। इसलिए जब भी गैस की कीमतों में बदलाव की खबर आती है, सबसे पहला सवाल यही उठता है कि अब खर्च कितना बढ़ेगा। इस बार खबर थोड़ी अलग है। घर की रसोई फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन अगर आप बाहर खाना खाते हैं या ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं, तो आपकी जेब पर असर साफ दिखने वाला है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों को फिलहाल नहीं बढ़ाया है। यह फैसला करीब 33 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देता है, क्योंकि रसोई का मासिक बजट अभी नहीं बिगड़ेगा। लेकिन इसी के साथ एक बड़ा बदलाव हुआ है। व्यापारिक गैस सिलेंडर (19 किलो) के दामों में भारी बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में इसका दाम 2,078.50 रुपये से बढ़कर 3,071.50 रुपये हो गया है। मुंबई में भी कीमत 2,031 रुपये से बढ़कर 3,024 रुपये तक पहुंच गई है। यानी करीब एक हजार रुपये तक का सीधा इजाफा, जो छोटे और मध्यम कारोबार के लिए बड़ा झटका है।

तेल कंपनियों के मुताबिक, कुल पेट्रोलियम उत्पादों में करीब 80 प्रतिशत की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि बढ़ोतरी केवल उन उत्पादों में की गई है जो कमर्शियल या औद्योगिक उपयोग में आते हैं। कमर्शियल एलपीजी का कुल खपत में हिस्सा 1 प्रतिशत से भी कम है, लेकिन इसका असर बाजार में तेजी से दिखाई देता है।

फरवरी से अब तक तीन बार बढ़ चुके दाम

यह बढ़ोतरी एक बार में नहीं हुई। फरवरी के अंत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ने के बाद से अब तक तीन बार दाम बढ़ चुके हैं। मार्च में करीब 144 रुपये की बढ़ोतरी हुई, फिर 1 अप्रैल को लगभग 200 रुपये का इजाफा हुआ और अब एक और बड़ी बढ़ोतरी सामने आई है।

लगातार बढ़ रहे दाम इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में दबाव और बढ़ सकता है। आम आदमी पर इसका असर सीधे नहीं, लेकिन धीरे-धीरे जरूर पड़ेगा। होटल, ढाबे, रेस्तरां, बेकरी और मिठाई की दुकानें इसी व्यापारिक गैस पर निर्भर हैं। जब उनकी लागत बढ़ेगी, तो वे कीमतें बढ़ाने को मजबूर होंगे।

छोटे फूड वेंडर्स से लेकर ऑनलाइन ऑर्डर पर पड़ेगा असर

इस बार केवल बड़े होटल या रेस्टोरेंट ही नहीं, बल्कि छोटे फूड वेंडर्स पर भी असर पड़ेगा। 5 किलो वाले छोटे कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में भी करीब 261 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इससे चाय की दुकानों, रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट फूड कारोबारियों की लागत भी बढ़ेगी।

पहले भी जब गैस और ईंधन के दाम बढ़े थे, तो कई होटल और ढाबों ने खाने की कीमतों में 10 से 30 रुपये तक बढ़ोतरी की थी। इस बार बढ़ोतरी ज्यादा है, इसलिए असर भी ज्यादा देखने को मिल सकता है। बाहर खाना, ऑनलाइन ऑर्डर करना और छोटे फूड वेंडर्स से खरीदारी, सब पर इसका असर पड़ेगा।

पेट्रोल और डीजल के दामों में भी देखने को मिल सकता है बदलाव

फिलहाल, पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम लोगों को राहत बनी हुई है। लेकिन तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। वे महंगे कच्चे तेल पर खरीद कर पुराने दामों पर बेच रही हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कंपनियों के अनुसार, यह एक संतुलन बनाने की कोशिश है, जहां आम उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है, वहीं औद्योगिक क्षेत्र को बाजार के हिसाब से कीमतें दी जा रही हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में भी बदलाव संभव है।

एविएशन फ्यूल और अन्य ईंधनों पर क्या असर पड़ा

1 मई को जारी संशोधन में घरेलू उड़ानों के लिए विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इसे महंगा किया गया है। इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले मिट्टी के तेल की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।

नए नियम भी हुए लागू

1 मई से गैस सिलेंडर से जुड़े नियम भी सख्त कर दिए गए हैं। अब शहरों में नया सिलेंडर बुक करने के लिए 25 दिन का इंतजार करना होगा, जो पहले 21 दिन था। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि 45 दिन तक कर दी गई है। इसके साथ ही डिलीवरी के समय ओटीपी अनिवार्य कर दिया गया है। अब बिना मोबाइल पर आए कोड के सिलेंडर नहीं मिलेगा, यानी पुरानी रसीद या बुक दिखाकर सिलेंडर लेने की व्यवस्था खत्म कर दी गई है।

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