मेहनत से लगाई अपनी फसलों को खुद नष्ट कर रहे किसान, जानिए क्यों

यमुनानगर : हरियाणा का यमुनानगर टमाटर उत्पादन में प्रदेश में नंबर एक पर है लेकिन टमाटर की बिक्री की का मूल्य इस समय इतना गिर चुका है कि टमाटर उत्पादकों को लागत भी वसूल नहीं हो पा रही जिसके चलते टमाटर उत्पादक अपनी फसलों को नष्ट करने लगे हैं। यमुनानगर जिला में टमाटर की भारी पैदावार होती है। यमुनानगर के साडोरा, रादौर व जगाधरी ब्लॉक में कई गांव ऐसे हैं जहां टमाटर की भरपूर खेती होती है।

पिछले काफी समय से किसानों को टमाटर का सही मूल्य नहीं मिल रहा। इस बार टमाटर का रेट सबसे न्यूनतम स्तर पर आ चुका है। टमाटर उत्पादकों का कहना है कि उन्होंने लाखों रुपए लगाकर टमाटर तैयार किए लेकिन अब यह एक रुपए किलो तक भी नहीं बिक रहा। जिसके चलते किसानों ने टमाटर को फेंकना शुरू कर दिया है और खेतों में लगे पौधों को भी उखाड़ना शुरू कर दिया है।

टमाटर उत्पादकों का कहना है कि सरकार भावानतर भरपाई योजना की बात करती है लेकिन वास्तव में इसका किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा। किसानों का आरोप है कि टमाटर की इतनी बुरी हालत है कि कोई 20 रुपए में भी 50 किलो का क्रेट नहीं ले रहा जिसके चलते टमाटर उत्पादकों की हालत अत्यंत दयनीय हो चुकी है । टमाटर उत्पादकों ने सरकार से नुकसान की भरपाई की मांग की है।

वहीं जिला उद्यान अधिकारी डॉ रमेश पाल सैनी का कहना है कि सरकार ने सब्जी उत्पादक किसानों की भलाई के लिए भावानतर भरपाई योजना शुरू की है जिसके तहत विभिन्न सब्जियों का मूल्य निर्धारित किया गया है। अगर बाजार में उस मूल्य से कम में सब्जी बिकती है तो बाकी के हुए नुकसान की भरपाई सरकार द्वारा की जाती है। बशर्ते संबंधित किसान द्वारा उसका रजिस्ट्रेशन करवाया गया हो ।

उन्होंने जानकारी दी कि पिछले साल टमाटर का मूल्य सरकार द्वारा 5 रुपए प्रति किलो निर्धारित किया गया था जिसे अब बढ़ाकर 6 रुपए कर दिया गया है। उन्होंने कहां की पिछले दिनों यमुनानगर की एक कंपनी द्वारा 26 गाड़ियां टमाटर की  सप्लाई की गई थी जिसका मूल्य साडे 3 रुपए प्रति किलो था और बाकी के अड़ाई रुपए सरकार द्वारा किसानों के खाते में डाले जाएंगे। डॉक्टर सैनी ने कहा कि जिन्होंने अपनी सब्जी का रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया उन्हें सरकार की इस योजना का कोई लाभ नहीं मिलेगा।

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