दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर जल्द होगा काम शुरू, अब इन रास्तों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेस वे

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे के लिए फंडिंग जुटाने का रास्ता अब साफ हो गया है। इस परियोजना के लिए स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसवीपी) के जरिये 50 हजार करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। इस योजना को वित्त मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस एक्सप्रेस वे के लिए फंड जुटाने के लिए वित्तमंत्रालय और राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी के अधिकारियों की बैठक हुई थी।

वित्त मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए फंडिंग जुटाने का एक्शन प्लान तैयार किया है। इस साल जुलाई के आखिर तक इस मॉडल के प्रारुप को अंतिम रुप दे दिया जाएगा। इसके लिए एक मर्चेंट बैंक नियुक्त किया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने एसपीवी मॉडल को फंड जुटाने के लिए मंजूरी दे दी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एसपीवी के जरिये जुटाए गए फंड को इस्तेमाल तीन साल के लिए किया जाएगा, यह मॉडल सफल होने के बाद इस प्रकार से आगे भी फंड जुटाने का किया जा सकता है। दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे के लिए फंड की कमी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

जानकारों के मुताबिक दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे के पहले चरण में 1320 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस वे के निर्माण में यह फंड इस्तेमाल हो सकता है। इस योजना में इस एक्सप्रेस वे के किनारे स्मार्ट शहरों को भी विकसित करने  की योजना है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अप्रैल में इस बात की जानकारी दी थी। गडकरी ने कहा था कि इस संदर्भ में अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा लिया जाएगा।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना की अनुमानित लागत एक लाख करोड़ रुपये है। यह दिल्ली-मुंबई के पुराने रास्ते से अलग रास्ते से निकलेगा। यह गुजरात, मध्यप्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान के पिछड़े और दूर-दराज के कई आदिवासी इलाकों से गुजरेगा। इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी ने पीटीआई-भाषा के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘हम एक्सप्रेसवे के साथ-साथ स्मार्ट सिटी, स्मार्ट गांव, लॉजिस्टिक पार्क, औद्योगिक संकुल और सड़क किनारे की सुविधाएं विकसित करने पर विचार कर रहे हैं।

इस एक्सप्रेस का निर्माण होने के बाद दिल्ली-मुंबई की दूरी को 12 घंटे में तय किया जा सकेगा। पूरी तरह नए सिरे से विकसित की जा रही इस परियोजना से दोनों शहरों की मौजूदा दूरी 220 किलोमीटर कम हो जाएगी।

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