हरियाणा सरकार के इस फैसले के बाद से नहीं मिलेगा लाखों लोगों को अनाज, जानें क्या है वजह

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार अपनी हर उस कोशिश को अंजाम देने में लगी रहती है, जिससे की सभी को समय पर और प्रचूर मात्रा में अनाज उपलब्ध कराया जा सके, लेकिन इस कड़ी में सरकार अपनी हर उस कोशिश को भी अंजाम देती है, जिससे कि कोई फर्जीवाड़ा उभरकर सामने न आ जाए। अब इसी बीच सरकार ने एक ऐसा ही कदम उठाया है, जिसमें अब तक 43 लाख लोगों के राशन कार्ड को फर्जी बताकर रद्द कर दिया गया है। अब यह लोग राशन लेने से वंचित रह जाएंगे।

प्राप्त सूचना के अनुसार भारत की केंद्र सरकार ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना पर भी तेजी से काम कर रही है। जिसका उद्देश्य प्रवासी मजदूरों को सरकारी सब्सिडी दर पर राशन देना है। लेकिन इस योजना में बहुत बड़े फर्जीवाडे का खुलासा हुआ है जिसकी वजह से सरकार की तरफ से लाखों राशन कार्ड को रद्द कर दिया गया है। सरकार की तरफ से पब्लिक डिस्ट्रीब्युशन सिस्टम से 43 लाख 90 हजार फर्जी और अवैध राशन कार्ड को रद्द कर दिया है। इस योजना का उद्देश्य योग्य लाभार्थियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सब्सिडी वाला अनाज वितरित करवाना था। लेकिन इस योजना में लाखों फर्जी राशन कार्ड बनवाए गए थे।

इसे पहले साल 2013 से बड़ी संख्या में फर्जी और डुप्लीकेट राशन कार्ड मिले थे। जिसके बाद 2019 में सरकार राशन कार्ड में धोखाधड़ी को रोकने पर ध्यान केंद्रित किया है। इस सम्बन्ध में खाद्य मंत्रालय मानता है कि डुप्लीकेट कार्ड को चिन्हित करना जरूरी है। चर्चा है  कि राशन कार्डों के डिजिटलीकरण अभियान ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शी बनाने और दक्षता में सुधार लाने में मदद की है।


उन्होंने कहा, ‘अयोग्य राशन कार्डों को हटाते समय, हम प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए परिभाषिति कवरेज के भीतर नये लाभार्थियों को जोड़ते रहते हैं। बता दें कि नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत करीब देश की आबादी के लगभग दो-तिहाई हिस्सा को इसका फायदा मिल रहा है है। करीब 80 करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्र योजना के तहत हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज मिल रहा है। इस योजना की शुरुआत कोरोना महामारी से दौरान लगे लॉकडाउन में की गई थी।

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