क्या है ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना? जानिए इससे कैसे मिलेगी लाखों लोगों को नौकरियां

नई दिल्ली. ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने मंगलवार को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PM-FME Scheme) के क्षमता निर्माण घटक के लिए मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ किया और ‘एक जिला-एक उत्पाद योजना’ के जीआईएस डिजीटल मानचित्र को जारी किया . इस अवसर पर नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रशिक्षण एवं सहयोग से छोटे खाद्य उद्यमियों को स्थापित होने में सहायता मिलेगी और यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम साबित होगा. आपको बता दें सरकार का उद्देश्य इस योजना से जुड़े 8 लाख लोगों को लाभान्वित करना है. इसमें किसान उत्पादक संगठन के सदस्यों के साथ ही स्व-सहायता समूह, सहकारिता, अनुसूचित जनजाति समुदाय के हितग्राही शामिल हैं.

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के क्षमता निर्माण घटक के अंतर्गत मास्टर ट्रेनरों को ऑनलाइन मोड, क्लासरूम लेक्चर, प्रदर्शन और ऑनलाइन पाठ्य सामग्री के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. चयनिम उद्यमियों और समूहों को प्रशिक्षण एवं शोध सहायता प्रदान करने में राष्ट्रीय खाद्य प्रोद्योगिकी उद्यमशीलता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) और भारतीय खाद्य प्रसंस्करण प्रोद्योगिकी संस्थान (IIFPT) राज्य स्तरीय तकनीकी संस्थानों के समन्वय से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. मास्टर ट्रेनर्स, जिला स्तरीय प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे. इसके बाद जिला स्तरीय प्रशिक्षक हितग्राहियों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे. क्षमता निर्माण के तहत दिए जाने वाले प्रशिक्षण का मूल्यांकन और प्रमाणन एफआईसीएसआई द्वारा किया जाएगा

इस योजना में खर्च होंगे 10 हजार करोड़ रुपये- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना, केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित योजना है और आत्मनिर्भर भारत अभियान के अतंर्गत प्रारंभ की गई है. इस योजना का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में असंगठित रूप से कार्य कर रहे छोटे उद्यमियों को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का निर्माण करना है. इसके साथ की इस क्षेत्र से जुड़े कृषक उत्पादक संगठनों, स्व सहायता समूहों सहकारी उत्पादकों सहायता भी प्रदान करना है. इस योजना के तहत 2020-21 से 2024-25 के मध्य 2 लाख सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय, तकनीकी एवं विपणन सहयोग प्रदान करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान रखा गया है.


नई नौकरियां पैदा होंगी और आर्थिक गतिविधियों का होगा विस्‍तार- इस योजना के जरिए सरकार को अगले पांच साल में 20 खरब रुपये के मैन्‍युफैक्‍चरिंग आउटपुट (Manufacturing Output) के जुड़ने का भरोसा है. उन्‍होंने कहा कि इससे नई नौकरियों का सृजन होगा. साथ ही आर्थिक गतिविधियों का विस्‍तार भी होगा. इससे भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लौटाने और देश को सही मुकाम पर पहुंचाने में काफी मदद मिलेगी. बता दें कि उत्तर प्रदेश जनसंख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़ा और क्षेत्रफल के मामले में दूसरा सबसे बड़ा राज्य है. उत्तर प्रदेश के हर जिले में कुछ खास पारंपरिक उद्योग हैं. इन उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट’ योजना शुरू की थी.

हर जिले का होगा अपना एक प्रोडक्‍ट, जो बनेगा उसकी पहचान- उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिले कांच के सामान, लखनवी कढ़ाई, इत्र, चरक के काम, बांस, लकड़ी और चमड़े के सामान के लिए पहचाने जाते हैं. इन उद्योगों से जुड़े कारीगरों की खोई पहचान वापस दिलाने को एमएसएमई सेक्टर के लिए ओडीओपी योजना लाई गई थी. इस योजना के शुरू होने के बाद से कई जिलों का सामान देश-प्रदेश में ही नहीं विदेश तक निर्यात होने लगा है. व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के सभी जिलों का अपना एक प्रोडक्ट होगा, जो उसकी पहचान बनेगा. स्थानीय कला का विकास करना और प्रोडक्ट की पहचान दिलाने के साथ कारीगरों को मुनाफा दिलाना इस योजना का मकसद है.

यूपी में योजना शुरू होने के सालभर में मिली बड़ी सफलता- वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजना की वजह से छोटे-छोटे कारीगरों को स्थानीय स्तर पर ही अच्छा मुनाफा मिलने लगा है. इससे उन्हें अपना घर छोड़कर किसी दूसरी जगह नहीं भटकना पड़ रहा है. जनवरी 2020 में एक कार्यक्रम के दौरान उत्‍तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने कहा था कि राज्‍य अपने परंपरागत उद्यमों से एक साल में पूरे देश के अंदर 28 फीसदी निर्यात करने में सफल हो चुका है. उनकी सरकार राज्य में निवेश का माहौल बनाने के लिए भरपूर प्रयास कर रही है. इसी दौरान अल्‍पसंख्‍यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने कहा कि देश में स्वदेशी वस्तुओं के निर्माण से हजारों लोग रोजगार पा रहे हैं.

कारीगरों को दिया जा रहा है नई टेक्‍नोलॉजी का प्रशिक्षण- योजना के तहत कारीगरों को नई टेक्नोलॉजी का इस्‍तेमाल और प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे उनके प्रोडक्ट बाजार में दूसरे उत्‍पादों की बराबरी कर पा रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक, इससे 2023 तक यूपी में 25 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा. वहीं, कारीगरों को आर्थिक मदद देने के लिए एमएसएमई के तहत बेहद कम ब्याज दरों पर बिजनेस लोन दिया जाएगा.

एक प्रोडक्ट को एक ब्रांड का नाम दिया जाएगा. वहीं, उनके प्रोडक्‍ट की ब्राडिंग, पैकेजिंग पर सरकार काम करेगी. नकवी ने बताया कि असम से बांस, कर्नाटक से चंदन, तमिलनाडु से लेकर केरल और बंगाल समेत देश के हर हिस्से में अपने हुनर की एक मजबूत विरासत है. सरकार इसे व्यवस्थित तरीके से सहेजने की दिशा में काम कर रही है. अब पीयूष गोयल ने भी कहा है कि केंद्र राज्‍यों के साथ मिलकर इस योजना पर काम कर रही है.

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