हरियाणा के इस जिलें में शौचालय में हुई महिला की डिलीवरी, 10 फीट गहरी कुई में गिरी नवजात, 8 घंटे बाद निकाली जिंदा

हिसार. जिले के आदमपुर क्षेत्र के एक गांव की गर्भवती महिला की कुई (शौचालय) में ही डिलीवरी हो गई और नवजात उसी में जा गिरी. करीब 8 घंटे बाद नवजात को कुई से जिंदा बाहर निकाला गया. इसके बाद बच्ची को तुरंत अस्पताल (Hospital) में दाखिल करवाया गया. जहां 4 दिन के उपचार के बाद पांचवें दिन मंगलवार को बच्ची डिस्‍चार्ज किया गया. बच्ची के दादा और दादी ने आरती उतार कर उसका स्वागत (Welcome) किया.

चौधरीवाली गांव में पूजा नाम की विवाहिता के प्रसव समय नजदीक था. शुक्रवार सुबह पूजा घर के शौचालय में गई तो इसी दौरान उसने एक बच्ची को जन्म दिया. प्रसव के तत्काल बाद पूजा बेहोश हो गई. इसी दौरान नवजात शौचालय की कुई में समा गई. कुछ समय के बाद पूजा को होश आया तो बच्चे के रोने की आवाज तो सुनाई दी, मगर वह कहीं नहीं दिखाई दी. पूजा ने परिवार के अन्य सो रहे सदस्यों को तत्काल घटनाक्रम की जानकारी दी.

पूजा के ससुर और परिवार के अन्य लोग भी शौचालय में पहुंच गए. उन्हें भी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी तो पता चला कि आवाज कुई से आ रही है. शोर सुनकर आसपास के लोग भी एकत्रित हो गए। दादा ने कुई का पत्थर हटाने का प्रयास शुरू कर दिया. हालांकि, पत्थर काफी भारी था, सो उसे तोड़ने में कई घंटे का वक्त लगा. जैसे-तैसे पत्थर को तोड़ा गया तो अंदर गंदगी का ढेर जमा था. दादा विष्णु ने इसकी परवाह न कर बमुश्किल नवजात को बाहर निकाल लिया. नवजात एक बच्ची थी.

पांच दिन चली जिंदगी और मौत की आंख मिचौली

जीने की उम्मीद में दादा विष्णु उसे तुरंत आदमपुर के बगला के एसएल मिंडा मेमोरियल अस्पताल ले गए. अस्पताल पहुंचने के दौरान बच्ची की तबीयत खराब होने लगी. अस्पताल की डा. मीनू गोयल ने मासूम की जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष शुरू किया और आखिरकार पांच दिन जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद बच्ची की जान बचा ही ली. मंगलवार को उपचार के बाद बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

सुबह आंगन में टहल रही थी पूजा

बच्ची की मां पूजा ने बताया कि बीते शुक्रवार को वह सुबह चार बजे उठकर आंगन में टहल रही थी. उसे शौचालय जाने की इच्छा हुई. शौचालय में बैठते ही डिलीवरी हो गई. बेहोशी के बाद जब वह उठी तो देखा कुई में से बच्चे के रोने की आवाज आ रही है. बच्ची के पिता  हैं और पेशे से किसान हैं. दादा विष्णु ने बच्ची की जान बचाई और उसका नाम भी दादा ने ही रखा. दादा परी नाम से बच्ची को पुकारते हैं हालांकि अभी विधिवत बच्ची का नामकरण नहीं हुआ है.

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