आज से भारत में बैन हो जाएगा सिंगल यूज प्लास्टिक, पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों के लिए बड़ा झटका

नई दिल्ली:  भारत में एक जुलाई यानी आज से सिंगल यूज प्लास्टिक  का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित होने जा रहा है. सरकार इसमें अब किसी भी तरह की छूट देने के मूड में नहीं है. सरकार के इस फैसले ने सॉफ्ट ड्रिंक, डेयरी प्रोडक्ट, पैक्ड जूस बनाने वाली कंपनियों को तगड़ा झटका दिया है. आज से जब यह फैसला लागू हो जाएगा तो Beverge कंपनिया plastic Straw के साथ अपनी चीजें नहीं बेच पाएंगे. इसीलिए मदर डेयरी, अमूल व डाबर जैसी कंपनियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह अपने इस फैसले को कुछ समय के लिए टाल दें.

आज से बैन होंगी ये वस्तुएं

प्लास्टिक के साथ ईयर-बड, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, सजावट के लिए थर्माकोल, प्लेट, कप,गिलास,कांटे जैसी वस्तुओं के प्रयोग पर रोक लगेगी. भारत सरकार द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए यह कदम उठाए गए हैं.

स्ट्रा पर निर्भर है बड़ा व्यापार

देश के सबसे बड़े डेयरी ग्रुप अमूल  ने कुछ दिन पहले सरकार को पत्र लिखकर प्लास्टिक स्ट्रॉ पर लगने वाले प्रतिबंध को टालने का निवेदन किया था.अमूल, पेप्सिको, कोका-कोला, मदर डेयरी जैसे तमाम कंपनियों के पेय पदार्थ ग्राहक प्लास्टिक स्ट्रॉ के साथ खरीदते हैं. इस वजह से सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग पर प्रतिबंध लगने से पेय पदार्थों की कंपनियां थोड़ी परेशान है. सरकार ने साफ कर दिया है कि कंपनियां वैकल्पिक स्ट्रा पर स्विच कर सकती है.

कंपनियों की बढ़ी मुश्किलें

पारले एग्रो , डाबर और मदर डेयरी  जैसे डेयरी प्रोडक्ट (Dairy Products) बनाने वाली कंपनियां पेपर स्ट्रा का Import करती है. प्लास्टिक स्ट्रॉ के मुकाबले में पेपर स्ट्रॉ की लागत ज्यादा पड़ रही है. लेकिन उत्पादों की बिक्री के लिए कंपनियों को इसका सहारा लेना पड़ रहा है. मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मनीष बंदलिश ने कुछ समय पहले कहा था कि हम पेपर स्ट्रॉ का Import करेंगे. लेकिन फिलहाल यह पेपर स्ट्रॉ प्लास्टिक स्ट्रॉ से 4 गुना महंगे हैं.

क्या है सिंगल यूज प्लास्टिक

सिंगल यूज प्लास्टिक को एक बार प्रयोग करने के बाद फेंक दिया जाता है. इस तरह की प्लास्टिक को रिसाइकिल भी नहीं किया जा सकता है. अधिकतर सिंगल यूज प्लास्टिक को इकट्ठा करके या तो उसमें आग लगा दी जाती है या फिर उसे जमीन के अंदर गाड़ दिया जाता है, जो लंबे समय तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है.

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