दिल्ली पहुंचने की टाइमिंग होगी कम, जानें कब से 130 की स्पीड से दौड़ेगी ट्रेनें

सब कुछ पटरी पर रहा तो नवबंर से कानपुर से दिल्ली के बीच चलने वाली मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों की भी गति 130 किमी की हो जाएगी। अभी इस रूट पर 70 फीसदी ट्रेनें 110 किमी की गति से चलती है और बाकी  130 किमी. की गति से। यह संभव होगा, गाजियाबाद से कानपुर सेंट्रल तक सिग्नल सिस्टम का अपग्रेडेशन। यह काम हरहाल में 31 अक्तूबर तक फिट हो जाएगा।

कोरोना काल में प्रयागराज मंडल ने सिग्नल अपग्रेडेशन का काम बड़ी तेजी से किया है। रेलवे अफसरों ने बताया कि इसके बाद इस ट्रैक पर कभी भी मिनी हाईस्पीड ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। इन ट्रेनों की गति 160 किमी प्रस्तावित है।

दिल्ली का सफर आधे घंटे कम होगा

रेलवे अफसरों की मानें तो मौजूदा में नॉन सुपरफास्ट चल रही ट्रेने जैसे महानंदा, फरक्का अभी लगभग साढ़े सात घंटे में पहुंचाती है पर तब इनके पहुंचने के समय में लगभग 32 मिनट की कमी आएगी।

स्पेशल, क्लोन, हमसफर, जनशताब्दी पर असर नहीं

दिल्ली से कानपुर के ट्रैक को मिनी हाईस्पीड बनाने का काम लगभग अंतिम चरण में है। सिगलिंग का काम भी अपग्रेड हो रहा है। हिरनगांव से कानपुर तक का सिगलिंग सिस्टम 31 अक्तूबर तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद ट्रेनों की गति फुल यानी कि 130 किमी होगी। इस सहूलियत का मौजूदा में चल रही स्पेशल, क्लोन, हमसफर और जनशताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों पर नहीं पड़ेगा क्योंकि मौजूदा में दिल्ली रूट पर बमुश्किल 40 फीसदी ही ट्रेनों का लोड है।

80 की स्पीड के लिए कवर्ड ट्रैक जरूरी

पिछले साल चली वंदेभारत एक्सप्रेस को 180 किमी. की गति से प्रस्तावित की थी बाद में मुख्य संरक्षा आयुक्त ने इस ट्रेन की गति को 130 किमी यह कहकर कर दिया था कि अभी न तो प्रयागराज से वाराणसी के बीच इतनी स्पीड लायक ट्रैक है और न ही दिल्ली से प्रयागराज तक का ट्रैक कवर्ड है। 180 की स्पीड में ट्रेन चलाने पर ट्रैक को कवर्ड करना होगा क्योंकि कानपुर दिल्ली के बीच अवारा जानवर बड़ी संख्या में आते हैं।

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