हरियाणा के ऐसे तीन गांव, जहां नहीं मनाया जाता करवा चौथ, यह है वजह

करनाल। करवा चौथ का व्रत हर सुहागिन महिलाओं के लिए खास होता है। यह पर्व दंपति के बीच त्याग समर्पण के साथ प्रेम का प्रतीक है। इस दिन महिलाए पूरे सोलह श्रृंगार के साथ इस पर्व को धूमधाम से मनाती है। लेकिन हरियाणा में कुछ जगह ऐसी भी है जहां करवा चौथ का व्रत उनके लिए काली रात बनकर आता है जो महिलाए इस व्रत को रखती है उनके पति की मौत हो जाती है।

हरियाणा के करनाल में ऐसे तीन गांव कतलाहेडी, गोंदर और औंगद हैं जो अभी तक किसी के श्राप से मुक्त नही हो पाए है। और इसी के चलते इन जगहों पर अरसे से करवा चौथ का पर्व नहीं मनाया गया है। स्‍थानीय लोगों के अनुसार इस जगह कि कोई भी सुहागिन महिला यदि करवा चौथ का व्रत रखती है तो उसका सुहाग तुंरत ही उजड़ जाता है। इसके पीछे का कारण यह है कि इस गांव के लोगों के परिवार शापित हैं और अरसे पहले हुई भूल का आज भी पश्चाताप कर रहे हैं। हालांकि इन गांवों की बेटियों की शादी बाहर होने के बाद वो करवा चौथ का व्रत कर सकती हैं। तब उनके सुहाग पर किसी तरह का संकट नहीं आता।

इसी मान्यता की वजह से इन गांवों में अरसे से करवा चौथ का व्रत नहीं रखा गया है। जानकार बताते हैं अब से लगभग 600 साल पहले राहड़ा की एक लड़की का विवाह गोंदर के एक युवक से हुई थी। बताते हैं वह लड़की अपने मायके में थी वहीं करवा चौथ से एक रात पहले उसने सपने में देखा कि किसी ने उसके पति की हत्या कर शव को बाजरे के ढेर में छिपाकर रखा है। उसने यह बात मायके वालों से बताई तो करवा चौथ के दिन सभी उसके ससुराल गोंदर गए लेकिन वहां पति से मुलाकात नहीं हुई फिर उसकी बताई जगह में खोजने पर पति का शव मिल गया।


पति की मौत के बाद उस महिला ने अपना करवा चौथ का व्रत गांव की महिलाओं को देना चाहा लेकिन सभी ने इससे मना कर दिया। इस दुख से परेशान महिला करवा सहित जमीन में समा गई। कहते हैं उसके बाद जो भी गांव की सुहाग ने करवा चौथ का व्रत किया वह विधवा हो गई। इस वजह से यहाँ की महिलाएं न तो कभी करवाचौथ का व्रत करती हैं और न ही सिंदूर लगाती हैं।

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