चीन से डरा ये देशः चीनी अफसर से मांगी माफी, फिर किया ये काम…

काठमांडू: चीन की मदद से अपनी कुर्सी बचाने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली में चीन के सामने पूरी तरह सरेंडर कर दिया है। ओली सरकार ने नेपाल की धरती पर चीन की ओर से की जा रही मनमानी पर पूरी तरह आंखें मूंद रखी हैं।

नेपाल की जमीन पर चीनी कब्जे की रिपोर्ट का खुलासा होने पर सरकार ने झटपट उसे खारिज करते हुए चआन को क्लीन चिट देने में तनिक भी देरी नहीं की। अब इसे लेकर मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने ओली सरकार पर हमला बोला है। विपक्ष ने जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बिना चीन को क्लीन चिट दिए जाने पर सवाल उठाए हैं।

विदेश मंत्रालय ने दी चीन को क्लीन चिट

दरअसल ये सारा विवाद नेपाल के विदेश मंत्रालय की ओर से चीन को क्लीन चिट दिए जाने के बाद खड़ा हुआ है। नेपाल के विदेश मंत्रालय का कहना है कि आधिकारिक रिकॉर्ड, जमीन का निरीक्षण और सीमावर्ती इलाके के नक्शे के आधार पर इस बात की पुष्टि हुई है कि चीन की ओर से बनाई गई इमारतें नेपाल की जमीन पर नहीं हैं।

चीन ने नेपाली जमीन पर बनाईं इमारतें

इससे पहले नेपाली मीडिया की ओर से देश की जमीन पर चीन के अवैध कब्जे और इमारतें बनाए जाने का सनसनीखेज खुलासा किया गया था। नेपाल के सीमावर्ती इलाके के लोगों की ओर से भी चीन के अवैध कब्जे की शिकायत की गई थी।

जानकारी के मुताबिक नेपाल के सीमावर्ती हुमला जिले में चीन ने नेपाली जमीन पर कब्जा करते हुए 11 इमारतों का निर्माण कर लिया है। नेपाली मीडिया ने नामखा रूरल म्यूनिसिपैलिटी के अधिकारियों के हवाले से यह रिपोर्ट छापी थी।

सच्चाई बताने वाले अफसर से माफी मंगवाई

नेपाल के विदेश मंत्रालय की ओर से न केवल चीन को क्लीन चिट दे दी गई है बल्कि चीनी घुसपैठ की सच्चाई उजागर करने वाले अधिकारी से माफी भी मंगवाई गई है। हुमला के सहायक मुख्य जिलाधिकारी दत्तराज हमाल ने चीनी अतिक्रमण को दिए गए अपने बयान पर माफी मांगी है। गृह मंत्रालय की ओर से उन्हें नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके जवाब में हमाल की ओर से कहा गया है कि स्थानीय लोगों की बातों पर विश्वास करते हुए उन्होंने गलती की थी।

गृह मंत्रालय ने मांगा था स्पष्टीकरण

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता चक्र बहादुर बुधा ने कहा कि इस बाबत हमाल से स्पष्टीकरण मांगा गया था क्योंकि उनके बयान से दोनों देशों के अच्छे रिश्ते पर नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दों पर हमें बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकारी ने अब अपने बयान पर माफी मांग ली है।

नेपाली कांग्रेस ने सरकार को घेरा

दूसरी ओर मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर ओली सरकार को घेरा है। नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता विश्व प्रकाश शर्मा ने कहा कि विदेश मंत्रालय की ओर से काफी जल्दबाजी में प्रतिक्रिया दी गई है और चीनी कब्जे को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।

सरकार ने विवादित स्थल की जांच पड़ताल करने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट मिलने से पहले ही चीन को क्लीन चिट दे दी। उन्होंने कहा कि नेपाली कांग्रेस की ओर से संसदीय बोर्ड के नेता जीवन बहादुर शाही को इस मामले पर जानकारी जुटाने के लिए हुमला भेजा गया है।

सरकार चीन से दर्ज कराए आपत्ति

उन्होंने कहा कि यदि मौके पर गई टीम पाती है कि चीन ने नेपाल की धरती पर अतिक्रमण कर इमारतें बनाई हैं तो सरकार को इस मामले में सरेंडर करने की जगह कड़ी आपत्ति जतानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक चैनल के जरिए इस मामले का समाधान निकाला जाना चाहिए।

नेपाली कांग्रेस के नेता जीवन बहादुर शाही ने भी विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया को जल्दबाजी में दिया गया बयान बताया। उन्होंने कहा कि चीन को क्लीन चिट देने में सरकार की ओर से हड़बड़ी दिखाई गई है जबकि इस मामले की पूरी गहराई से जांच पड़ताल की जानी चाहिए।

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