40 किलो है इस ताले का वजन, इसे तोड़ना तो दूर कोई खोल भी नहीं पाता, जानिए क्यों

वैसे तो दुनिया में एक से बढ़कर एक कम्पनी के ताले हैं और कम्पनियां उनकी मजबूती का दम भरती हैं. लेकिन, राजा-महाराजाओं के जमाने में भी ऐसे ताले शायद ही मिलते हों, जैसा ताला लुहिंगाकलां गांव के मोहमद हनीफ के घर आज भी लोगों के कौतूहल का केंद्र बना हुआ है

इलाके के लोग इन तालों को देखने और जानने के लिए इस गांव में आते हैं. मोहमद हनीफ के पुत्र ताहिर ने बताया कि उनके पिता ताला रखने के शौकीन थे. वर्ष 2001 में दो हजार रुपये में उन्होंने ढाई किलो वजनी ताला खरीदा था, जो मेड इन जापान था.


उसके बाद उन्होंने 40 किलोग्राम यानि एक मन वजनी ताला नूंह जिले के पुन्हाना से बनवाकर रखा. मोहमद हनीफ ने कुछ माह फ़ौज की नौकरी भी की, लेकिन मां के लाड़-प्यार की वजह से सेना की नौकरी छोड़ दी. उसके बाद खेती-बाड़ी करके परिवार का गुजारा किया.

मोहमद हनीफ के दो लड़का और दो लड़की हैं. मरहूम मोहमद हनीफ ने अपनी औलाद से कहा कि इस अमानत को संभालकर रखना. इसे बुरे दौर में भी बेचना नहीं है. आने वाली पीढ़ी भी उनके इस शौक की गवाह बनेंगी.

इस अजब-गजब शौक के साथ-साथ पुरानी धरोहर भी आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण एवं मिशाल पेश करेंगी. मोहमद हनीफ का सपना था कि एक दिन उनका आलीशान घर होगा, जिसमें सुरक्षा के लिहाज से इतना भारी भरकम ताला लगाया जाएगा कि जिसे तोड़ना तो दूर जल्दी से कोई खोल भी नहीं पाएगा.

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