हरियाणा के आढ़तियों की चमकी किस्मत, जानिए कैसे

हरियाणा। हालिया समय में केंद्र सरकार तीन विषयों पर कृषि अध्यादेश लेकर आई है जिन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है। ये तीनों अध्यादेश भारत के करोड़ों किसान और आढ़तियों के परिवारों के भविष्य से जुड़े हुए हैं। जिसको लेकर किसानो और आढ़तियों ने धरना प्रदर्शन भी किए। तो वही दूसरी तरफ हरियाणा के हजारों आढ़तियों की बल्ले-बल्ले हो गई है। दरअसल गेहूं की फसल के लस्टर लॉस के नाम पर खरीद एजेंसियों द्वारा आढ़तियों से वूसली गई करोड़ों रूपये की राशि अब वापस उनके खातों में पहुंच गई है।

बतादे कि आढ़तियों की मांग की थी उनके खाते से लस्टर लॉस की राशि न काटी जाए बल्कि सरकार स्वयं इस लॉस को वहन करें। द फूड ग्रेन डीलर एसोसिएशन, उचाना के पदाधिकारियों, सदस्यों सहित अन्य आढ़ती एसोसिएशन ने सितंबर माह में चंडीगढ़ में उपमुख्यमंत्री से मिलकर लस्टर लॉस की रकम वापस करने की मांग की थी। उचाना एसोसिएशन के प्रधान विरेंद्र उचाना ने कहा कि लास्टर लॉस कटने से प्रदेश के आढ़तियों की जेब पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

उनका कहना था कि प्रदेशभर के हजारों आढ़तियों के खातों से करोड़ों रूपये की राशि हैफेड, फूड कारपोरेशन आफ इंडिया, हरियाणा वेयर हाउस कारपोरेशन द्वारा वसूली गई थी। गौरतलब है कि प्रदेश में विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई गेहूं की सरकारी खरीद में खरीद एजेसियों ने लस्टर लॉस के रूप में लस्टर 9 रुपए 62 पैसे प्रति क्विंटल की दर से राशि काट ली थी। प्रदेशभर में लस्टर लॉस की दर क्षेत्रवार भिन्न-भिन्न थी। लस्टर लॉस का आर्थिक बोझ प्रदेश के हजारों आढ़तियों की जेब पर पड़ा था।

बतादे कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का जिम्मा संभाल रहे उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने इस मांग को पूरा करने को लेकर आढ़तियों को लेकर आश्वस्त किया था। आढ़तियों की अब यह मांग पूरी हो गई है और अधिकांश आढ़तियों के लस्टर लॉस की राशि उनके खातों में यह पहुंच गई है, जिससे प्रदेश के हजारों आढ़तियों को लस्टर लॉस का नुकसान नहीं झेलना पड़ेगा।

प्रदेश सरकार के इस फैसले से प्रदेशभर के करीब 22 हजार गेहूं खरीददारों को करीबन 50 करोड़ रूपये की लस्टर लॉस की राशि उनके खातों में पहुंची है। इसके साथ ही आढ़तियों की लस्टर लॉस की वापसी की प्रमुख मांग पूरी हो गई है। इसके लिए आढ़ती एसोसिएशन ने डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला का आभार व्यक्त किया है। लस्टर लॉस की यह राशि सरकार स्वयं वहन करेगी।

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