इस बड़े अस्पताल की दहलीज पर अटकी रहती हैं मरीजों की सांसें

पटना :  कोरोना संकट में बिहार में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के भगवान ही मालिक हैं क्योंकि अस्पताल में मरीजों को आसानी से भर्ती नहीं लिया जाता है| आलम यह है कि मरीज को भर्ती करवाने में परिजनों के पसीने छूट रहे हैं और अस्पताल की दहलीज पर मरीजों की सांसें अटकी रहती है| सबसे बुरा हाल गरीब मरीजों का है जो पैसे के अभाव में प्राइवेट अस्पताल भी नहीं जा सकते| कोरोना काल मे बिहार के सबसे हाईटेक कहे जाने वाले अस्पताल आईजीआईएमएस की तस्वीरें बदरंग दिखने लगी हैं तो सिस्टम पर भी सवाल उठने लगे हैं| ऐसे तो ये कोविड अस्पताल भी नहीं है, लेकिन नॉन कोविड होते हुए भी इसमें भर्ती करवाना मैराथन जीतने के बराबर है|

भर्ती नहीं होने की वजह भी हम बताएंगे लेकिन उससे पहले जानिए की इमरजेंसी मरीजों के साथ क्या परेशानी हैं| मरीजों में कोई सीतामढ़ी तो कोई दरभंगा तो कोई मोतिहारी से आये हैं| इनमें किडनी, हार्ट, लकवा, कैंसर समेत कई बीमारियों के मरीज हैं, लेकिन इन्हें भर्ती तक नहीं लिया गया| कोई स्ट्रेचर पर भर्ती होने का इंतजार कर रहा है तो कोई 3 दिनों से फर्श पर ही बाहर लेटा पड़ा है और पर्चा निकालकर मरीज होने की सबूत दे रहा है|

मोतिहारी से आये परिजन मुन्ना तिवारी तो चक्कर लगाकर थक गए, लेकिन मरीज को भर्ती नहीं लिया गया| वहीं अपनी सास को भर्ती करवाने आये मुंगेर के मोहम्मद असलम तो एम्बुलेंस में ही मरीज को दर्द की दवा खिलाकर तकलीफ कम करने में जुटा है| क्योंकि अस्पताल में भर्ती नहीं लिया गया।यहां भर्ती होने आए मरीज क्या इस भीषण गर्मी में परिजनों का भी अधिकारियों का चक्कर लगाते-लगाते हालत खराब हो गयी है|

इनमें ज्यादातर ऐसे मरीज हैं जो किसी तरह अस्पताल पहुंच तो गए यह सोचकर कि सरकारी है मुफ्त में इलाज हो जाएगा, लेकिन इलाज तो दूर यहां रजिस्ट्रेशन के बावजूद भर्ती करवाना सम्भव नहीं हो सका| मरीज हों या परिजन कर्मचारी से लेकर अधिकारी गक गुहार लगाकर थक चुके हैं, लेकिन कोरोना का खौफ ही है कि बेड रहते बेड नसीब नहीं हो रहा है|

सीतामढ़ी से किडनी मरीज बेटे को गम्भीर हालत में पिता जयनारायण पासवान यह सोचकर आईजीआईएमएस लाया था कि इलाज हो सकेगा लेकिन यहां तो हालात कुछ और ही है| वहीं पति का इलाज करवाने दरभंगा से पहुंची मुन्नी देवी तो फूट-फूटकर रो रही हैं कि पैसे नहीं हैं, अब कहां जाएं|

वहीं, पूरे मामले पर अस्पताल के अधीक्षक डॉ मनीष मंडल कहते हैं कि कोरोना की वजह से गंभीर मरीजों को जनरल आईसीयू में भर्ती नहीं किया जा रहा है क्योंकि किस मरीज में कोरोना पॉजिटिव होगा ये कोई नहीं जानता|

वे कहते हैं कि अभी एचडीयू लगाकर कुल 6 आईसीयू ही है जहां गंभीर मरीजों को भर्ती लिया जा रहा है जो कि अलग अलग वार्ड में बनाया गया है जबकि जनरल आईसीयू में सभी बेड कम्बाइन्ड है|

अधीक्षक की मानें तो 6 बेड के आईसीयू में भर्ती होने में वास्तव में कठिनाई है क्योंकि मरीज ज्यादा है और सिंगल आईसीयू कम है|

हालांकि कोविड को लेकर सावधानियां बरती जा रही है इससे इनकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि नन कोविड अस्पताल होते हुए भी अबतक 20 से ज्यादा मरीज यहां कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं|

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