करनाल के हाईप्रोफाइल मामले में आरोपी पक्ष के वकील दीपक वढेरा ने रखा पक्ष

इंडिया ब्रेकिंग/करनाल रिपोर्टर (ब्यूरो) करनाल। गैंगरेप व हनीट्रैप मामले को लेकर वीरवार को एडवोकेट दीपक वढेरा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि निर्दोष व्यक्ति को किसी भी सूरत में सजा नहीं होनी चाहिए। दोनों पक्षों को जांच एजेंसी को पूर्ण सहयोग करना चाहिए। कुछ लोग इस मामले को राजनीतिक लाभ लेने के लिए जातीय रंग देना चाहते हैं, जो निंदनीय है। कई बार देखने में आया है कि दबाव के कारण जांच एजेंसियां आनन-फानन में आरोपी को गिरफ्तार कर लेती हैं और सालों बाद वह निर्दोष साबित होता है।

इस दौरान उसे व उसके परिवार को जो परेशानियां व सामाजिक दबाव झेलना पड़ता है उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। इसलिए ही कानून में व्यवस्था की गई है कि जघन्य अपराध होने पर तुरंत प्रभाव से एफआईआर दर्ज की जाए और उसके बाद जांच की जाए। कुछ लोगों ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस मामले में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर जनता के सामने पेश किया है, जबकि सच्चाई जांच एजेंसी की सामने है। जांच एजेंसी को महिला के खिलाफ इतने सुबूत दिए गए हैं कि उन्हें दरकिनार किया ही नहीं जा सकता।

एडवोकेट दीपक वढेरा ने कहा कि वे नारी शक्ति का सम्मान करते हैं इसलिए आजतक उन्होंने महिला की कोई भी ऑडियो मीडिया या जनता के सामने उजागर नहीं की। उनके पास कई वीडियो हैं, जिनमें महिला व उसके पति खुल्लमखुल्ला रुपए मांग रहे हैं, जो जांच एजेंसी को दे दी गई हैं। इन रिकॉडिंग को सिर्फ इसलिए जारी नहीं किया गया है क्योंकि मामला महिला से जुड़ा हुआ है। उन्होंने ब्राह्मण समाज के मौजिज लोगों से आह्वान किया कि वे उनके पास आएं या उन्हें अपने पास बुलाएं, वे सारी रिकॉडिंग सुनाने के लिए तैयार हैं।

रिकॉडिंग सुनने के बाद भी यदि उन्हें लगता है कि महिला के साथ अन्याय हुआ है या उन्हें फंसाया गया है तो वे आंदोलन का रास्त अख्तियार करें। उन्हेंने अपील करते हुए कहा कि इस मामले को जातीय रंग न दिए जाए, क्योंकि इससे शहर व समाज का माहौल खराब होता है। उन्होंने कहा कि महिला ने रुपए की डिमांड की थी, जिसकी रिकॉर्डिंग जांच एजेंसी को दे दी गई है। इसने ब्लैकमेल कर लाखों रुपए लिए और फिर ज्यादा पैसे मांगने लगी तो उन्हें मजबूरन शिकायत करनी पड़ी। इससे संबंधित रिकॉर्डिंग भी जांच एजेंसी को दी गई हैं।

जो भी व्यक्ति ये रिकॉर्डिंग सुनना चाहे उनके पास आकर सुन सकता है। उन्होंने कहा कि अब मामले की जांच कैथल पुलिस को दे दी गई है। इससे पहले कभी भी महिला की तरफ से कोई भी पत्र किसी पुलिस अधिकारी को नहीं दिया गया, जिसमें लिखा हो कि उसे न्याय नहीं मिल रहा है। पुलिस को महिला ने कभी कोई ऑडियो नहीं दी क्योंकि पुलिस के पास पर्याप्त आडियो हैं, जिनसे साबित होता है कि यह ब्लैकमेलिंग का केस है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में ब्राह्मण सभा के एक पदाधिकारी के खिलाफ पुलिस में शिकायत आई थी कि उसने जबरन रेप का प्रयास किया, इस मामले में स्वयं ब्राह्मण सभा ने पहले जांच करने और बाद में गिरफ्तार करने की बात कही थी। इस मामले में यही लोग पहले गिरफ्तार करने और बाद में जांच करने की बात कर रहे हैं। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि उसे घर पर अकेला पाकर इस पदाधिकारी ने उससे रेप करने का प्रयास किया और उसकी सास ने चिल्लाने की आवाज सुनकर उसे छुड़वाया।

उन्होंने अपील की कि निर्दोष व्यक्ति को कभी भी सजा नहीं मिलनी चाहिए और दोषी बचने नहीं चाहिएं। उन्होंने ब्राह्मण समाज से कहा कि वे उनके सामने अपना पक्ष रखने के लिए तैयार हैं, उन्हें जब भी बुलाया जाएगा वे तुरंत अपना पक्ष रखने के लिए हाजिर हो जाएंगे। पक्ष सुनने के बाद ब्राह्मण समाज जो सजा सुनाएगा उन्हें कबूल होगी, लेकिन एकतरफा बात सुनने के बाद कोई भी निर्णय नहीं लेना चाहिए। पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए एडवोकेट दीपक वढेरा ने कहा कि महिला पहले भी कई बाद झूठी शिकायतें दे चुकी है और अब उसने रेप का केस दर्ज करा दिया है। पूर्व में दी गई किसी भी शिकायत में रेप का आरोप नहीं लगाया गया है।

उन्हेंने कहा कि महिला ने अपनी सात-आठ पेज की शिकायत में किसी भी तारीख का जिक्र नहीं किया है, जिस दिन उसके साथ रेप हुआ हैे। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज ऐसा कोई भी निर्णय न ले जिससे आपसी भाईचारा खराब हो या समाज में गलत कार्य करने वालों का हौसला बढ़े। उनका पक्ष जानने के बाद ही आगामी कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि वे किसी भी जांच एजेंसी से जांच करा लें, वे पूर्ण सहयोग के लिए हर समय तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि वे सच्चे हैं और सिर्फ महिला के सम्मान को देखते हुए अबतक उनकी कोई भी ऑडियो जारी नहीं की गई है। हालांकि उनके पास ऐसी कई ऑडियो हैं जो यह साबित करने के लिए काफी हैं, कि यह केस कुछ षडय़ंत्रकारी लोगों के साथ मिलकर सिर्फ पैसे ऐंठने के लिए दर्ज कराया गया है। किसी भी निर्दोष व्यक्ति को तभी गिरफ्तार किया जाना चाहिए जब वह जांच में दोषी साबित हो जाए।

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