चारदीवारी और खाई से घिरा है ये शहर, महाभारत से भी पुराना है इतिहास!

कोटा- राजस्थान के अलवर शहर के बारे में इतिहास में बेहिसाब जानकारी और आंकड़े मौजूद हैं. ऐसे में हिंदी उन्हीं जानकारियों में से आपके लिए कुछ बेहद खास जानकारियां लेकर आया है. राजस्थान को और भी करीब से जानने-समझने में ये हमारी एक कोशिश मात्र है, ताकि भारत की जिन विविधताओं की हम चर्चा करते हैं उनसे और भी अधिक जुड़ सकें.

पर्यटन का एक ख़ास केंद्र

दिल्ली से तकरीबन 150 किलोमीटर दक्षिण और जयपुर से 150 किलोमीटर उत्तर में बसा अलवर शहर कई किलों, झीलों, हेरिटेज हवेलियों और प्रकृति भंडार के साथ पर्यटन का एक ख़ास केंद्र है. राजस्थान का यह ख़ूबसूरत शहर अरावली पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है. इतिहास के मुताबिक अलवर को पहले   ‘मत्स्यनगर’, ‘अरवलपुर’, ‘उल्वर’, ‘ शालवापुर’, ‘सलवार’, ‘हलवार ‘ के नामों से भी जाना जा चुका है. यही नहीं अलवर को राजस्थान का सिंह द्वार भी कहा जाता है. चारदीवारी और खाई से घिरे अलवर को सन 1775 में रजवाड़े की राजधानी भी बनाया गया था.

महाभारत काल से भी पुराना है इतिहास

अलवर को मेव राजपूत नाहर खा के वंसज अलावल खां ने अपनी राजधानी बनाया था. कहा जाता है कि उन्हीं के नाम पर ही इसका नाम अलवर पड़ा. इतिहास में अलवर की कई कहानियां मौजूद हैं, जिसमें कहा जाता है कि इस शहर का इतिहास महाभारत काल से भी पुराना है. वहीं माना जाता है कि इसी काल से अलवर को क्रमिक इतिहास प्राप्त हुआ है. बताया जाता है कि महाभारत के युद्ध से पहले यहां राजा विराट के पिता वेणु ने मत्स्यपुरी नाम का शहर बसाया और उसे राजधानी भी बनाया. जिसके बाद राजा विराट ने अपने पिता की मौत के बाद यहां से ३५ मील दूर विराट (अब बैराठ) नाम का एक नगर बसाकर प्रदेश की राजधानी बनाया था. कहा जाता है कि विराट नगरी से लगभग 30 मील पूर्व की ओर स्थित पर्वतमालाओं के मध्य सरिस्का में पाण्डवों ने अज्ञातवास के समय निवास किया था.

पहनावे की बात करें तो अलवर में धोती-कुर्ता और साफा (सिर पे पहनने का) पुरुषों का पहनावा है. वहीं स्त्रियां लहंगा-लूगड़ी पहनती हैं.

फतहगंज गुम्बद

अलवर का फेमस फतहगंज का मकबरा 5 मंजिला है और दिल्ली में स्थित अपनी समकालीन सभी इमारतों में सबसे उच्च कोटि का है. कहा जाता है कि खूबसूरती के मामले में यह हुमायूं के मकबरे से भी अधिक ख़ूबसूरत है. यह मकबरा एक बगीचे के बीच में स्थित है और इसमें एक स्कूल भी है जोकि हर दिन सुबह 9 बजे से पहले खुल जाता है.

सिटी पैलेस

कहते हैं कि अलवर आये और सिटी पैलेस नहीं देखा तो क्या देखा? यहां का सिटी पैलेस एक खूबसूरत परिसर है. जिसके गेट के पीछे एक मैदान में फेमस कृष्ण मंदिर हैं. वहीं इसके ठीक पीछे मूसी रानी की छतरी और अन्य दर्शनीय स्थल हैं. बताया जाता है कि इस महल का निर्माण सन 1793 में राजा बख्तावर सिंह ने कराया था. इस इमारत के सबसे ऊपरी तल पर तीन हॉल्स में विभक्त म्यूजियम भी है जिसे देखने का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक है, शुक्रवार को यह बंद रहता है.

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