सुप्रीम कोर्ट ने ससुराल में बहू के इस अधिकार को लेकर सुनाया ये ऐतिहासिक फैसला

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic violence) के तहत बहू (Daughter-in-law) को अपने पति के माता-पिता के घर में रहने का अधिकार है. जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने तरुण बत्रा मामले में दो न्यायाधीशों की पीठ के फैसले को पलट दिया है.

बता दें कि इससे पहले तरुण बत्रा केस में दो जजों की बेंच ने कहा था कि कानून में बहू, अपने पति के माता-पिता के स्वामित्व वाली संपत्ति में नहीं रह सकती हैं. गुरुवार को अब तीन सदस्यीय पीठ ने इस केस की सुनवाई करते हुए तरुण बत्रा के फैसले को पलटते हुए 6-7 सवालों के जवाब दिये हैं और ये साफ़ कर दिया है कि पति की अलग-अलग संपत्ति में ही नहीं, बल्कि साझा घर में भी बहू का अधिकार है.

हाथरस केस पर कही ये बात

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले (Hathras Case) में 19 साल की लड़की के साथ कथित तौर हुए गैंगरेप और जबरन लाश जलाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. अदालत में इस दौरान कई मसलों पर तीखी बहस भी देखने को मिली. यूपी सरकार ने पीड़िता के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराए जाने का ब्यौरा दिया. वहीं, पीड़ित परिवार ने कोर्ट में केस का ट्रायल दिल्ली ट्रांसफर करने की अपील की. मामले की सुनवाई के अंत में चीफ जस्टिस (CJI) एसए बोबडे ने कहा कि उन्होंने आरोपी, सरकार, पीड़ित को सुन लिया है और अब पूरे संसार की राय नहीं लेंगे. ऐसे में किसी नए याचिकाकर्ता को इसमें नहीं सुनेंगे.

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