कनाडा गए स्टूडेंट्स पर गिरी गाज…अब आना पड़ेगा वापिस, कनाडियन इमिग्रेशन से आई हैरान कर देने वाली खबर

कनाडा गए विद्यार्थियों के लिए एक जरूरी खबर सामने आई है। दरअसल, फर्जी स्टूडेंट्स को डिपोर्ट किया जाएगा। पंजाब समेत 103 भारतीय स्टूडेंट्स को वापिस भेजा जाएगा क्योंकि कनाडा ने फर्जी इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को अपने देश में एंट्री देने से मना कर दिया है। इसके साथ ही फर्जी इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को कनाडा में एंट्री करने से रोकने के लिए नियमों को सख्त करना शुरू कर दिया है।

शुक्रवार देर रात घोषित किए गए नए वीजा नियमों के तहत कनाडा के किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए स्टडी परमिट जारी करने से पहले एडमिशन लेटर को उस कॉलेज या यूनिवर्सिटी से वेरिफाई करवाया जाएगा। वहां से वेरिफिकेशन होने के बाद ही स्टूडेंट्स को स्टडी वीजा जारी होगा।

फर्जी स्टूडेंट को कनाडा में प्रवेश नहीं

नए स्टडी वीजा नियमों को जारी करते हुए कनाडियन इमिग्रेशन मिनिस्टर मार्क मिलर ने कहा कि फर्जी एडमिशन लेटर्स हमारे लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण है।  ऐसे मामलों में हम स्टूडेंट्स की मदद भी करेंगे। मैं बीते कई सप्ताह में काफी सारे इंटरनेशनल स्टूडेंट्स से मिला हूं और उनको कई तरह की समस्याएं पेश आई हैं। उन्होंने कहा कि सही स्टूडेंट्स को कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी जबकि फर्जी को कनाडा में प्रवेश नहीं मिलेगा।

फर्जी स्टूडेंट्स को किया जाएगा डिपोर्ट

फर्जी एडमिशन मामलों को पकड़ने के लिए इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटीजनशिप कनाडा (ircc) ने एक स्पेशल ircc task force बनाई है। इसने 1500 से अधिक स्टूडेंट्स के वीजा एप्लीकेशन पहले ही फर्जी एडमिशन लेटर पाए जाने पर पकड़ लिए। इसके 450 स्टूडेंट्स फर्जी एडमिशन लेटर के सहारे किसी न किसी तरह से कनाडा पहुंच गए। इनमें से 263 मामले की जांच की जा रही है, जिनमें से 63 मामले सही पाए गए हैं और 103 को फर्जी पाया गया है। इनमें करीब 25 मामले पंजाब के स्टूडेंट्स से भी संबंधित हैं। फर्जी स्टूडेंट्स को डिपोर्ट किया जाएगा। जिन मामलों में स्टूडेंट्स की गलती नहीं पाई गई, उनको अस्थायी तौर पर स्टडी वीजा देकर आगे पढ़ाई जारी रखने का मौका दिया जाएगा। हालांकि जालंधर के वीजा कंसल्टेंट द्वारा भेजे गए 700 स्टूडेंट्स का मामला अलग है, जिसकी अलग से जांच जारी है।

पंजाब में स्टूडेंट्स को अक्सर फर्जी एजेंट्स के चलते इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ता है। एडमिशन लेटर पहले ही वेरिफाई होने से उनको कनाडा जाकर होने वाली परेशानी से राहत मिलेगी। कनाडा में आने वाले कुल इंटरनेशनल स्टूडेंट्स में से 40 फीसदी से अधिक भारतीय स्टूडेंट्स हैं। बीते सालों में स्टूडेंट्स से कई अलग-अलग तरह के फ्रॉड के मामले सामने  आए हैं। जालंधर में एक स्टडी वीजा कंसल्टेंट ने 700 से अधिक स्टूडेंट्स को फर्जी एडमिशन लेटर के आधार पर कनाडा पहुंचा दिया था।

कनाडा सरकार के लिए खड़ी हुई मुश्किलें

माना कि स्टूडेंट्स के बिना कनाडा की लेबर शॉर्टज को पूरा करना मुश्किल है। हालांकि कनाडा को स्किल लेबर की मांग पूरी करने में अब भी मुश्किल हो रही है। इसके लिए आने वाले दौर में और नए प्रोग्राम शुरू करने होंगे ताकि कंस्ट्रक्शन से लेकर ऑयल सेक्टर तक की सभी तरह की इंडस्ट्रीज की मांग को पूरा किया जा सके

20 अरब डॉलर की इंडस्ट्री है कनाडा के लिए… कनाडियन इमिग्रेशन मंत्री मिलर ने कहा | कि कनाडा को इंटरनेशनल स्टूडेंट्स से करीब 20 अरब डॉलर प्राप्त होंगे। ये एक सफल बिजनेस | मॉडल बन चुका है और हम इसको खराब नहीं करना चाहते हैं लेकिन शॉर्ट टर्म गेन के लिए लॉन्ग टर्म पेन नहीं ले सकते। इसलिए जितना जल्दी हो सकेगा, स्टडी वीजा प्रोसेस की कमियों को उतना जल्दी पूरा किया जाएगा। इस मौके पर पंजाबी मूल की लिबरल एमपी सानिया सिद्ध ने भी कहा कि दुनिया भर से आने वाले स्टूडेंट्स के हितों की रक्षा करना जरूरी है। ऐसे में नए नियम उनकी मदद करेंगे।

एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स पर भी सख्ती

मिलर ने कनाडा में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की सुविधा के लिए कॉलेजों और इंस्टीट्यूट की एक्रीडिएशन को भी शुरू करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हालांकि ये संबंधित राज्यों का विषय है। लेकिन हम उनके साथ सहयोग करते हुए पब्लिक और प्राइवेट लर्निंग इंस्टीट्यूट्स की एक्रिडिएशन का प्रोसेस भी शुरू करेंगे। इससे कनाडा में फर्जी इंस्टीट्यूट्स पर भी लगाम लगाने में मदद मिलेगी। इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की समस्याओं के समाधान के लिए आईआरसीसी टास्क फोर्स का दायरा बढ़ाया जाएगा

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