एक परिवार की अनोखी कहानी…पिता से आठ साल बड़ा बेटा, 16 साल में तीन पोती भी

लखीमपुर। चेतराम के बेटे का जन्म उसके जन्म से आठ साल पहले हुआ। यह बेटा महज 12 साल की उम्र होते ही एक बेटी का पिता बन गया। यानी चार साल में चेतराम एक पोती का दादा बन गया। फिर दो पोतियों का जन्म और हुआ। इसके बाद 16 साल की उम्र में चेतराम की मौत हो गई। इन 16 सालों में वह एक बेटे का पिता, एक बहू का ससुर और तीन पोतियों का दादा था। चौंकिए मत, हम कोई फंतासी नहीं सुना रहे। भले यह सब पढ़कर आपको यकीन न हो रहा हो लेकिन, यह एक सरकारी कागज पर एक परिवार का ब्योरा है।

इस खास सरकारी कागज की विश्वसनीयता ही कटघरे में है।

इस कागज़ को परिवार रजिस्टर कहा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसकी नकल ग्राम पंचायत अधिकारी ने बाकायदा प्रमाणित करके जारी की है। अब अधिकारी इसे स्वीकार करें तो वास्तव में वह चमत्कारी माने जाएंगे। अगर अस्वीकार करें तो सवाल यह कि उनकी मोहर और दस्तखत तक पहुंच किसकी है। अगर मोहर व दस्तखत भी फर्जी घोषित कर दिए जाएं तो इस खास सरकारी कागज की विश्वसनीयता ही कटघरे में है।

ये है पूरा मामला

ईसानगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बरारी के ग्राम पंचायत अधिकारी ने 24 दिसंबर 2020 को परिवार रजिस्टर की एक नकल जारी की है। इस नकल के मुताबिक परिवार के मुखिया चेतराम का जन्म एक जनवरी 1995 को और मृत्यु छह जुलाई 2011 को हुई। इनकी पत्नी जलपत्ता का जन्म एक जनवरी 1993 और मौत 18 अक्टूबर 2013 को हुई। यानी पत्नी उम्र में पति से दो साल बड़ी थी और उसकी मौत भी पति से दो साल बाद हुई।

इसी कागज के अनुसार चेतराम के बेटे बवाली का जन्म एक जनवरी 1987 को हुआ। अर्थात पिता के जन्म से आठ साल पहले। बवाली और उसकी पत्नी मेनका की तीन पुत्रियां हैं। रूपा, सोनी और रागिनी। इनका जन्म क्रमशः 1999, 2002 और 2006 में हुआ है। इस तरह अपने पीछे एक भरा पूरा परिवार छोड़ कर चेतराम की 16 वर्ष और उसकी पत्नी जलपत्ता की 18 वर्ष में मौत हो गई। अब आप इसे जो समझना चाहें समझें। सरकारी कागज का मजमून है तो सच ही होगा।

जिम्मेदार की सुनिए

‘यह बहुत गंभीर त्रुटि है। संभव है किसी जालसाज ने इसे बना दिया हो। जांच करेंगे और ऐसे मामलों को रोकने के लिए कड़े कदम भी उठाएंगे।’   -अरुण कुमार सिंह, बीडीओ, ईसानगर।

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