हरियाणा में इन तीन चरणों में खोले जायेंगे स्कूल, पहले चलेंगी डेमो कक्षाएं

हरियाणा में स्कूल खोलने की कवायद तेज हो गई है। सरकार तीन चरणों में स्कूलों को खोलेगी। स्कूल खोलने से पहले डेमो कक्षाएं चलाई जाएंगी। शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि 10वीं, 11वीं और 12वीं की कक्षाएं सबसे पहले शुरू होंगी। छठी से नौवीं कक्षा उसके बाद शुरू करेंगे।

सबसे अंत में पहली से पांचवी तक की कक्षाएं शुरू करने का विचार है। इस पर भी विचार किया जा रहा है कि आधे बच्चे एक दिन बुलाए जाएंगे और आधे अगले दिन। दूसरा विचार यह है कि आधे बच्चों को सुबह के समय बुलाया जाए व आधे बच्चों को शाम को। जिला स्तर पर कमेटियां बना दी गई हैं, सुझाव लिए जा रहे हैं। विशेषज्ञों की राय है कि कोरोना लंबे समय तक चलेगा। कोरोना के डर से बैठा नहीं जा सकता। कोरोना के साथ ही जीना है।

विज्ञान संकाय चुनने वालों की होगी परीक्षा

शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो बच्चे 11वीं क्लास में आर्ट और कॉमर्स संकाय लेंगे, उनका रिजल्ट औसत आधार पर तैयार किया जाएगा। जो बच्चे साइंस संकाय लेंगे, उनके बचे हुए एग्जाम होंगे। सोमवार तक दसवीं का रिजल्ट आ जाएगा। 1 से 15 जुलाई तक 12वीं के एग्जाम होंगे।

45 सदस्यीय समिति जुटाएगी स्कूल खोलने को लेकर फीडबैक

हरियाणा सरकार ने स्कूलों को खोलने के जमीनी स्तर से बड़े स्तर पर फीडबैक जुटाने का कार्य भी शुरू कर दिया है। जिलों में 45 सदस्यीय समितियां गठित की गई हैं। ये स्कूल खोलने के तौर-तरीकों को लेकर 13 बिंदुओं पर अभिभावकों समेत सभी हितधारकों की राय लेंगी। रायशुमारी कर इन्हें 7 जून तक शिक्षा निदेशालय को रिपोर्ट भेजनी होगी।

सभी डीइओ, डीईईओ को इस संबंध में निर्देश दिए जा चुके हैं। जिला स्तरीय समिति का अध्यक्ष डीईओ व डीईईओ में से जो भी वरिष्ठ होगा, वह रहेगा। डाइट के प्रधानाचार्य सदस्य होंगे। सरकारी व निजी उच्च व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के पांच-पांच वरिष्ठ प्रिंसिपल, निजी व सरकारी प्राथमिक व मिडिल स्कूलों के 5-5 वरिष्ठ मुखिया, निजी व सरकारी स्कूलों के शिक्षक व अभिभावक संगठनों के 5-5 प्रतिनिधि, मीडिया जगत व माता-पिता एवं अभिभावक संघ के 5-5 सदस्य इसमें शामिल किए गए हैं। ये समितियां अपने-अपने जिलों में यह राय लेंगी कि शारीरिक दूरी कैसे बनाए रखें।

स्वास्थ्य व सैनिटाइजर प्रोटोकॉल कैसे लागू हो। भवनों को विद्यार्थियों अनुकूल किस तरह बनाया जाए। परिवहन सुविधा में कैसे बदलाव हो। मिड-डे मील सिस्टम कैसे बदलें। खाना खाते समय विद्यार्थी किस तरह संपर्क में न आएं। सफाई व सैनिटाइजेशन को कैसे बढ़ाया जाए। विद्यार्थियों को लाने ले जाने की व्यवस्था किस तरह की हो।

संक्रमण रोकने के प्रबंध कैसे करें व शिक्षकों और विद्यार्थियों का अनिवार्य कोविड टेस्ट किस तरह कराया जाए। दूरवर्ती शिक्षा को ही अगर जारी रखनी हो तो उसकी योजना। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों का समाधान व विद्यार्थियों एवं अभिभावकों की उम्मीदों को कैसे पूरा करेंगे, इसे लेकर जनता के विचार जानेंगी। उनकी राय को मद्देनजर रखकर ही अंतिम निर्णय पर पहुंचा जाएगा।

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