करनाल के कैमला गाँव में हुए नुकसान को लेकर किसानों को हरियाणा सरकार देगी ये लाभ

करनाल/चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार कैमला गांव में रविवार को मुख्यमंत्री की किसान महापंचायत के दौरान हुए उपद्रव में किसानों के फसलों को हुए नुकसान की भरपाई करेगी। महापंचायत के दौरान आंदोलनकारी किसानों के विरोध के चलते गांव के किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा। इसके साथ ही लोगों को अन्‍य नुकसान भी हुए।

घरौंडा के भाजपा विधायक हरविंदर कल्याण ने बताया कि गांव के लोगों को हुए नुकसान की भरपाई हरियाणा सरकार की ओर से की जाएगी। इसको लेकर उन्होंने सीएम मनोहर लाल से बात की। इस संबंध में डीसी और अन्य सक्षम अधिकारियों को नुकसान के आकलन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कि रविवार को किसानों की फसल रौंद दी गई, टेंट में तोड़फोड़ की गई, म्यूजिक सिस्टम खराब किया गया। इसके चलते जो भी नुकसान हुआ है उसकी भरपाई राज्य सरकार की ओर से कराई जाएगी।

उन्होंने दावा किया कि किसान महापंचायत सफल रही। बस इसमें सीएम मनोहर लाल खट्टर भाग नहीं ले पाए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़, कई मंत्रियों और बड़े नेताओं ने यहां किसानों को संबोधित किया। हजारों की संख्‍या में किसान इसमें शामिल हुए।

बिजली मंत्री रणजीत चौटाला ने कहा- कैमला प्रकरण में सीएम ने दिखाई परिपक्‍वता

दूसरी ओर, हरियाणा के बिजली मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने करनाल के कैमला में किसान महापंचायत के दौरान हुए घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। इस दौरान सीएम मनोहरलाल ने राजनीतिक परिपक्‍वता दिखाई। घरौंडा के भाजपा विधायक हरविंद्र कल्याण ने इस संवाद कार्यक्रम के आयोजन का साहस जुटाया था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल यदि हैलीपेड पर उतर जाते तो वहां स्थिति ज्यादा खराब हो सकती थी, लेकिन माहौल को बिगड़ने से बचाने के लिए वह वापस लौट गए और चंडीगढ़ पहुंचकर उन्होंने पूरे घटनाक्रम की आलोचना करते हुए अपना पक्ष रखा।

बिजली मंत्री रणजीत चौटाला ने चंडीगढ़ में कहा कि लोकतंत्र में ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने धैर्य रखा वरना राज्य सरकार के पास पर्याप्त पुलिस फोर्स है। उपद्रवियों के विरुद्ध तथा कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए कार्रवाई के आदेश दिए जा सकते थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने ऐसा नहीं किया और राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया। रणजीत चौटाला ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सोचा कि यह हमारे किसान भाई हैं। सांकेतिक विरोध कर चले जाएंगे, परंतु जिन लोगों ने उस कार्यक्रम में खलल डाला, उनको ऐसा कतई नहीं करना चाहिए था। उन्हें मुख्यमंत्री की बात को सुनना चाहिए था।

कैमला प्रकरण : 71 नामजद सहित 800 से अधिक लोगों पर केस

कैमला गांव में किसान महापंचायत में की गई तोडफ़ोड़ और उपद्रव के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रवैया अख्तियार कर लिया है। पुलिस ने 71 नामजद सहित 800 से अधिक आरोपितों पर केस दर्ज कर लिया। इनमें भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के अलावा तीन महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने तीन प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें बाद में जमानत पर छोड़ दिया गया। सबसे ज्यादा मामले कैमला के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुए हैं, जिसमें 19 आरोपित नामजद है। इसके बाद बसताड़ा गांव के आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है।

चढूनी पर उकसाने का आरोप, 25 पुलिसकर्मी चोटिल

घरौंडा थाना एसएचओ मोहन लाल ने बताया कि भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने प्रस्तावित 10 जनवरी की किसान महापंचायत के लिए इंटरनेट मीडिया के माध्यम से लोगों को उकसाया। इस वजह से 800 से 1000 की संख्या में लोग विरोध करने के लिए कैमला की तरफ बढ़े। पुलिस ने रोकने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

उन्‍होंने बताया कि खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाते हुए प्रदर्शनकारी मुख्य आयोजन स्थल तक पहुंचे। इस घटना में 25 पुलिसकर्मियों को चोट आई हैं। मोहन लाल के अनुसार, आंदोलनकारियों पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, अवैध घोषित भीड़ की ओर से पुलिसकर्मियों पर लाठी और पत्थरों से हमला करने व उन्हें चोट पहुंचाने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, साजिश के तहत घटना को अंजाम देने के आरोप के तहत कार्रवाई की गई है।

सभा का मंच तोड़ना गलत : नरेश टिकैत

दूसर ओर, उत्‍तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने क‍ह‍ा कि कृषि कानून के विरोध में आंदोलनरत कुछ लोगों द्वारा करनाल में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का सभा मंच तोड़ना गलत था। नरेश टिकैत इस घटना से आहत हैं। सिसौली लौटे चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि वह इस घटना की वह निंदा करते हैं। आंदोलन के बीच ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। भाकियू संस्थापक चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने कभी हिंसा की सीख नहीं दी

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