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Ram Mandir Donation Theft Case : क्या 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम गायब हुई ? 50 कर्मचारी जांच के घेरे में, 14,500 रुपये वेतन पाने वाले कर्मचारी बने करोड़पति ? जानिए कैसे खुला पूरा मामला ?

Ram Mandir Donation Theft Case

Ram Mandir Donation Theft Case

Ram Mandir Donation Theft Case : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने देशभर में हलचल मचा दी है। शुरुआती अनुमानों और चर्चाओं के मुताबिक, यह मामला 200 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित गबन या चोरी से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, इस आंकड़े की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या जांच समिति द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

Ram Mandir Donation Theft Case

Written by Kajal Panchal • Published on : 15 June 2026

IBN24 News Network : मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने विशेष जांच समिति (SIT) का गठन कर दिया है। वहीं सूत्रों के अनुसार, केंद्र स्तर पर भी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। जांच एजेंसियों द्वारा अब तक कुछ कर्मचारियों से करीब 2 करोड़ रुपये नकद, एक कार और तीन आईफोन बरामद किए जाने की चर्चा है।

मामला कैसे शुरू हुआ ?

श्रीराम जन्मभूमि परिसर में स्थापित दानपात्रों से निकाली जाने वाली नकदी को मंदिर परिसर के भीतर बने एक अत्यंत सुरक्षित और गोपनीय कक्ष में ले जाया जाता है। सुरक्षा कारणों से इस कक्ष का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया जाता।

यहीं पर चढ़ावे में प्राप्त नकदी की गिनती, बंडलिंग और रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया होती है। इस कार्य में कुल लगभग 50 कर्मचारी जुड़े हुए थे।

कर्मचारियों की व्यवस्था

1. 24 कर्मचारी

ये कर्मचारी नोटों की गिनती कर बंडल बनाते थे। इन्हें एक निजी एजेंसी के माध्यम से नियुक्त किया गया था।

2. 12 ट्रस्ट कर्मचारी

इनकी जिम्मेदारी गिनती करने वाले कर्मचारियों की निगरानी करना थी।

3. 14 कर्मचारी

इनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारी तथा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की ऑडिट टीम के सदस्य शामिल बताए जाते हैं।

बताया जाता है कि निजी एजेंसी के माध्यम से रखे गए अधिकांश कर्मचारियों को लगभग 14,500 रुपये मासिक वेतन मिलता था, जबकि ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग बिना वेतन सेवा भी दे रहे थे।

करोड़पति बनने की चर्चा से खुला मामला

सूत्रों के अनुसार पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब नोटों की गिनती से जुड़े कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में अचानक बड़ा बदलाव दिखाई देने लगा।

आरोप है कि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश, राजेश पाठक, रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव, केडी तिवारी, मनीष यादव, करुण, रितिक सिंह, श्रीवास्तव और मौर्य समेत कुछ कर्मचारी पिछले पांच वर्षों में करोड़पति बन गए।

इन लोगों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव देखा गया। महंगी गाड़ियां खरीदी गईं, जमीनों में निवेश हुआ और कई नई संपत्तियां सामने आईं। इस बदलाव ने अन्य कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच सवाल खड़े कर दिए।

बताया जाता है कि मंदिर प्रशासन के भीतर शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद रामकोट क्षेत्र के एक कर्मचारी ने इस चर्चा को सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद मामला स्थानीय स्तर से निकलकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया और फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया।

टिन्नू यादव पर सबसे ज्यादा चर्चा

50 करोड़ की संपत्ति का दावा

जांच के दायरे में आए प्रमुख नामों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार टिन्नू यादव, जो कभी अयोध्या में ऑटो चलाते थे, अब उनके नाम से अयोध्या और लखनऊ में लगभग 50 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां होने की चर्चा है।

उनका पैतृक घर राम मंदिर से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर स्वर्गद्वार क्षेत्र में स्थित है।

जांच में जिन संपत्तियों की चर्चा हो रही है, उनमें शामिल हैं:

बताया जा रहा है कि उनसे मंदिर परिसर स्थित PCF यात्री सुविधा केंद्र में पूछताछ की गई।

मनीष यादव के पास से 36 लाख मिलने की चर्चा

मनीष यादव को टिन्नू यादव का रिश्तेदार बताया जा रहा है।

आरोप है कि टिन्नू यादव के प्रभाव के कारण उन्हें भी मंदिर परिसर में रुपयों की गणना के कार्य से जोड़ा गया था।

चर्चा है कि जांच के दौरान उनकी निशानदेही पर लगभग 36 लाख रुपये नकद बरामद हुए। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

केडी तिवारी भी जांच के घेरे में

केडी तिवारी मंदिर में दान में आने वाले सोने-चांदी के आभूषणों को संभालने की जिम्मेदारी निभाते थे।

आरोप है कि उन्होंने लगभग 1.5 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी और करीब 5 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की।

हालांकि उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल गहनों को तौलकर रसीद जारी करना और उन्हें ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाना था।

उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सदस्य सरकारी सेवाओं में रहे हैं और उनकी संपत्तियां वैध स्रोतों से अर्जित की गई हैं।

राजेश पाठक की बदली जीवनशैली पर सवाल

अयोध्या के खाले पुरवा निवासी राजेश पाठक भी नोटों की गिनती करने वाली टीम का हिस्सा थे।

जांच एजेंसियां पिछले पांच से छह वर्षों के दौरान उनकी आर्थिक स्थिति और जीवनशैली में आए बदलावों की जांच कर रही हैं। हालांकि उनके संबंध में बरामदगी या संपत्ति का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

Ram Mandir Donation Theft Case

अनुकल्प मिश्रा पर भी जांच

सूत्रों के मुताबिक अनुकल्प मिश्रा का नाम भी जांच में सामने आया है।

बताया जाता है कि:

जांच एजेंसियां इन खर्चों और संपत्तियों के स्रोतों की पड़ताल कर रही हैं।

लवकुश: कार मैकेनिक से आलीशान जीवन तक

लवकुश मूल रूप से रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरान फगौली गांव के निवासी हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर में नौकरी मिलने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि:

केंद्र सरकार की निगरानी की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक चार दिन पहले दिल्ली से एक वरिष्ठ IPS अधिकारी विशेष विमान से अयोध्या पहुंचे थे।

बताया जा रहा है कि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मुलाकात की और घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। यह भी चर्चा है कि वह सीधे केंद्र सरकार को रिपोर्ट कर रहे हैं।

हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

SIT में कौन-कौन शामिल ?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT में तीन वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं:

विजय विश्वास पंत (IAS)

इनकी जिम्मेदारी दान और चढ़ावे की पूरी व्यवस्था का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करना है।

किरण एस. (IPS)

इन पर आपराधिक जांच की जिम्मेदारी होगी।

नीलरतन कुमार

SIT को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

Ram Mandir Donation Theft Case

संत समाज क्यों संतुष्ट नहीं ?

Ram Mandir Donation Theft Case

अयोध्या के कई संतों का कहना है कि जांच में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को भी शामिल किया जाना चाहिए था।

महंत कमलनयन दास ने कहा:

“इस जांच से कुछ होने वाला नहीं है। जब जांच करने वाले भी वही हैं तो निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे।”

नृपेंद्र मिश्र ने क्या कहा ?

मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने इस पूरे विवाद से दूरी बनाते हुए कहा कि उनका कार्य केवल मंदिर निर्माण से संबंधित है। ट्रस्ट के आंतरिक प्रशासनिक मामलों से उनका कोई संबंध नहीं है।

अभी क्या स्थिति है ?

राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी कथित घोटाले या चोरी के आरोप का प्रभाव केवल वित्तीय नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक स्तर पर भी पड़ता है। फिलहाल जांच जारी है और अभी तक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अदालत या जांच एजेंसी द्वारा अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है। इसलिए सभी आरोप जांच के अधीन हैं। आने वाले दिनों में SIT रिपोर्ट इस पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है।

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