पेट्रोल ₹33 हो जाएगा सस्ता-बियर में बचेंगे ₹17, GST के अंदर लाने वाली है मोदी सरकार!

पेट्रोल 100 रुपये, गैस सिलेंडर 1000 रुपये, आटा 35 रुपये और चावल 40 रुपये किलो. अब इतनी महंगाई में आम आदमी कैसे गुजारा कर रहा है? ये सिर्फ उसकी अंतरआत्मा ही जानती है. अब यदि सोचिए कि एक लीटर पेट्रोल आपको 70 रुपये मिलने लगे.

पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटते ही आटा-चावल के दाम भी कम हो जाएंगे. अब आप सोच रहे होंगे कि ये नामुमकिन है, क्योंकि महंगाई बढ़ तो सकती है पर घट नहीं सकती है. लेकिन अब ये ख्वाब सच होने वाला है. जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार जल्द ही पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने वाली है.

GST काउंसिल की बैठक में होगा फैसला

GST को देश में लागू हुए 5 साल पूरे हो चुके हैं. चंडीगढ़ में 28-29 जून को GST काउंसिल की बैठक होने वाली है. जानकारी के मुताबिक इस बैठक में मोदी सरकार कई बड़े फैसले ले सकती है. सूत्रों के अनुसार इस दौरान ही पेट्रोल-डीजल और बियर को GST के दायरे में लाया जा सकता है. GST काउंसिल की बैठक से पहले पीएम मोदी के आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन विवेक देबरॉय ने इसके संकेत दिए हैं. उनके हिसाब से महंगाई से निजात पाने के लिए GST काउंसिल की बैठक में सरकार बड़ा निर्णय ले सकती है.

केंद्र सरकार ने जीएसटी क्षतिपूर्ति मुआवजा लगाने की समयसीमा करीब चार साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक कर दी है। वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के मुताबिक नए नियम के तहत जुलाई 2022 से 31 मार्च 2026 तक राज्यों को भुगतान दिया जाएगा। यह राज्यों के लिए बड़ी राहत की खबर है।

कैसे राज्यों को राहत:

दरअसल, जीएसटी लागू होने पर राज्यों को होने वाली राजस्व क्षति की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति व्यवस्था लागू की गई थी। लेकिन इसे शुरू में सिर्फ पांच साल के लिए ही लागू किया जाना था जो 30 जून, 2022 को खत्म होने वाला था। वहीं, कई राज्यों ने केंद्र सरकार से क्षतिपूर्ति व्यवस्था जारी रखने की मांग करते हुए कहा था कि क्षतिपूर्ति व्यवस्था बंद होने से उन्हें राजस्व की किल्लत होने लगेगी। अब केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को राहत देते हुए यह अहम फैसला लिया गया है।

वजह क्या है:

महंगी वस्तुओं और गैर जरूरी सामान पर लगने वाला क्षतिपूर्ति उपकर मार्च 2026 तक लिया जाएगा ताकि जीएसटी राजस्व में हुए नुकसान की राज्यों को भरपाई करने के लिए 2020-21, 2021-22 के दौरान लिए गए कर्जों का भुगतान हो सके

केंद्र ने उपकर संग्रह में आई गिरावट की भरपाई के लिए वित्त वर्ष 2020-21 में उधारी जुटाकर 1.1 लाख करोड़ रुपये जारी किए थे जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में 1.59 करोड़ रुपये की उधारी ली थी। केंद्र सरकार ने राज्यों को 31 मई, 2022 तक देय जीएसटी क्षतिपूर्ति राजस्व का भुगतान कर दिया है।

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